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कुछ शर्तों के साथ बनेगी बात

नम्रता आचार्य / कोलकाता March 24, 2017

दस सरकारी बैंकों के कर्मचारियों के संगठन अपने बैंकों के उद्धार के लिए प्रस्तावित योजना पर हस्ताक्षर करने को सहमत हो गए हैं। आज कोलकाता में हुई सभी यूनियनों की बैठक में यह भी कहा गया कि बैंकों में सुधार के लिए प्रस्तावित ब्लूप्रिंट पर बैंक कर्मचारी संगठनों से भी चर्चा करनी होगी। उम्मीद की जा रही है कि बैंक संगठन अपने कर्मचारियों के भत्तों में कटौती के मसले पर भी कुछ शर्तों के साथ तैयार हो जाएंगे। अगर ऐसा हुआ तो यह बैंकों को बड़ी राहत होगी।
ऑल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन (एआईबीईए) के अध्यक्ष राजेन नागर ने बिजनेस स्टैंडर्ड से बातचीत में कहा, 'हमने फैसला किया है कि प्रस्तावित सुधार योजना को लेकर सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने में कोई आपत्ति नहीं की जाएगी। हम  लागू किए जाने के पहले इस पर चर्चा करेंगे।'
बहरहाल कल बैंक प्रबंधन ने यूनियनों को एमओयू की प्रति दे दी, जिसमें कहा गया है, 'प्रबंधन, कर्मचारी संगठन और अधिकारियों का संगठन इस एमओयू के माध्यम से प्रतिबद्धता जताएंगे कि वे सुधार योजना को सफलतापूर्वक लागू करने का दायित्व लेंगे।'
बैंकों के लिए सुधार योजना एसबीआई कैप्स की ओर से तैयार की जा रही है। नागर ने कहा, 'बैंकों द्वारा की जा रही कटौती के बारे में हम फैसला करेंगे। अगर वे 50 प्रतिशत कटौती की बात करते हैं तो स्वाभाविक रूप से यह हमें स्वीकार्य नहीं होगा।'  
बैंक पुनर्गठित परिसंपत्ति के मामले में और पारदर्शिता की मांग करेंगे और बड़े डिफाल्टरों का नाम सार्वजनिक करने की मांग करेंगे। हाल ही में सरकार ने 10 बैंकों को पत्र भेजकरक कहा था कि वे पुनरुद्धार व उसके लिए पूंजी का खाका तैयार करें। पत्र में यह भी कहा गया था कि कर्मचारियों के कुछ लाभों में अस्थायी आधार पर कटौती भी की जा सकती है।
ज्यादा गैर निष्पादित संपत्तियों (एनपीए) वाले कुछ बैंकों को अन्य की तुलना मेंं ज्यादा कड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं। उदाहरण के लिए कोलकाता के यूको बैंक का सकल एनपीए पिछली तिमाही के आखिर में 17.18 प्रतिशत था।
यूको बैंक के एमडी और सीईओ आरके ठक्कर ने कहा, 'कोई भी समझौता कर्मचारियों के पूर्ण समर्थन के बाद ही लागू किया जाएगा।' यूको बैंक को सरकर से पुनर्पूंजीकरण के लिए पहले ही 775 करोड़ रुपये मिल चुके हैं और अभी उसे 1,150 करोड़ रुपये मिलने हैं। बैंक को 31 दिसंबर 2016 को समाप्त तिमाही में 437 करोड़ रुपये का शुद्ध नुकसान हुआ है।
यूनाइटेड बैंक आफ इंडिया के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी पवन कुमार बजाज ने इस मसले पर कुछ भी कहने से इनकार किया है। बैंक ने पहले ही कुछ सुधारात्मक कदम उठाए हैं, जिसमें बिजली बिल में कटौती और शाखाओं को तार्किक बनाने के लिए मूल्यांकन करना शामिल है। कुछ अव्यावहारिक शाखाओं को बंद किया जा सकता है या उन्हें छोटी जगहों पर स्थानांतरित किया जा सकता है। 31 दिसंबर 2016 को समाप्त तिमाही में बैंक को 64.10 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ है। बहरहाल पिछली तिमाही के आखिर में बैंक का एनपीए करीब 15.98 प्रतिशत था। बैंक को केंद्र से करीब 418 करोड़ रुपये पूंजी आवंटन हुआ है।
इस मसले पर इलाहाबाद बैंक के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक राकेश सेठी से बात नहीं हो सकी। बैंक को पिछली तिमाही में 75 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था। बहरहाल बैंक का सकल एनपीए 12.51 प्रतिशत पर पहुंच गया है। बैंक को सरकार से 418 करोड़ रुपये आवंटित हुए हैं।

Keyword: banks, union, AIBEA,
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