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एफपीआई के लिए एक ही जगह मंजूरी देने पर विचार

श्रीमी चौधरी / मुंबई March 20, 2017

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) विदेशी निवेशकों के प्रवेश मानकों को आसान बनाने की योजना पर काम कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार नियामक एकल खिड़की मंजूरी व्यवस्था की अनुमति दे सकता है जिसमें विदेशी निवेशकों को विभिन्न नियामकीय संस्थाओं से अलग अलग मंजूरियां लेने की जरूरत नहीं होगी। इस तरह का संशोधन वर्ष 2018 में किए जाने की उम्मीद है।
यह कदम शेयरधारकों से प्राप्त प्रतिक्रियाओं पर आधारित है और इसका मकसद खाता खोलते वक्त विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) पंजीकरण की प्रक्रिया को आसान बनाना है।
मौजूदा समय में, किसी वैश्विक निवेशक को कई एजेंसियों से मंजूरियां लेने की जरूरत होती है जिनमें सेबी, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और आयकर विभाग मुख्य रूप से शामिल हैं। इन मंजूरियों में आवेदन भरने के दिन से लेकर कम से कम 45-50 दिन लगते हैं। पैन कार्ड का निर्गमन और सत्यापन कर विभाग के अधीन आता है जिसमें क्लियरेंस के लिए 15 दिन से अधिक का समय लगता है। हालांकि एफपीआई को खाता खोलने के 60 दिन के अंदर या भारत से बाहर रकम भेजने से पहले पैन की प्रति मुहैया कराने की जरूरत होती है।  इस घटनाक्रम से अवगत एक नियामकीय अधिकारी ने कहा, 'नियामक विदेशी निवेशकों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया आसान बनाए जाने के लिए विभिन्न पहलुओं पर काम कर रहा है। हमने इस बारे में विधि एवं कर विशेषज्ञों से विचार आमंत्रित किए हैं कि इस प्रक्रिया को बोझिल बनने से किस तरह से रोका जा सकता है।'
उन्होंने कहा कि पंजीकरण प्रक्रिया सुगम बनाने के लिए आरबीआई, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) जैसी अन्य एजेंसियों की भी मदद ली गई है। सेबी ने कहा है कि एफपीआई के लिए नए पंजीकरण फॉर्म तैयार करने के लिए पीडब्ल्यूसी, डेलॉयट जैसी बड़ी कर परामर्शदाता कंपनियों से भी सलाह ली गई है। पीडब्ल्यूसी में पार्टनर सुरेश स्वामी ने कहा, 'कई एजेंसियों से मंजूरी प्राप्त करना बोझिल प्रक्रिया है। नई पहल से परिचालन दक्षता में इजाफा होगा और उन विदेशी संस्थाओं के नजरिये में भी बदलाव आएगा जो निवेश के लिए भारत की तुलना में अन्य जगहों का चयन कर रही हैं।' कानूनी विश्लेषकों का कहना है कि बाजार नियामक ऐसे समय में इन बदलावों पर विचार कर रहा है जब सरकार कर व्यवस्था और विभिन्न तरह की वैश्विक पूंजी के लिए खुलासे की प्रक्रिया को सख्त बना रही है।

Keyword: FPI, investment, Sebi,
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