Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, September 26, 2017 03:57 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|
 
होम विशेष खबर

नए सेबी चेयरमैन के सामने अहम चुनौती

देवाशिष बसु /  March 22, 2017

यह देखना रोचक होगा कि भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के नए चेयरमैन चवन्नी शेयरों की हेराफेरी की समस्या से कैसे निपटते हैं? इस संबंध में विस्तार से जानकारी दे रहे हैं देवाशिष बसु
मौजूदा सरकार ने पिछले दिनों ऐसे कई कदम उठाए हैं जो दिखाते हैं कि वह यह सुनिश्चित करना चाहती है कि सूचीबद्घ शेल कंपनियां (ऐसी कंपनियां जो बिना किसी परिसंपत्ति के कारोबारी लेनदेन करती हैं) काले धन को सफेद करने का काम न करें। वर्ष 2017 के केंद्रीय बजट से शुरुआत करें तो उसमें एक प्रावधान शामिल किया गया जिसके तहत लंबी अवधि का पूंजीगत लाभ (एलटीसीजी) उन लोगों के लिए करमुक्त नहीं रहेगा जिन्होंने अक्टूबर 2004 में या उसके बाद शेयर खरीदे लेकिन प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) नहीं चुकाया। इसके पश्चात प्रधानमंत्री कार्यालय ने 10 फरवरी को एक कार्यबल का गठन किया ताकि 900,000 शेल कंपनियों का दुरुपयोग रोका जा सके। इन कंपनियों का इस्तेमाल धनशोधन और करवंचना के लिए किया गया। प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि बेनामी लेनदेन रोधी संशोधन अधिनियम 2016 के तहत ऐसा करने वाली शेल कंपनियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
ये कदम काफी गंभीर हैं लेकिन क्या इनकी मदद से पेनी स्टॉक (ऐसे शेयर जिनका बाजार पूंजीकरण कम होता है और जो छोटे एक्सचेंज पर कारोबार करते हैं) की हेराफेरी रोकी जा सकती है? इस सिलसिले में सरकार का इरादा जहां सही कदम उठाने का है वहीं मुंबई स्थित बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड यानी सेबी भी इस दिशा में पेशकदमी कर सकता है।
सेबी ने गत 29 दिसंबर 2016 को एक सूचना ज्ञापन तैयार किया जिसका संबंध एलटीसीजी से था। इसमें एलटीसीजी घोटालों से संबंधित चार तरह के संस्थानों को चिह्निïत किया गया: एक, सूचीबद्घ कंपनियों के प्रवर्तक और निदेशक, दूसरा लाभार्थी (नकदी को एलटीसीजी में बदलना), प्राथमिकता वाले आवंटी, तीसरा अंतिम कारोबार मूल्य (एलटीपी) के सहायक और मूल्य में हेरफेर और चौथा निर्गम प्रदाता जो लाभार्थियों को स्टॉक एक्सचेंज से बाहर निकलने में मदद करते हैं। हालांकि मैं निश्चित तौर से यह नहीं कह सकता हूं कि सेबी ने नकदी को चेक में बदलने वाली शेल कंपनियों को इसमें शामिल किया है या नहीं? ये कंपनियां परिचालन का अहम पहलू हैं और प्रधानमंत्री द्वारा गठित कार्य बल का संबंध इससे भी है। बहरहाल, सेबी ने यह रुख अपनाया कि वह केवल पहले और तीसरे तरह के संस्थानों पर ही कार्रवाई कर सकता है।
यह बात याद की जा सकती है कि आयकर विभाग के कोलकाता स्थित जांच महानिदेशालय ने एलटीसीजी घोटाले को लेकर एक व्यापक जांच की शुरुआत की थी। उसमें विभिन्न संस्थानों की लिखित स्वीकारोक्तियां थीं और उसकी रिपोर्ट सेबी को सौंपी गई थी। सेबी के सूचना ज्ञापन के मुताबिक परिचालकों का कोई दस्तावेजी या स्वतंत्र सबूत नहीं है और डीआईटी द्वारा मुहैया कराए गए दस्तावेजों की मदद से एलटीपी के सहयोगियों, लाभार्थियों और निर्गम मुहैया कराने वालों के बीच रिश्ता कायम कर पाना आसान नहीं।
