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नोट बदलना हुआ दुश्वार बेचैन लोग, लंबी कतार; अंतिम तिथि आज

दिलाशा सेठ और अभिजित लेले /  March 31, 2017

नोटबंदी के दौरान विदेश में रहे लोगों को पुराने नोट बदलने के लिए दी गई मोहलत आज खत्म हो रही है लेकिन रिजर्व बैंक कार्यालयों के बाहर लगी भीड़ खत्म होने का नाम नहीं ले रही है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर की शाम में नोटबंदी का जो ऐलान किया था उसकी तपिश अभी तक महसूस की जा रही है। भारतीय रिजर्व बैंक ने कुछ शर्तों के साथ पुराने नोट जमा करने की छूट अब भी दी हुई है लेकिन नोटबंदी की अवधि में देश से बाहर रहने वाले कुछ लोगों को इससे भी राहत नहीं मिल पा रही है। जिन लोगों ने भी नोटबंदी के एक दिन बाद 10 नवंबर को विदेश के लिए उड़ान पकड़ी थी, उन्हें अब पुराने नोट जमा करने से मना कर दिया जा रहा है।

रिजर्व बैंक का कहना है कि इन लोगों के पास पुराने नोट बदलने या जमा करने के लिए 9 नवंबर का समय था लेकिन उस समय ऐसा नहीं किया गया। लिहाजा नोटबंदी के दौरान विदेश में रहने वाले भारतीयों को मिली नोट वापसी की सुविधा का फायदा इन लोगों को नहीं दिया जा सकता है। लेकिन रिजर्व बैंक के इस दावे में इस वजह से खास दम नजर नहीं आता है कि 9 नवंबर को तो सारे बैंक और एटीएम ही बंद रखे गए थे ताकि 10 नवंबर से पुराने नोटों को जमा करने की तैयारी की जा सकी। इसके बावजूद रिजर्व बैंक इन प्रभावित लोगों की दलील मानने को तैयार नहीं है।

पुराने नोटों को बदलने की समयसीमा 31 मार्च को ही खत्म हो रही है। इसका मतलब है कि अब लोगों के पास रखे पुराने नोट बदलने के लिए चंद घंटों का ही समय बचा रह गया है। इस वजह से रिजर्व बैंक के तमाम कार्यालयों के बाहर लोगों की भारी भीड़ लग रही है। कुछ जगहों पर तो लोग सुबह चार बजे से ही लाइन में लग जा रहे हैं। यह अलग बात है कि रिजर्व बैंक के कर्मचारी सुबह 10 बजे से ही काम शुरू करते हैं और दोपहर तीन बजे नोट बदलने का काम बंद कर दिया जाता है। ऐसे में रोजाना सैकड़ों लोगों को निराश होकर लौटना पड़ता है। रिजर्व बैंक के एक अधिकारी से जब इस समस्या के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'हम तय नियमों के ही मुताबिक काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अपनी तरफ से हम इस नियम में एक मिलीमीटर भी बदलाव नहीं कर सकते हैं।'

एक बीमा कंपनी में काम करने वाले दीपक सिंह भी रिजर्व बैंक के कार्यालय अपने पुराने नोट बदलने के लिए पहुंचे हुए थे। उनके पास सारे जरूरी दस्तावेज भी मौजूद थे जिनमें विदेश प्रवास साबित के लिए पासपोर्ट पर लगी मुहर और सभी बैंक खातों का विवरण भी शामिल है। लेकिन इसके बाद भी उनके नोट बदलने से मना कर दिया गया। इसकी वजह यह बताई गई कि उन्होंने नोटबंदी के ऐलान के एक दिन बाद यानी 10 नवंबर को कनाडा के लिए उड़ान पकड़ी थी।

उन्हें रिजर्व बैंक के इस फैसले से काफी निराशा हुई है। उन्होंने कहा, 'पुराने नोट बदलने का काम ही जब 10 नवंबर से शुरू हुआ था तो 9 नवंबर को उस समयसीमा में शामिल कर लेना पूरी तरह गैरवाजिब है। लेकिन हमारी सुनने के लिए कोई भी तैयार नहीं है। मैं फरवरी में कनाडा से लौटकर आने के बाद से तीन बार रिजर्व बैंक आ चुका हूं लेकिन अब तक नोट बदले नहीं जा सके हैं।'
हालांकि रिजर्व बैंक के बाहर लंबी कतार में कुछ ऐसे लोग भी नजर आए जो नोटबंदी के एक हफ्ते बाद विदेश गए थे। जब उनसे यह जानने की कोशिश की गई कि उस दौरान उन्होंने अपने पास रखे पुराने नोट क्यों नहीं बदले तो उनका यही कहना है कि उस दौरान बैंकों के बाहर लगी लंबी भीड़ ने उन्हें ऐसा नहीं करने दिया। लोगों ने रिजर्व बैंक से इस पहलू को ध्यान में रखने की दरखास्त की।

जब बिज़नेस स्टैंडर्ड ने रिजर्व बैंक के एक अधिकारी के समक्ष लोगों की इन समस्याओं को रखा तो उन्होंने कहा, 'लोगों की कुछ असली समस्याएं और वजहें हो सकती हैं लेकिन हम शीर्ष स्तर से आए निर्देशों से बंधे हुए हैं। हमें साफ तौर पर कहा गया है कि नियमों का सख्ती से अनुपालन किया जाए।'

