बिजनेस स्टैंडर्ड - दलहन पर बढ़ने लगा दाम का दबाव
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दलहन पर बढ़ने लगा दाम का दबाव

सुशील मिश्र / मुंबई 03 23, 2017

आयात शुल्क की आहट से चढऩे लगी दालों की कीमतें

एक ही दिन में चना हुआ 500 रुपये महंगा

इस साल देश में दलहन की रिकॉर्ड पैदावार के अनुमान से दालों की कीमतें दबाव में रही हैं। सरकार और दलहन संगठनों के आंकड़ों में अंतर के चलते सरकार आयात शुल्क लगा सकती है। बाजार में आ रहीं इस तरह की खबरों ने दलहन की कीमतों को हवा देना शुरू कर दिया है। महज एक दिन में चना करीब 500 रुपये महंगा होकर 6,000 रुपये प्रति क्विंटल के पार पहुंच गया। कारोबारियों की बात मानी जाए तो घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए सरकार जल्द ही कुछ कदम उठा सकती है।

दलहन फसलों के आयात पर आयात शुल्क लगाए जाने की आशंका के बीच देशी चना 6,000 रुपये प्रति क्विंटल के पार पहुंच गया, जबकि काबुली चने का भाव 6,400 रुपये के आस-पास बोला जा रहा है। महज एक दिन पहले घरेलू बाजार में देशी चने का दाम 5,560 रुपये प्रति क्विंटल बोला जा रहा था। चने के साथ तुअर यानी अरहर के दाम भी बढ़कर अमरावती में 8,250 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए। हालांकि खुदरा बाजार में दाल के दाम अभी भी दबाव में बने हुए हैं।

मुंबई थोक बाजार में चने की दाल 7,000 रुपये, अरहर दाल 6,000 रुपये, उड़द 7,750 रुपये, मूंग दाल 6,250 रुपये और मसूर दाल की कीमत 5,400 रुपये प्रति क्विंटल बोली जा रही है। पिछले साल की अपेक्षा चने की दाल 32 फीसदी अधिक है, जबकि अरहर की दाल 45 फीसदी, उड़द की दाल 42 फीसदी, मूंग दाल 30 फीसदी और मसूर दाल 12 फीसदी कम हैं। खुदरा बाजार में अरहर की दाल 82 रुपये, उड़द की दाल 102 रुपये, मूंग दाल 80 रुपये और मसूर की दाल 82 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रही है।

थोक बाजार मेंं चने के दाम बढऩे का असर जल्द ही खुदरा बाजार में भी पड़ेगा। कारोबारियों की मानी जाए तो बाजार में इस समय आवक जोरदार है। नई फसल आ रही है जिससे आवक और बढ़ेगी। ऐसे में इस समय कीमतें नहीं बढ़ती है लेकिन बाजार में इस समय चर्चा है कि सरकार चने के आयात पर 20 फीसदी, जबकि दूसरी दालों के आयात पर 15 फीसदी आयात शुल्क जल्द ही लागू कर सकती है जिसके कारण कीमतें बढ़ेंगी। फिलहाल आवक तेज होने के कारण कीमतों में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी नहीं होगी लेकिन पैदावार के आंकड़े बाजार को भ्रमित करने का काम कर रहे हैं।

इंडियन पल्सेज ऐंड ग्रेन्स एसोसिएशन (आईपीजीए) के मुताबिक इस साल देश में दलहन फसलों की पैदावार तो बढ़ी है लेकि इसके बावजूद आयात की जरुरत पड़ेगी जबकि सरकार के मुताबिक इस साल देश में दलहन की पर्याप्त पैदावार हुई है इसलिए आयात की जरुरत नहीं होगी। हाल ही में केंद्रीय खाद्य, आपूर्ति एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री राम विलास पासवान ने एक बयान में कहा था कि इस वर्ष करीब 221 लाख टन पैदावार होने का अनुमान है और देश में दलहन की खपत 220 लाख टन रहने का अनुमान है।

सरकार करेगी अरहर की खरीद

महाराष्ट्र में तुअर (अरहर) की पैदावार अधिक होने के कारण कई जगह किसान अपनी फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे बेचने के लिए मजबूर हो रहे हैं। राज्य सरकार ने किसानों को भरोसा दिलाते हुए कहा है कि सरकार किसानों का नुकसान नहीं होने देगी और जब तक कीमतें बढ़ेंगी नहीं, तब तक वह अरहर की खरीद करेगी। महाराष्ट्र सहकार मंत्री सुभाष देशमुख के मुताबिक इस साल राज्य में अरहर की पैदावार पिछले साल की अपेक्षा तीन गुना अधिक हुई है। राज्य में इस साल एक करोड़ 17 लाख क्विंटल अरहर की पैदावार हुई है। किसानों को एक हजार 66 करोड़ रुपये देने हैं। किसानों की यह रकम आठ दिन के अंदर उनके बैंक खातों में पहुंच जाएगी। सरकार किसानों के साथ है। अरहर का भाव नहीं बढ़ता है तो सरकार किसानों की फसल खरीदेगी। मौजूदा दाम जब तक नहीं बढ़ेंगे, तब तक सरकार खरीदारी करती रहेगी। बाजार में अरहर की आवक बढऩे की वजह से नेफेड की खरीदारी सीमा बढ़ाकर 25 लाख क्विंटल कर दी गई है। किसानों को उनकी फसल का सही मूल्य मिले और खरीदारी सही तरीके से हो सके इसके लिए राज्य में 316 खरीदारी केंद्र खोले गए हैं। जरूरत पड़ी तो सरकार और केंद्र खोलेगी। नेफेड द्वारा 15 अप्रैल तक खरीदारी की जाएगी। अभी तक राज्य में नेफेड ने 2,07,560 टन तुअर की खरीद की है।

Keyword: Pulses, Import, duty,
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