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सही विचार नहीं

संपादकीय /  March 28, 2017

शिवसेना के सांसद रवींद्र गायकवाड़ ने पिछले दिनों एक उड़ान के दौरान एयर इंडिया के ड्यूटी मैनेजर के साथ मारपीट की, जिसके बाद विमानन कंपनियों ने उनकी उड़ान पर रोक लगा दी। इस घटना के बाद नागरिक उड्डïयन मंत्रालय ऐसे लोगों की एक आधिकारिक सूची बनाने पर विचार कर रहा है जिनको उड़ान भरने से रोका जा सकता है। इसके अलावा वह ऐसे नियम भी तय करने पर विचार कर रहा है जिनके चलते कोई विमानन कंपनी किसी व्यक्ति को अपने साथ यात्रा करने से रोक सकती है। यह खराब सोच का परिचायक है। एक निर्वाचित प्रतिनिधि द्वारा किए गए दुव्यर्वहार के खिलाफ निजी क्षेत्र की कंपनियों द्वारा अपनी सरकारी प्रतिस्पर्धी विमानन कंपनी के कदम का समर्थन करने की सराहना करने को छोड़ दिया जाए तो ऐसे कदम तमाम गलत संकेत देते हैं। ऐसा करने से एक ऐसे मसले में सरकारी हस्तक्षेप की राह बनेगी जिसे अन्यथा विमानन कंपनियों द्वारा अपने स्तर पर निपटाया जाना चाहिए।
इस कदम को लेकर किसी को यह भी लग सकता है कि सरकार गायकवाड़ के मुद्दे पर अस्पष्टï है। उनका हमला दोहरी निंदा के योग्य है क्योंकि विमानन सेवा द्वारा उनके सांसद होने की पात्रता को नहीं निभा पाने के कारण उन्होंने अपनी ताकत का सुस्पष्टï दुरुपयोग किया था। वह इकनॉमी श्रेणी के विमान में बिजनेस क्लास की सीट की मांग कर रहे थे। यह बात भी चौंकाने वाली है कि लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन को विमानन सेवाओं द्वारा सांसद का बहिष्कार किए जाने के बाद शिवसेना के विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव पर भी विचार करना पड़ा। निश्चित तौर पर संसद के सदस्यों के पास कहीं अधिक अहम मुद्दे विचारार्थ होंगे।
इतना ही नहीं ये नियम और उड़ान से रोकने वाली सूची विमानन उद्योग की ओर से आए, तभी उचित होगा। यह उद्योग में निजी क्षेत्र का दबदबा है। इसके तहत अंतरराष्टï्रीय विमानन कानून के अनुसार ही यात्रियों को उड़ान भरने देने या न भरने देने का निर्णय लिया जा सकता है। यह मसला विमान सुरक्षा से जुड़ा है। खबरों के मुताबिक नियमों में बदलाव लाकर गायकवाड़ को उड़ान भरने दिया जा सकता है। महाजन ने कहा कि सांसद, संसद आने के लिए हमेशा ट्रेन से सफर नहीं कर सकते। सरकार को सार्वजनिक व्यवहार को तय करना नुकसानदेह हो सकता है जबकि संविधान पहले ही नागरिक अधिकारों की व्याख्या कर चुका है। ऐसे नियम कानूनी चुनौती का सबब बन सकते हैं। अमेरिका में 9/11 की घटना के बाद ऐसी सूची बनी थी लेकिन इससे कोई उद्देश्य सफल नहीं हुआ। अमेरिका की ऐसी सूची का सबसे बुरा पहलू यह है कि इस बारे में कोई स्पष्टï निर्देश नहीं हैं कि कौन उड़ान भर सकता है और कौन नहीं? ऐसे में किसी भी बात पर प्रतिबंध लग सकता है। सोशल मीडिया पर कुछ असंयमित लिखने से लेकर, फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन को सूचना देने से इनकार तक कुछ भी वजह हो सकती है। नागरिक अधिकारों को संरक्षण नहीं मिलने का असर सामाजिक पूर्वग्रह के रूप में सामने आता है। अमेरिका में ऐसी सूची में मुस्लिमों की भरमार है। इतना ही नहीं विमानन कंपनियां एक जैसे नामों को लेकर भ्रमित होती हैं जिससे दिक्कत बढ़ जाती है। वर्ष 2014 में दिक्कत तब बढ़ गई जब एक अमेरिकी अदालत ने अमेरिकी नागरिक अधिकार संगठन द्वारा दाखिल एक याचिका पर सुनवाई में उस सूची की प्रणाली को असंवैधानिक करार दे दिया। भारत में राजनीति साफ तौर पर ध्रुवीकृत है। ऐसे में सामान्य यात्री निष्पक्षता की उम्मीद ही नहीं कर सकता। ऐसी किसी सूची का विचार उचित नहीं प्रतीत होता। यह काम विमानन कंपनियों पर छोड़ दिया जाए तो बेहतर। संभव है तब निकट भविष्य में गायकवाड़ विमान के बजाय ट्रेन से सफर करते नजर आएं।

Keyword: Air india, ravindra gaikwad, Airlines,
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