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यूपी में चमड़ा कारोबार को झटका तगड़ा

बीएस संवाददाता / लखनऊ/कानपुर 03 20, 2017

संकल्प पत्र के वादों पर काम शुरू

नई सरकार के आते ही यूपी में दो बूचड़खाने बंद, बाकी पर लटकी बंदी की तलवार

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के 24 घंटे के अंदर सरकार ने भारतीय जनता पार्टी के संकल्प पत्र के वादों को पूरा करने का सिलसिला शुरू कर दिया है। नई सरकार ने आज अपने पहले ही आदेश में इलाहाबाद में दो बूचडख़ाने बंद करने का फैसला सुना दिया। भाजपा ने चुनाव प्रचार के दौरान वादा किया था कि बहुमत की सरकार बनते ही प्रदेश के सभी बूचडख़ाने बंद कर दिए जाएंगे।

बूचडख़ानों पर योगी सरकार की तेजी को देखते हुए अब बाकी पर भी बंदी का खतरा मंडराने लगा है। प्रदेश में कुल 38 बूचडख़ाने हैं, जिनमें से 32 के पास बीफ निर्यात का लाइसेंस भी है। इस समय सरकार के पास 106 बूचडख़ाने खोलने का आवेदन लंबित है। राज्य में सबसे ज्यादा बूचडख़ाने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हैं। अलीगढ़ में छह तथा गाजियाबाद और मेरठ में पांच-पांच हैं। इनके अलावा उन्नाव में पांच और बाराबंकी में एक बूचडख़ाना है। बूचडख़ाने बंद होने की आशंका से प्रदेश के चमड़ा कारोबारी खासे चिंतित हैं। उनका कहना है कि बूचडख़ाने बंद होने से कच्चे चमड़े की किल्लत होगी और इसका सबसे ज्यादा असर चमड़ा उत्पाद बनाने वाले छोटे कारोबारियों पर पड़ेगा। कानपुर शहर चमड़ा और उससे बने उत्पादों के लिए दुनिया भर में मशहूर है। यहां चमड़ा बनाने की इकाइयों में बाहर से कच्चा माल तो आता ही है लेकिन कई छोटी इकाइयां इलाके के बूचडख़ानों से निकलने वाली पशुओं की खाल से ही चमड़ा तैयार करती हैं।

कानुपर और आसपास के इलाकों में छोटे-बड़े दर्जन बूचडख़ाने हैं, जिनमें से आधा दर्जन आधुनिक मशीनों से संचालित होते हैं। इन बूचडख़ानों से निकलने वाली पशुओं की खाल कानपुर, कोलकाता, मुंबई और आगरा के साथ ही चीन, ब्राजील जैसे देशों को निर्यात की जाती है। इसी खाल से कच्चा चमड़ा तैयार होता है। ऐसे में बूचडख़ानों के बंद होने से कच्चे चमड़े की उपलब्धता में भारी कमी आ सकती है।

कानुपर के एक बड़े चमड़ा कारोबारी के मुताबिक कच्चे चमड़े की उपलब्धता पहले से ही कम है। मौजूदा समय में विदश से कच्चा चमड़ा आयात किया भी जा रहा है। हालांकि यह आयात अभी बड़े कारोबारी ही कर रहे हैं। छोटे कारोबारी बूचडख़ानों से मिलने वाली खाल पर ही निर्भर हैं, जिसका उपयोग वे चमड़ा उत्पाद बनाने में करते हैं। ऐसे कारोबारियों की संख्या काफी ज्यादा है। यदि बूचडख़ाने बंद हो गए तो इस वर्ग को सबसे ज्यादा परेशानी होगी और रोजगार पर भी असर पड़ेगा। इस कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि बूचडख़ाने बंद होने से हजारों लोगों के रोजगार पर संकट खड़ा हो जाएगा।

चमड़ा कारोबारियों के मुताबिक सरकार ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि आधुनिक बूचडख़ाने भी बंद होंगे या नहीं। हालांकि इस कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि बंदी की नौबत आई तो वे पंजाब और कश्मीर का रुख कर सकते हैं। प्रदेश सरकार के अधिकारियों के मुताबिक नई सरकार के रुख को देखते हुए सभी बूचडख़ानों के कागजों की पड़ताल की जा रही है और उनको बंद करने के तरीकों पर विचार किया जा रहा है।

Keyword: UP, leather industry, BJP,
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