Search BS HindiWeb         Follow us on 
Business Standard
Friday, May 26, 2017 11:08 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|
 
होम विशेष खबर

मध्याह्नï भोजन में आधार की अनिवार्यता बनेगी नई समस्या

बाअदब
सोमशेखर सुंदरेशन /  March 22, 2017

एक नया तूफान उमड़ रहा है। नोटबंदी के बाद बच्चों के मध्याह्नï भोजन के लिए आधार पहचान का प्रवर्तन करना एक नई समस्या को जन्म दे सकता है। इसकी बदौलत नीतियों के अकादमिक क्रियान्वयन और उसके चलते जमीनी स्तर पर अवांछित प्रभाव का द्वंद्व उत्पन्न हो सकता है। यह सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का उल्लंघन है जिसमें उसने कहा था कि आधार को किसी भी सरकारी कल्याण योजना के लिए अनिवार्य नहीं बनाया जा सकता है।
मध्याह्नï भोजन उन योजनाओं में सबसे अधिक भावनाप्रधान है जिनके लिए आधार को अनिवार्य किया गया है। इस समाचार पत्र में प्रकाशित खबर के मुताबिक 11 योजनाओं के लिए ऐसी 14 अधिसूचनाएं जारी की जा चुकी हैं। इनमें प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा तक पहुंच सुनिश्चित करने वाली योजनाएं भी शामिल हैं। रोचक बात यह है कि यह खबर मुख्यधारा के किसी अखबार में नहीं बल्कि ऑनलाइन साइट स्क्रॉल डॉट इन पर सर्वप्रथम आई।
प्रभावी तौर पर 1 जुलाई, 2017 से ऐसे छात्रों को विद्यालय में नि:शुल्क मध्याह्नï भोजन नहीं मिलेगा जिनका नामांकन आधार में नहीं है। इस संबंध में जारी अधिसूचना में कहा गया है कि जो भी विद्यालयों में मध्याह्नï भोजन योजना का लाभ लेना चाहता है उसे आधार संख्या प्रस्तुत करनी होगी या फिर आधार पंजीयन कराना होगा। अधिसूचना में यह भी कहा गया कि ऐसी योजना का लाभ लेने के इच्छुक लोगों के पास अगर आधार संख्या नहीं है या उन्होंने आधार में नामांकन नहीं कराया है तो उन्हें 30 जून 2017 तक यह पंजीयन कराना होगा।
यह बहुत विनाशकारी तरीका है। निश्चित तौर पर इसके पक्ष में भी दलील होंगी। एक आम दलील सरकारी कल्याण योजनाओं में लीकेज की है। गौरतलब है कि गरीबों को दी जाने वाली सब्सिडी अक्सर बड़ी खबर बनती है, बनिस्बत कि विभिन्न स्थानों पर दी जा रही भारी कर रियायत या सब्सिडी के, जिसका जमकर दुरुपयोग किया जाता है। खबरों के मुताबिक कम से कम 10.03 करोड़ विद्यार्थी देश के 11.5 लाख विद्यालयों में कक्षा एक से आठ के बीच पढ़ रहे हैं और उनको मध्याह्नï भोजन योजना से लाभ मिलता है। इस योजना से करीब 25.3 लाख लोगों को अस्थायी रोजगार भी मिला हुआ है। मध्याह्नï भोजन स्कूली बच्चों को खाद्य सुरक्षा कानून के अधीन मुहैया कराया जाता है। इसके लिए केंद्र की ओर से राज्यों को फंड दिया जाता है जो वहां से स्कूल चलाने वाले स्थानीय निकायों को मिलता है। इस लागत को अधिकांश राज्यों में 60: 40 के हिसाब से वहन किया जाता है। जबकि पूर्वोत्तर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू कश्मीर में यह अनुपात 90:10 है। पिछले बजट में केंद्र सरकार ने इसके लिए केवल 10,000 करोड़ रुपये की व्यवस्था की। यह राशि पिछले बजट से महज 300 करोड़ रुपये अधिक थी। मध्याह्नï भोजन की योजना स्कूली बच्चों को पोषण उपलब्ध कराने की है क्योंकि शुरुआती वर्षों में बच्चे पोषण ठीक न होने के कारण शिक्षा को उचित ढंग से ग्रहण नहीं कर पाते।
इस योजना में लीकेज को लेकर कोई ठोस प्रमाण मौजूद नहीं हैं। हर सरकारी या निजी योजना में यह देखा जा सकता है कि कहीं उसके लाभ गलत तरीके से तो नहीं लिए जा रहे। अगर किसी तरह की वास्तविक या संभावित लीकेज को लेकर ऐसी पहल होने लगी तो हमें जल्दी ही नोटबंदी जैसी एक और समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
