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जुलाई से हकीकत बनेगा जीएसटी

दिलाशा सेठ / नई दिल्ली 03 20, 2017

तेजी में सरकार

कैबिनेट ने जीएसटी विधेयकों को मंजूरी दी
इस सप्ताह संसद में धन विधेयक के रूप में पेश किया जा सकता है इन्हें

आगामी 1 जुलाई से लागू करने की राह आसान करते हुए कैबिनेट ने आज 4 वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विधेयकों को मंजूरी दे दी। सरकार की तेजी का पता इससे चलता है कि जीएसटी परिषद से इन विधेयकों को मंजूरी मिलने के महज 2 कार्यदिवस के बाद कैबिनेट ने इसे मंजूरी दे दी। अब इस सप्ताह केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी), केंद्र शासित क्षेत्र जीएसटी (यूटीजीएसटी), एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) और मुआवजा विधेयक संसद में पेश किया जा सकेगा।

ज्यादा उम्मीद है कि इन विधेयकों को धन विधेयक के रूप में पेश किया जाएगा, जिन्हें राज्यसभा से मंजूरी की जरूरत नहीं होगी। सत्तासीन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार का राज्य सभा में बहुमत नहीं है। एक सरकारी अधिकारी ने कहा, 'जीएसटी विधेयकों को इस सप्ताह संसद में पेश किया जाएगा। ज्यादा संभावना है कि इन्हें धन विधेयक के रूप में पेश किया जाए।' धन विधेयक के रूप में इसे पेश किए जाने से इसे आसानी से और तेजी से पारित कराया जा सकेगा।

एक आधिकारिक बयान में कहा गया है, 'उम्मीद है कि जीएसटी लागू होने से देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 1-2 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी। इसकी वजह से ज्यादा रोजगार का सृजन होगा और उत्पादकता में बढ़ोतरी होगी।' जीएसटी में केंद्र व राज्यों के तमाम परोक्ष शुल्क जैसे सेवा कर, उत्पाद शुल्क, चुंगी, मूल्य वर्धित कर के अलावा अन्य कई कर समाहित हो जाएंगे और इससे रिफंड के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट शृंखला बनेगी।

सरकार ने अपने बयान में कहा है कि केंद्र व राज्य सरकारों के तमाम करों को मिलाकर एक कर लगाए जाने से कैस्केडिंग या दोहरे कराधान से बचा जा सकेगा और इससे एक राष्ट्रीय बाजार तैयार होगा। राज्यों को अपने संबंधित विधानसभाओं में राज्य जीएसटी विधेयकों को पारित कराना होगा। बहरहाल जम्मू कश्मीर सरकार को सभी विधेयक सीजीएसटी, आईजीएसटी और एसजीएसटी पारित कराना होगा, क्योंकि संविधान के तहत उसे कराधान को लेकर विशेष अधिकार मिले हुए हैं।

जीएसटी परिषद पहले ही जीएसटी व्यवस्था में चार दरें 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत तय कर चुकी है।  लक्जरी कारों, बोतल बंद पेयों और तंबाकू उत्पाद जैसी अहितकर वस्तुओं पर इसके ऊपर अतिरिक्त उपकर भी लगाया जाएगा। किस वस्तु अथवा सेवा पर किस दर से जीएसटी लगेगा यह काम अगले महीने से शुरू हो जाएगा। वक्तव्य में कहा गया है, 'सरकार देश में जीएसटी व्यवस्था जल्द से जल्द लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। जीएसटी परिषद ने एक जुलाई से जीएसटी लागू करने का फैसला किया है।'

जीएसटी परिषद ने इस महीने हुई अपनी पिछली दो बैठकों में पूरक विधेयकों पर अपनी सहमति जताई थी। केंद्रीय जीएसटी से केंद्र सरकार को राज्यों के भीतर वस्तुओं एवं सेवाओं की आपूर्ति पर जीएसटी लगाने और वसूलने अथवा दोनों का अधिकार मिलेगा, वहीं एकीकृत जीएसटी में अंतर-राज्यीय स्तर पर वस्तुओं एवं सेवाओं पर कर लगाने और वसूली करने अथवा दोनों का अधिकार केंद्र को मिलने का प्रावधान होगा।

इसी प्रकार केंद्र शासित प्रदेश जीएसटी विधेयक, जहां विधानसभाएं नहीं हैं, में वस्तुओं एवं सेवाओं की आपूर्ति पर कर लगाने का अधिकार केंद्र को दिया जाएगा।  मुआवजा विधेयक के तहत राज्यों को संभावित राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए होगा। इस विधेयक में प्रावधान किया जाएगा कि जीएसटी लागू होने के पहले पांच साल के दौरान राज्यों को यदि राजस्व का नुकसान होता है तो केंद्र उसकी भरपाई करेगा।

Keyword: GST, Tax, indirect tax,
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mayur
23-Mar-17
 
सरकार के सामने नयी आर्थिक चुनोती
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