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ऋण पुनर्गठन में शुरू हो सकती है ग्रेड प्रणाली

अनूप रॉय और हंसिनी कार्तिक / मुंबई March 28, 2017

सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) डूबते ऋण से निपटने के लिए ऋण पुनर्गठन में ग्रेड प्रणाली लागू कर सकती है। केंद्रीय बैंक द्वारा लागू की गई इस प्रकार की सभी योजनाओं का उपयोग किया जाएगा जो प्रावधान संबंधी जरूरतों पर निर्भर करेगा। साथ ही बकाये की वसूली के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक निजी इक्विटी (पीई) निवेशकों की तरह आक्रामक रुख अख्तियार कर सकते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य बैंकों के हितों की रक्षा करना है।
इस मामले से अवगत बैंक के एक वरिष्ठï अधिकारी ने कहा, 'डूबते ऋण वाली कंपनियों में साझेदारी के लिए बैंक पिछले कुछ महीने से तमाम निजी इक्विटी खिलाडिय़ों और देश-विदेश की बड़ी कंपनियों से बातचीत कर रहे हैं।' उन्होंने कहा, 'बैंक और इस प्रकार के पीई खिलाड़ी या कंपनियां भी डूबते ऋण का एक हिस्सा उठा सकते हैं जिन्हें इक्विटी में बदला जाएगा।'
बैंकरों ने बताया कि बैंक और पीई खिलाड़ी पूरी तरह ऋण में अपने हितों पर ध्यान केंद्रित करेंगे न कि पूरी कंपनी पर। फिलहाल डूबते ऋण के लिए न्यूनतम प्रावधान की व्यवस्था है जो ब्याज भुगतान न करने के 91 दिनों बाद 25 फीसदी होता है। जबकि छह महीने के बाद ऋण के लिए न्यूनतम प्रावधान की रकम 40 फीसदी तक बढ़ सकती है और पांचवें साल जब उसे बट्टïे खाते में डाला जाता है तक प्रावधान की रकम 100 फीसदी हो जाती है।
सूत्रों ने बताया कि नई योजना के तहत इस प्रक्रिया के आरंभ में प्रावधान की रकम को घटाकर 10 से 15 फीसदी कर दिया गया है लेकिन आगे उसमें तेजी से बढ़ोतरी की गई है।
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शनिवार को मुंबई में आयोजित बिजनेस स्टैंडर्ड वार्षिक पुरस्कार समारोह को संबोधित करते हुए कहा, 'कुछ लोग लगातार चूककर्ताओं से निपटने मेंं बैंकिंग प्रणाली की अक्षमता का फायदा उठा रहे हैं। उस पर लगाम लगाने की जरूरत है।'
नई प्रणाली में संयुक्त लेनदार फोरम गठित करते समय शुरुआती चरण में प्रावधान की रकम को 25 फीसदी से घटाकर 10 से 15 फीसदी किया जा सकता है। कॉरपोरेट ऋण पुनर्गठन (सीडीआर) की प्रक्रिया शुरू होते समय 15 से 25 फीसदी प्रावधान की जरूरत हो सकती है। यदि ऋण के लिए किसी निरीक्षण तंत्र की जरूरत पड़ती है तो प्रावधान की रकम कम से कम 25 फीसदी होगी। इसके बावजूद समस्या का हल न निकलने पर ऋण को रणनीति ऋण पुनर्गठन (एसडीआर) के लिए भेजा जाता है और डूबती परिसंपत्तियों के स्थायी पुनर्गठन (एस4ए) के लिए चरण में काफी अधिक प्रावधान की दरकार होती है।
एसडीआर के तहत बैंक ऋण के एक हिस्से को इक्विटी में बदलकर कंपनी का नियंऋण अपने हाथों में ले सकता है। इस प्रकार ऋणदाता उस कंपनी के प्रवर्तकों को हटाकर एक नया प्रबंधन स्थापित कर सकता है अथवा वह कंपनी के पुनरुद्धार के लिए बाहरी प्रबंधन सलाहकारों की सेवाएं भी ले सकता है और अंतत: कंपनी को बेच सकता है। एस4ए योजना के तहत बैंक ऋण को दो हिस्सों- स्थायी और अस्थायी- में बांटकर अस्थायी हिस्से का पुनर्गठन तत्काल करता है।

Keyword: Government, RBI, loan restructuring,
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