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200 खाते बनेंगे एनपीए!, कर्ज पुनर्गठन की मंजूरी के विभिन्न चरणों में अटके

देव चटर्जी / मुंबई 03 20, 2017

सुस्ती दिखा रहे हैं बैंक

काफी संख्या में कॉरपोरेट कर्ज पुनर्गठन के प्रस्ताव को मार्च की तय समयसीमा तक मंजूरी मिलने की उम्मीद नहीं है और ये गैर-निष्पादित आस्तियां (एनपीए) बन सकते हैं। बैंकरों और मुख्य कार्याधिकारियों का कहना है कि बैंक इन फाइलों को तब तक मंजूरी देने से परहेज कर रहे हैं जब तक कि भविष्य में अभियोजन से बचाव नहीं मिल जाता। करीब 200 से ज्यादा खाते कर्ज पुनर्गठन की मंजूरी के विभिन्न चरणों में अटके हैं और बैंकों द्वारा इस पर सुस्ती दिखाई जा रही है। इससे अप्रैल से शुरू हो रहे अगले वित्त वर्ष में कंपनियों के निवेश निर्णय पर असर पड़ सकता है।

एक बड़े समूह के वित्त प्रमुख जो अपने कर्ज पुनर्गठन को इस साल मार्च तक पूरा करना चाह रहे हैं, ने कहा, 'कर्ज पुनर्गठन की मंजूरी को लेकर 23 जनवरी से बैंकरों के रुख में बदलाव आया है और बैंक के प्रबंधन और बोर्ड से हरी झंडी मिलने के बाद भी वे अतिरिक्त स्तर पर मंजूरी चाहते हैं। इससे कर्ज पुनर्गठन पैकेज में एक तरह से ठहराव आ गया है और कर्ज मंजूरी में सुस्ती आई है।'

23 जनवरी को केंद्रीय जांच ब्यूरो ने आईडीबीआई बैंक के चेयरमैन योगेश अग्रवाल और तीन अन्य बैंकरों को किंगफिशर एयरलाइंस को 2009 में 900 करोड़ रुपये के कर्ज की मंजूरी के मामले में गिरफ्तार किया था। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकर इस घटना के बाद से डरे हुए हैं और उन्होंने लंबित फाइलों, खासकर बड़े कॉरपोरेट के लोन खातों पर कोई निर्णय लेना एक तरह से बंद कर दिया है। कॉरपोरेट फाइनैंस प्रमुखों का कहना है कि वे अगले वित्त वर्ष में कर्ज पुनर्गठन पैकेज के लिए आवेदन करेंगे क्योंकि सरकार द्वारा कर्ज पुनर्गठन पैकेज की निगरानी के लिए ज्यादा निगरानी समितियों का गठन करने की उम्मीद है।

फिलहाल भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा केवल एक निगरानी समिति का गठन किया गया है। आज की तारीख तक इस समिति ने केवल हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी (एचसीसी) के कर्ज पुनर्गठन को मंजूरी दी है जबकि जीएमआर इन्फ्रास्ट्रक्चर का प्रस्ताव अभी लंबित है। अधिकतर कर्ज पुनर्गठन प्रस्ताव बिजली, स्टील, खनन, बुनियादी ढांचा और दूरसंचार क्षेत्रों के हैं। इन क्षेत्रों का कर्ज इसलिए भी बढ़ा है क्योंकि अदालत के फैसले के बाद उन्हें लाइसेंस या स्पेक्ट्रम गंवानी पड़ी है।

फंसे कर्ज के लिए प्रावधान के लिए आरबीआई ने मार्च के अंत तक की समयसीमा तय की है, जिससे भी बैंकरों पर दबाव है। बैंकों का फंसा कर्ज करीब 11.88 लाख करोड़ रुपये हो गया है। क्रेडिट सुइस की रिपोर्ट के मुताबिक बैंकों को फंसे कर्ज के लिए मार्च 2018 तक अतिरिक्त 86,000 करोड़ रुपये अगल रखने होंगे। इसके अलावा, ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार 36 कंपनियों पर करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है और वह बैंकों द्वारा कर्ज को इक्विटी में बदलने का इंतजार कर रहे हैं।

इस गतिरोध को दूर करने के लिए बैंकरों ने केंद्रीय बैंक से कर्ज पुनर्गठन नियमों में ढील की मांग की है। उनका कहना है कि बड़े खातों के कर्ज के लिए प्रावधान को आठ तिमाहियों तक करने की अनुमती हो और मौजूदा प्रवर्तकों से व्यक्तिगत गारंटी न मांगी जाए। लेकिन आरबीआई ने नियमों में ढील देने का फिलहाल कोई संकेत नहीं दिया है। हालांकि उम्मीद है कि आरबीआई अप्रैल तक नए नियम ला सकती है जिससे कंपनियों को कर्ज पुनर्गठन कराने में मदद मिलेगी।

आरबीआई के साथ हाल में हुई वित्त मंत्री अरुण जेटली की बैठक में बैंकिंग क्षेत्र में परिसंपत्तियों पर दबाव की समस्या को कम करने के उपायों पर विचार किया गया। बैंक्स बोर्ड ब्यूरो के चेयरमैन विनोद राय ने भी बैंकिंग क्षेत्र में एनपीए की समस्या पर चिंता जताई है, क्योंकि इससे निजी क्षेत्र में नया निवेश नहीं हो पा रहा है।

Keyword: बैंक, एनपीए, निवेश, बैंकिंग, केंद्रीय जांच ब्यूरो, आईडीबीआई, किंगफिशर एयरलाइंस, आरबीआई,
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