गड़बड़ी करने वाले कोई न कोई राह निकाल ही लेंगे और कई वास्तविक और गंभीर लाभार्थियों को कठिनाइयां झेलनी पड़ेंगी। यह कुछ वैसा ही होगा जैसे घर में घुस आए चुनिंदा कीड़े-मकोड़ों को मारने के लिए घर को ही आग लगा दी जाए। यह कुछ-कुछ वैसा ही है जैसा कि अमेरिकी राष्टï्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने सात इस्लामिक देशों से अमेरिका में प्रवेश को प्रतिबंधित करने की बात कही। इसका असर उन अमेरिकी नागरिकों तथा निवासियों पर भी पड़ सकता था जो उस वक्त संयोगवश देश से बाहर होते।
इससे भी बुरी बात यह है कि सर्वोच्च न्यायालय ने अदालत द्वारा अनुमति प्राप्त कुछ योजनाओं के अलावा तमाम योजनाओं के लिए आधार को अनिवार्य करने पर साफ रोक लगा रखी है। संक्षेप में कहें तो इस मामले में पहले ही अदालत का आदेश मौजूद है जिसके मुताबिक आधार का ऐसा उपयोग नहीं किया जा सकता है। इसके बावजूद सरकार इस तरह की बेशर्मी दिखा रही है। जाहिर है अब सारा दारोमदार एक बार फिर सर्वोच्च न्यायालय पर होगा। अंतिम जानकारी के मुताबिक आधार के ऐसे इस्तेमाल को चुनौती देने के लिए जो अधिवक्ता पेश हो रहे हैं वे आधार के क्रियान्वयन से जुड़ी गोपनीयता की चिंताओं की जल्द सुनवाई कराने के पक्ष में हैं। लेकिन अदालत इस मामले की सुनवाई के लिए अलग पीठ का गठन करने को लेकर संघर्ष कर रही है क्योंकि उसके पास क्षमता का अभाव है। हालांकि आधार की नई अनिवार्य जरूरतों की बात करें तो इनकी बदौलत प्रक्रिया की अवमानना तक हो सकती है।
निश्चित रूप से मध्याह्नï भोजन योजनाओं के क्रियान्वयन में दिक्कतें पैदा हो सकती हैं। उदाहरण के लिए जैसा कि कुछ विशेषज्ञों ने कहा भी है कि योजना में भ्रष्टïाचार शायद उस तरह से स्थापित भी नहीं किया जा सके। हकीकत में लीकेज इन मायनों में हो सकती है कि शायद निम्रस्तरीय खाना बच्चों को दिया जाए या फिर कंपनियों को लाभ मिल सकता है जो प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ के पैकेट तैयार करके उन्हें मध्याह्नï भोजन के स्थानापन्न के रूप में मंजूरी दिलाने का प्रयास कर सकती हैं। ऐसी खबरें भी आ रही हैं कि सरकार मध्याह्नï भोजन के स्थानापन्न के रूप में बिस्किटों को मंजूरी देने वाली है। जाहिर है आधार पर जोर देने से ऐसी लीकेज और भ्रष्टïाचार को खत्म नहीं किया जा सकता है। ऐसे में बच्चों के पास आधार नामांकन न होने पर उन्हें भूखा रखने से बेहतर है कि असल समस्या को हल करने की कोशिश की जाए। अगर बिना सोचे समझे सरकार इस पर आगे बढ़ती है तो कहीं नोटबंदी जैसे हालात न बन जाएं। जहां अचानक देश की 86 फीसदी प्रचलित मुद्रा बंद कर दी गई थी।

Keyword: Mid day meal, adhar, Schools,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   New to investing in shares?
  Get a Forex Card at 0 Currency Conversion Charges.
  Rs 2 lakh health coverage @ Rs 8* per day
  New to the Stock Market? Take your FirstStep
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
Advertisements 
Cover from Natural Calamities. Buy Home Insurance
Open a demat account with Sharekhan & learn online trading.
Super Saver Health Insurance For Your Family
  आपका मत
 मुनाफाखोरी-रोधी निकाय से ग्रहकों के हितों की होगी रक्षा?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.