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यूपी में ग्रामीण कर्ज 2 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान

वीरेंद्र सिंह रावत / लखनऊ March 28, 2017

उत्तर प्रदेश के नवनियुक्त मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने किसान कर्ज माफी के चुनावी वादों को पूरा करने के लिए अभी खाका तैयार नहीं किया है लेकिन राष्टï्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के मुताबिक प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में 2017-18 में कर्ज की क्षमता करीब 2,07,000 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।
इस अनुुमान के मुताबिक प्रदेश में संभावित ग्रामीण उधारी योजना (आरसीपी) पिछले वित्त वर्ष के 1,78,000 करोड़ रुपये से करीब 17 फीसदी अधिक है। किसानों की कर्ज माफी सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधानसभा चुनावों के प्रमुख वादों में से एक है। प्रदेश में कुल बकाया कृषि कर्ज फिलहाल 50,000 करोड़ रुपये है। हालांकि राज्य सरकार केवल सहकारी बैंकों के कर्ज को ही माफ करने के लिए अधिकृत होती है और राज्य में सहकारी बैंकों का किसान कर्ज कुल कृषि कर्ज का करीब 20 फीसदी यानी 10,000 करोड़ रुपये है।
वाणिज्यिक बैंकों द्वारा दिया गया कर्ज राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र से बाहर है और अगर राज्य सरकार यह कर्ज भी माफ करना चाहती है तो उसे बजट में इसके लिए अतिरिक्त आवंटन करना होगा।
इस बीच, राज्य में कर्ज प्रवाह का अनुमान 2015-16 की तुलना में 2016-17 में 25 फीसदी ज्यादा है। नाबार्ड ने हाल में राज्य केंद्रित पत्र जारी किया है जिसमें यूपी के ग्रामीण इलाकों में 2017-18 के दौरान 2,07,903 करोड़ रुपये कर्ज मांग का अनुमान है। यह कर्ज मांग कृषि उत्पादन, पशुपालन, मत्स्यन, जल संसाधन, पौधरोपण एवं बागवानी, ग्रामीण बुनियादी ढांचा, अक्षय ऊर्जा, ग्रामीण आवास, निर्यात एवं शिक्षा आदि क्षेत्रों में हो सकती है।
प्रदेश की कृषि विपणन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) स्वाति सिंह ने घोषणा की है कि राज्य कृषि विपणन बोर्ड (मंडी परिषद) किसानों की आय बढ़ाने के लिए नाबार्ड के साथ सहयोग की संभावना तलाशेगा। नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक एके पांडा ने सरकार से आग्रह किया है कि फॉर्मर्स प्रोड्यूसर्स ऑर्गेनाइजेशन (एफपीओ) के लिए ई-मंडी शुल्क माफी किया जाए, साथ ही संगठन को पूंजीगत मदद मुहैया कराई जाए, ताकि 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने के केंद्र सरकार की योजना साकार हो सके।

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