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वित्त वर्ष 2018 में बाजार रहेगा अस्थिर

पुनीत वाधवा / नई दिल्ली March 29, 2017

वित्त वर्ष 2016-17 भारतीय इक्विटी बाजार के लिए अच्छे रहे हैं और इसमें करीब 17 फीसदी की उछाल दर्ज हुई है, जबकि निफ्टी-50 सूचकांक इस अवधि में 52 हफ्ते के उच्चस्तर 9,218 को छू गया। निवेशकों को उम्मीद है कि अगले वित्त वर्ष यानी 2017-18 में भी यह रफ्तार बनी रहेगी।
विश्लेषकों का कहना है कि जुलाई में जीएसटी के क्रियान्वयन, मॉनसून और महंगाई व कंपनियों की आय पर इसके असर, आगामी फ्रांस चुनाव के नतीजे, अमेरिकी राष्ट्रपति की नीतियां और तेल की कीमत की दिशा कुछ ऐसे घटनाक्रम हैं, जो वित्त वर्ष 2018 के माहौल पर असर डाल सकता है। इसके अलावा इक्विटी बाजार में विदेशी निवेशकों व देसी म्युचुअल फंड की तरफ से होने वाला निवेश भी बाजार की रफ्तार को बनाए रखने के लिए अहम होंगे।
केयर रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने एक रिपोर्ट में कहा है, भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन वित्त वर्ष 2017 के मुकाबले निश्चित तौर पर बेहतर रहने की उम्मीद है। नोटबंदी का असर सीमित रहा है। हमें लगता है कि अगले साल बढ़त की रफ्तार 7.5-8 फीसदी रहेगी, जो सीएसओ के मुताबिक वित्त वर्ष 2017 में 7.1 फीसदी रही। यह बाजार और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की तरफ से निवेश के लिए बेहतर रहेगा। उन्होंने कहा, एकमात्र देसी जोखिम मॉनसून होगा। सरकार जीएसटी के क्रियान्वयन की राह पर है, जो निवेशकों को और भरोसा देगा। वैश्विक स्तर पर ब्रेक्सिट पर अनिश्चितता और अमेरिका में लागू होने वाली आर्थिक नीतियां उभरते बाजारों में निवेश को लेकर होने वाले फैसले को प्रभावित कर सकती हैं।

आगे आय की रफ्तार रहेगी अहम
ज्यादातर विश्लेषक अगले 6 से 12 महीने के लिहाज से इक्विटी बाजार के सकारात्मक रहने की बात कह रहे हैं, लेकिन विश्लेषकों का यह भी मानना है कि हालिया तेजी को देखते हुए अल्पावधि से मध्यम अवधि में बाजार अस्थिर रह सकता है। उच्च स्तर पर बाजार के टिके रहने के लिए कंपनियों की आय में सुधार जरूरी है।
एडलवाइस ऐसेट मैनेजमेंट के मुख्य निवेश अधिकारी (इक्विटीज) हर्षद पटवर्धन ने कहा, 12 महीने आगे के आधार पर मूल्यांकन अभी करीब 17.3 गुना है। आने वाले दिनों में आय में सुधार जरूरी है ताकि मौजूदा रफ्तार बना रहे। उन्होंने कहा, हम हालिया तेजी के चलते अल्पावधि में सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं, लेकिन मध्यम से लंबी अïवधि में भारतीय इक्विटी को लेकर हमारा नजरिया सकारात्मक बना हुआ है।
विश्लेषकों का कहना है कि बाजार अस्थिर या सीमित दायरे में रहेगा, कम से वित्त वर्ष 2018 की पहली छमाही में क्योंकि वे अन्य वैश्विक घटनाक्रम के बीच जीएसटी के क्रियान्वयन के असर का अनुमान लगा रहे हैं।
एवेंडस कैपिटल ऑल्टरनेट स्ट्रैटिजी के मुख्य कार्याधिकारी एंड्यू हॉलैंड ने कहा, कंपनियों की आय को लेकर हमारा मानना है कि वित्त वर्ष 2018 में इसकी रफ्तार 10-12 फीसदी रहेगी। मैं जुलाई 2017 में जीएसटी के क्रियान्वयन को लेकर थोड़ा सतर्क हूं। जीएसटी के क्रियान्वयन से पहले कंपनियों की तरफ से कुछ डी-स्टॉकिंग हो सकती है। ऐसे में हमें यह देखना चाहिए कि आखिर चीजें कैसे आगे बढ़ती है।
निजी क्षेत्र के बैंक, उपभोक्ता से संबंधित क्षेत्र और अन्य वैश्विक बाजार में निवेश वाली कंपनियों पर हमारा नजरिया तेजी का है। हमें आईटी, फार्मा और दूरसंचार क्षेत्र के शेयर पसंद नहीं हैं।

निवेश का प्रवाह
विश्लेषकों का कहना है कि मजबूत डॉलर और आगे ब्याज दर पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख से उभरते बाजारों में निवेश पर विपरीत असर पड़ सकता है, लेकिन भारत निवेश का बेहतर गंतव्य बना रहेगा। देसी निवेश इस मामले में संतुलन बनाए रखेंगे।

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