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अनुशासन से निकलेगा उत्तर प्रदेश का सुशासन

जयदीप घोष /  March 23, 2017

उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रचंड जीत ने जहां कई लोगों को चौंका दिया वहीं योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाने का पार्टी का फैसला विपक्षी दलों, मीडिया और यहां तक कि पार्टी के ही कुछ नेताओं के गले नहीं उतर रहा है।
लेकिन गोरखपुर के कई स्थानीय लोग इस फैसले से बिल्कुल भी चकित नहीं हैं। उनका मानना है कि काम करने के तरीके, जीवन शैली और हिंदू कट्टïरपंथी की छवि को देखते हुए आदित्यनाथ (परिवार का दिया नाम अजय सिंह बिष्टï) ही इस काम के लिए सबसे उपयुक्त व्यक्ति हैं।
गोरखनाथ मंदिर में उनके 12 गुना 12 फुट के कमरे में केवल एक बिस्तर और एक मेज है। वह रोजाना व्यक्तिगत रूप से करीब 400 गायों को गुड़ खिलाते हैं और साथ ही स्थानीय लोगों के साथ बैठक करते हैं।
स्थानीय लोगों के बीच बाबा के नाम से लोकप्रिय आदित्यनाथ के प्रशंसकों का कहना है कि वह कुछ भी गलत नहीं कर सकते हैं। अगर वह कुछ गलत करते भी हैं तो इसमें व्यापक हित होता है। उदाहरण के लिए वह अमीर-गरीब का भेद किए बिना लोगों से मिलते हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि वह धर्म के आधार पर भी किसी से भेदभाव नहीं करते हैं। बाबा से मिलने का इंतजार कर रहे लोगों को लस्सी पिलाई जाती है। बाबा से मिलने की एक ही शर्त है कि उनसे झूठ नहीं बोलना। अगर किसी ने झूठ बोला तो उसे कई महीनों तक अपनी जमीन पर फसल उगाने की अनुमति नहीं होगी या उसकी सजा इससे भी कड़ी हो सकती है।
इन बैठकों में शादियों, बच्चों की शिक्षा के लिए आर्थिक मदद दी जाती है और विवादों का निपटारा किया जाता है। इन बैठकों की सबसे अच्छी बात यह है कि यह तब तक खत्म नहीं होती जब तक कि अंतिम व्यक्ति की फरियाद पूरी नहीं हो जाती। एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा कि आधे विवाद तो तभी निपट जाते हैं जब एक पक्ष कहता है कि वह समाधान के लिए बाबा के पास जा रहा है। बाबा के पूरे दिन का कार्यक्रम सुबह की बैठक पर
आधारित होता है। इसके बाद बाबा अस्पताल और मंदिर परिसर के दूसरे हिस्सों का दौरा करते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र में प्रेक्टिस कर रहे डॉक्टर और दूसरे अस्पतालों के डॉक्टर कुछ समय मठ के अस्पताल में गुजारते हैं और मामूली फीस लेकर मरीजों को देखते हैं। वो जमाना गया जब डॉक्टर फिरौती के लिए अपहरण किए जाने के भय में जीते थे। बाबा के मंदिर के साथ संबंध उनकी सुरक्षा की गारंटी है। इसी तरह मठ के भीतर स्थित दवा की दुकानों में छूट मिलती है। कुछ लोग इसे तानाशाही कह सकते हैं लेकिन स्थानीय लोगों का मानना है कि डॉक्टरों की ऊंची फीस और महंगे इलाज को देखते हुए अधिकांश लोगों को मठ की इस व्यवस्था से फायदा होता है। 53 एकड़ में फैले मंदिर में खाने में प्याज और लहसुन का इस्तेमाल नहीं होता है।
इस पृष्ठïभूमि को देखते हुए बतौर मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के शुरुआती फैसलों से कुछ ही लोगों को आश्चर्य हुआ है। उन्होंने सत्ता संभालते ही अवैध बूचडख़ानों को बंद करने, अयोध्या में राम संग्रहालय के लिए 25 एकड़ जमीन देने, उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के परिणाम पर रोक लगाने और एंटी रोमियो स्क्वाड बनाने के आदेश दिए हैं।
ये बहस तो चलती रहेगी कि भाजपा ने आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाकर सही फैसला किया या नहीं और पार्टी ने देश के सबसे बड़े राज्य में कट्टïर रास्ता क्यों अपनाया, लेकिन इसके इतर राज्य की अपनी कई समस्याएं हैं।
राष्टï्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के 2015 के आंकड़ों के मुताबिक हत्या और अपहरण के मामले में उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर है। राज्य में बेरोजगारी की दर 5.8 फीसदी है जबकि राष्टï्रीय औसत 3.7 फीसदी है। साथ ही जीडीपी वृद्घि दर देश में भी उत्तर प्रदेश निचले पायदान पर है। बाबा के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन आंकड़ों को दुरुस्त करने की है। 

Keyword: UP, Chief minister, yogi adityanath,
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