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टावर फर्म में भारती एयरटेल ने बेचा हिस्सा

मेघा मनचंदा, राम प्रसाद साहू और अभिनीत कुमार / नई दिल्ली/मुंबई 03 28, 2017

कर्ज घटाने की कवायद

एयरटेल ने कर्ज घटाने के लिए भारती इन्फ्राटेल में निजी इक्विटी फर्मों को बेचा 10 फीसदी हिस्सा

देश की अग्रणी दूरसंचार कंपनी भारती एयरटेल ने अपनी टावर कंपनी भारती इन्फ्राटेल का 10.3 फीसदी हिस्सा 6,193.9 करोड़ रुपये में वैश्विक निजी इक्विटी फर्मों के समूह को बेच दिया है। इस समूह में केकेआर और कनाडा पेंशन प्लान इनवेस्टमेंट बोर्ड शामिल हैं। इस कदम से भारती को अपना करीब एक लाख करोड़ रुपये का कर्ज कम करने में मदद मिलेगी, साथ ही उसका नकद भंडार बढ़ेगा जिसे वह दूरसंचार में एकीकरण के मद्देनजर बुनियादी ढांचे में निवेश कर सकती है।

इसी के साथ केकेआर ने भारती इन्फ्राटेल में फिर से निवेश किया है। इससे पहले उसने वर्ष 2007 में कंपनी में निवेश किया था लेकिन दिसंबर 2012 और जून 2015 के बीच उसने इसे तीन हिस्सों में बेच दिया था। इस तरह उसे करीब 1.5 गुना मुनाफा हुआ था। सुनील भारती मित्तल की अगुआई वाली कंपनी ने मंगलवार को भारती इन्फ्राटेल के 19 करोड़ से अधिक शेयरों की द्वितीयक बिक्री पूरी होने की घोषणा की। यह सौदा 325 रुपये प्रति शेयर पर हुआ। कंपनी का कहना है कि बिक्री से मिली राशि से वह अपना कर्ज घटाएगी। कंपनी पर 31 दिसंबर तक करीब 97,000 करोड़ का कर्ज था। 

कंपनी ने भारती इन्फ्राटेल में अपना नियंत्रण हिस्सा नहीं बेचने को प्राथमिकता दी है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर बेहतर मूल्यांकन मिला तो कंपनी आगे और हिस्सा बेच सकती है। आज भारती इन्फ्राटेल का शेयर 2 फीसदी बढ़कर बंद हुआ। यह शेयर साल की शुरुआत से ही 18 फीसदी गिरा हुआ था। भारती एयरटेल के शेयर में 0.6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और यह 340.65 रुपये पर बंद हुआ।

इस सौदे के बाद भारती इन्फ्राटेल में मूल कंपनी भारती एयरटेल की हिस्सेदारी 61.7 फीसदी रह जाएगी जबकि केकेआर और सीपीपीआईबी की 10.3 फीसदी हो जाएगी। सूत्रों के अनुसार कंपनी भारती इन्फ्राटेल में 11.33 फीसदी हिस्सेदारी और बेचने के लिए भी बातचीत कर रही है। भारती पहले इस कंपनी में बहुलांश हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रही थी लेकिन उसने इसे टाल दिया था और हाल में घोषणा की थी कि वह 21.63 फीसदी हिस्सा निवेशकों को बेच सकती है।

मोर्गन स्टैनली के पराग गुप्ता और अमृता पाबलकर ने कहा कि हिस्सेदारी बेचने से एयरटेल को भारतीय वायरलेस कारोबार में पूंजीगत खर्च बढ़ाने की गुंजाइश मिल जाएगी जिससे कि वह अपना डेटा नेटवर्क बढ़ा सकेगी और रिलांयस जियो की चुनौती से निपट सकेगी।

Keyword: भारती इन्फ्राटेल, निजी इक्विटी, दूरसंचार, भारती एयरटेल, केकेआर, कनाडा पेंशन प्लान इनवेस्टमेंट,
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