इतना ही नहीं ऑपरेटरों/स्टॉक ब्रोकरों/ऑपरेटरों की प्रमुख संस्थाओं की बात करें तो संभव है वे कानूनी जांच परख में नहीं टिक पाएं। प्रभावी तौर पर देखें तो सेबी ने यह स्पष्टï कर दिया है कि आयकर विभाग की जांच रिपोर्ट उसकी जांच के लिए बेकार है। चाहे जो भी हो लेकिन सेबी मुख्यतौर पर प्रतिभूति कानूनों के उल्लंघन को लेकर चिंतित है। ये मामले मोटे तौर पर करवंचना के परिणामस्वरूप सामने आए हैं। लेकिन कीमतों में हेराफेरी सामने आने पर सेबी कदम उठाएगा। प्रश्न यह है कि क्या ऐसा संभव है? सेबी की आईएम सूची में इसका ब्योरा दिया गया है कि उसने कौन से कदम उठाए हैं? उसने वर्ष 2014-16 के दौरान केवल 1,834 सेवा प्रदाताओं से जुड़े 12 मामलों में अंतरिम आदेश जारी किए। इनके कुल कारोबार की वास्तविक कीमत 3,877 करोड़ रुपये थी। ज्यादातर मामलों में सेबी कुछ नहीं कर सकता। उक्त 12 मामलों जैसे ही 43 मामलों में सेबी कुछ नहीं कर सका।
रोचक बात यह है कि सेबी का सूचना ज्ञापन 21 नवंबर को आयोजित एक बैठक पर आधारित था। इस बैठक में एलटीसीजी घोटाले में सेबी के कदमों के मानकीकरण को लेकर चर्चा की गई। इस बैठक में दो पूर्णकालिक सदस्य और शीर्ष व मझोले स्तर के अधिकारी शामिल हुए। ये अधिकारी विधिक, निगरानी और जांच विभाग से ताल्लुक रखते थे। इसके पश्चात 25 नवंबर को एक नोट तैयार किया गया। तत्कालीन चेयरमैन यूके सिन्हा ने इस पर 30 नवंबर को हस्ताक्षर किए। नोट में यह दर्ज किया गया कि 145 मामलों की जांच की जा रही है। इनमें से 55 मामलों की जांच पूरी हो चुकी है। बहरहाल सेबी ने केवल 12 मामलों में ही कार्रवाई की। क्या सेबी को इस प्रकार चुनिंदा कार्रवाई करनी चाहिए? शेष 43 मामलों का क्या?
निश्चित तौर पर यह दांव सेबी पर उलटा पड़ गया। मार्च के शुरुआती दिनों में जब मूल्य से छेड़छाड़ के 12 मामलों में से एक मामले और एलटीसीजी के अतिक्रमण के मामले की सुनवाई प्रतिभूति अपीलीय पंचाट के समक्ष शुरू हुई तो तब पीडि़त पक्ष ने सेबी को दबाव में ला दिया। उसकी दलील थी कि वह मनमर्जी से कदम उठा रही है। सेबी ने अपने हलफनामे में इस आरोप को पूरी तरह खारिज कर दिया।
यह बात याद रखिए कि आईएम उस नोट पर आधारित था जिस पर चेयरमैन ने खुद 30 नवंबर को हस्ताक्षर किए थे। सवाल यह है कि उनसे ऊपर वह कौन सक्षम प्राधिकारी है जो आईएम के इरादे और उसके लक्ष्य के बारे में जरूरी जानकारी दे सकता है?
संक्षेप में कहा जाए तो एक ओर जहां केंद्र सरकार एलटीसीजी घोटाले को समाप्त करने के लिए तमाम प्रयास कर रही है, वहीं सेबी अब तक इस बात को लेकर ही स्पष्टï नहीं है कि मूल्य निर्धारण में होने वाली हेरफेर को लेकर क्या कर रहा है। इससे यह संदेह उत्पन्न होता है कि करमुक्त एलटीसीजी की गलत बुकिंग की गई होगी। सेबी की इस अस्पष्टïता के पीछे वजह है। दरअसल वह समस्या के आधिक्य से जूझ रही है। ऐसे में यह देखना रोचक होगा कि नए चेयरमैन उससे कैसे निपटते हैं।

Keyword: Sebi, penny share, Regulator,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
Advertisements 
Cover from Natural Calamities. Buy Home Insurance
Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
  आपका मत
 क्या अर्थशास्त्रियों की नई टीम विकास को दे पाएंगे रफ्तार?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.