बिजनेस स्टैंडर्ड - दूरसंचार कंपनियों की सुस्त राजस्व वृद्धि
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दूरसंचार कंपनियों की सुस्त राजस्व वृद्धि

कृष्णकांत / मुंबई March 20, 2017

भारत का सबसे नया उद्योग अब वित्तीय तौर पर सबसे अधिक अस्थिर दिखने लगा है। बाजार में तगड़ी प्रतिस्पर्धा, कीमत संबंधी जंग और रेडियो तरंगों के लिए बोली लगाने की होड़ के कारण दूरसंचार ऑपरेटरों की वित्तीय स्थिति में तेजी से गिरावट दर्ज की गई है। इसलिए अधिकतर ब्रोकरेज फर्मों ने वर्तमान पूंजीगत खर्च एवं परिचालन लागत में तेजी और स्थिर राजस्व के वर्तमान माहौल को देखते हुए दूरसंचार उद्योग की वित्तीय स्थिति को लेकर चिंता जताई है।
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के संजीव प्रसाद ने हाल में अपनी एक रिपोर्ट में कहा है, 'वायरलेस उद्योग का वर्तमान आकार अधिकतर खिलाडिय़ों के लिए अपने निवेश पर उचित रिटर्न हासिल करने के लिए पर्याप्त नहीं दिख रहा है। यहां तक कि आइडिया जैसे स्थापित खिलाड़ी भी बाजार के आकार संबंधी हमारे वर्तमान अनुमानों के आधार पर वित्त वर्ष 2018-19 में घाटा दर्ज कर सकता है।' रिपोर्ट में कहा गया है, 'भारतीय वायरलेस उद्योग का राजस्व भारतीय जैसी कंपनियों के लिए भी कहीं अधिक होना चाहिए और आइडिया को अपने निवेश में उल्लेखनीय रिटर्न हासिल करना चाहिए।'
दूरसंचार उद्योग की वित्तीय स्थिति पर विभिन्न ऑपरेटरों की कमजोर लाभप्रदता का काफी प्रभाव पड़ता है। पांच मेंं से चार सूचीबद्ध ऑपरेटरों (भारती एयरटेल को छोड़कर) ने अप्रैल से दिसंबर 2016 की अवधि में शुद्ध घाटा दर्ज किया है। जहां तक गैर-सूचीबद्ध ऑपरेटरों का सवाल है तो सभी पांच गैर-सूचीबद्ध ऑपरेटरों- वोडाफोन इंडिया, एयरसेल, टाटा टेलीसर्विसेज, भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) और श्याम सिस्तेमा- ने वित्त वर्ष 2016 में घाटा दर्ज किए हैं।
कुल मिलाकर चार ऑपरेटरों- एमटीएनएल, टाटा टेलीसर्विसेज, एयरसेल और सूचीबद्ध टाटा टेलीसर्विसेज महाराष्टï्र- का घाटा काफी अधिक रहा जिससे उनकी शुद्ध हैसियत भी नकारात्मक हो गई। इसका मतलब यह हुआ कि उनकी देनदारी कुल परिसंपत्तियों के मुकाबले अधिक हो चुकी है।
शेयरधारकों को मिलने वाले रिटर्न में उल्लेखनीय गिरावट आई है। इन सूचीबद्ध ऑपरेटरों का एकीकृत आरओई (रिटर्न ऑन इक्विटी) वित्त वर्ष 2016 में 5.6 फीसदी रह गया और वित्त वर्ष 2017 के पहले नौ महीने के दौरान उसे नकारात्मक होने की आशंका जताई गई है। वित्त वर्ष 2014 में इन कंपनियों ने 11.7 फीसदी आरओई दर्ज किया था।
भारती एयरटेल, रिलायंस कम्युनिकेशंस और आइडिया सेल्युलर सहित पांच सूचीबद्ध दूरसंचार ऑपरेटरों का एकीकृत डेट टु इक्विटी अनुपात वित्त वर्ष 2016 के अंत तक बढ़कर 2.2 गुना की रिकॉर्ड ऊंचाई तक पहुंच गया। जबकि वित्त वर्ष 2010 में यह आंकड़ा 0.5 गुना और वित्त वर्ष 2015 में 1.7 गुना रहा था। पिछले वित्त वर्ष के अंत में शुद्ध डेट-इक्विटी अनुपात 2 गुना रहा था।
सूचीबद्ध दूरसंचार कंपनियों का ऋण ऐतिहासिक तौर पर पहली बार उनके बाजार पूंजीकरण को पार कर गया जिससे यह उद्योग तकनीकी आधार पर दिवालिया हो चुका है। विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे में पूंजी बाजार से रकम जुटाना दूरसंचार ऑपरेटरों (भारत एयरटेल को छोड़कर) के लिए आसान नहीं रह गया है। जबकि अच्छे समय में आइडिया सेल्युलर और रिलायंस कम्युनिकेशंस जैसे ऑपरेटर पात्र संस्थागत निवेश (क्यूआईपी) के जरिये पूंजी बाजार से रकम जुटाने में सफल रहे थे।
विश्लेषकों का कहना है कि रिलायंस जियो के बाजार में उतरने और ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित करने एवं बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए मुफ्त पेशकश संबंधी उसकी रणनीति से दूरसंचार उद्योग की वर्तमान वित्तीय समस्याएं अभी खत्म नहीं होंगी। एंबिट कैपिटल के विवेकानंद सुब्रमणयन ने इस उद्योग पर जारी अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा है, 'रिलायंस जियो के आने के बाद उद्योग के गैर-स्पेक्ट्रम पूंजीगत खर्च के साथ-साथ उसकी क्षमता (स्पेक्ट्रम) लागत में तेजी आएगी। परिणामस्वरूप न केवल निकट भविष्य की लाभप्रदता चुनौतीपूर्ण होगी बल्कि लंबी अवधि की आरओसीई (पूंजी निवेश पर रिटर्न) भी औसत बरकरार रहेगा।'

Keyword: telecom, Revenue, mobile,
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