रिजर्व बैंक की वेबसाइट पर जारी सूचना में साफ तौर पर कहा गया है कि 9 नवंबर से लेकर 30 दिसंबर 2016 के दौरान विदेश में रहने वाले भारतीय नागरिकों को ही पुराने नोट जमा करने या बदलने की इजाजत होगी। रिजर्व बैंक के केवल दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता और नागपुर स्थित पांच कार्यालयों में ही पुराने नोट बदले जा रहे हैं।

रिजर्व बैंक के बाहर लगी कतार में खड़े लोगों को अक्सर यह उद्घोषणा सुनाई दे रही है कि 9 नवंबर से 30 दिसंबर के दौरान एक भी दिन के लिए भारत में मौजूद रहे शख्स के नोट बदले नहीं जाएंगे। इन लोगों को कतार से हट जाने के लिए भी बार-बार कहा जा रहा है।

अनिवासी भारतीय परेशान

रिजर्व बैंक ने अनिवासी भारतीयों को 30 जून तक पुराने नोट बदलने या जमा करने की छूट दी हुई है लेकिन रिजर्व बैंक के बाहर कतार में खड़े लोगों में से कई लोग अनिवासी भारतीय (एनआरआई) भी हैं। दिल्ली के अलावा पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान से भी आए इन लोगों में से अधिकतर एनआरआई सऊदी अरब, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में काम करने वाले मजदूर हैं। एनआरआई लोगों का एक और समूह पंजाब से आया हुआ है जो बड़ी संख्या में कनाडा में काम करते हैं।

लेकिन इन लोगों के पास कस्टम विभाग की तरफ से दिया जाने वाला प्रमाणपत्र नहीं होने से काफी समस्या हो रही है। रियाद में दो साल बिताने के बाद गत 31 जनवरी को भारत लौटने वाले सलीम अहमद कहते हैं, 'मुझे रिजर्व बैंक कार्यालय आने पर बताया गया कि कस्टम प्रमाणपत्र नहीं होने से नोट नहीं बदले जा सकेंगे। क्या आव्रजन की मुहर काफी नहीं है। यह तो सरासर परेशान करने वाली बात है।' दुबई में काम करने वाले सत्य पाल की भी कुछ ऐसी ही कहानी है।

दरअसल पुराने नोट बदलने के लिए आ रहे लोगों की इतनी कड़ाई से स्क्रीनिंग की जा रही है कि उसमें एक से दो घंटे तक का वक्त लग जा रहा है। कई लोग तो शर्तें पूरी नहीं कर पाने की वजह से दोबारा स्क्रूटनी के स्तर पर पहुंच जा रहे हैं। लोगों को पेश आ रही इन समस्याओं के बारे में पूछे जाने पर रिजर्व बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'जिन लोगों को पुराने नोट बदलने नहीं बल्कि जमा करने हैं, उनके साथ भी कई तरह की तकनीकी समस्या खड़ी हो रही है। जमा हो रही रकम उनके खाते में जा ही नहीं रही है। हम इसका समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन हमें नहीं पता कि यह कब तक हो पाएगा?'

दुखदायी अनुभव ने खोले अवैध रास्ते

रिजर्व बैंक में पुराने नोट बदलने के लिए भले ही लोगों को कई पेचीदगियों का सामना करना पड़ रहा है लेकिन केंद्रीय बैंक की इमारत के ठीक सामने ही अवैध तरीके से नोट बदलने का काम धड़ल्ले से चल रहा है। हां इतना जरूर है कि इसके लिए आपको 50 फीसदी से लेकर 90 फीसदी कमीशन देना पड़ सकता है। रिजर्व बैंक की सुरक्षा में तैनात केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के जवानों की ठीक नाक के नीचे हो रहे इस गोरखधंधे की भनक किसी को भी लग सकती है। बिज़नेस स्टैंडर्ड के संवाददाताओं को भी वहां एक दलाल मिला जिसने पुराने नोट तत्काल बदलने की पेशकश की। उसने कहा, 'अगर आप मुझे पुराने नोट में एक लाख रुपये देते हैं तो मैं यहीं पर आपको 20 हजार रुपये दे दूंगा। अगर लाइन में लगे रहकर रिजर्व बैंक में नोट बदलना चाहते हैं तो शायद आपको एक पैसा भी नहीं मिल पाएगा।'

कानूनी तरीके से नोट बदलने में आ रही दिक्कतों के चलते कई लोग इन दलालों के पास जा भी रहे हैं। गुरुवार सुबह ही कुछ लोगों ने 50 फीसदी कमीशन पर अपने पुराने नोट बदल लिए। लेकिन समयसीमा करीब आने से गैरकानूनी तरीके से पुराने नोट बदलने वालों का कमीशन बढ़ता जा रहा है। रिजर्व बैंक के पास पटरी पर दुकानें लगाने वालों का भी धंधा खूब चल रहा है।

वैसे तो रिजर्व बैंक ने नोटबंदी के दौरान देश के भीतर रहने वाले लोगों को पुराने नोट जमा करने के लिए 30 दिसंबर तक का वक्त दिया था लेकिन उसके बाद भी कुछ लोगों के पास पुराने नोट बचे रह गए। इनमें से अधिकांश कमजोर तबके के लोग हैं और वे रिजर्व बैंक भवन के बाहर इस उम्मीद पहुंच रहे हैं कि उनके दो-चार हजार रुपये बदल दिए जाएं। हालांकि उन लोगों को सुरक्षाकर्मी गेट से ही लौटा दे रहे हैं।

 

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