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बदलते दौर में कैसे रहें नौकरी में सिरमौर

संजय कुमार सिंह /  March 19, 2017

भारत के सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र में संकट गहराता जा रहा है। अंतरराष्टï्रीय कंसल्टेंसी फर्म मैकिंजी ने एक ताजा रिपोर्ट में अनुमान लगाया है कि आईटी सेवा कंपनियों में 39 लाख कामगारों में से लगभग 50 प्रतिशत अगले तीन-चार वर्षों के दौरान अप्रासंगिक हो जाएंगे। तेजी से बदल रही प्रौद्योगिकी कई कामगारों के मौजूदा कौशल को चलन से बाहर कर देगी जबकि स्वचालन से कई आम रोजगार और निचले स्तर के काम खत्म  हो जाने की आशंका है। इस कारण युवा इंजीनियरिंग स्नातकों और आईटी कंपनियों में मझोले स्तर के प्रबंधकों, दोनों के लिए उन क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा को नए सिरे से विकसित करना जरूरी हो गया है जहां भविष्य में बढ़ोतरी की संभावना है। इन क्षेत्रों में बड़े डेटा विश्लेषण, वर्चुअल रियलिटी, आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), क्लाउड कंप्यूटिंग आदि शामिल है।

बढ़ता संकट
विश्लेषकों का कहना है कि टेस्टिंग, बग फिक्सिंग और बेसिक कोडिंग जैसे निचले स्तर के कौशल को लेकर अगले कुछ वर्षों के दौरान जोखिम दिख रहा है, क्योंकि स्वचालन यानी ऑटोमेशन  तेजी से बढ़ रहा है। आईटी स्टाफिंग कंपनी मेगना इन्फोटेक के बिजनेस हेड संजू बल्लुरकर कहते हैं, 'इस समय कार्यरत लगभग 30-40 फीसदी कर्मचारियों को प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए तुरंत ही अपना कौशल विकास करना होगा।' जिन नौकरियों को रचनात्मकता, क्लाइंट इंगेजमेंट या नए सॉल्युशन की जरूरत नहीं है, उन्हें लेकर जोखिम बना रहेगा।
कई युवा इंजीनियरिंग स्नातक नौकरी तलाशने में इसलिए विफल रहते हैं क्योंकि उन्होंने जो कुछ कॉलेज में सीखा, वह मौजूदा रोजगार बाजार में मिलने वाले अवसरों के अनुकूल नहीं है। इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी क्षेत्र के लिए पेशेवर संस्था इंस्टीट्ïयूशन ऑफ इंजीनियरिंग ऐंड टेक्नोलॉजी (आईईटी) के कंट्री हेड एवं निदेशक शेखर सान्याल कहते हैं, 'कई नई प्रौद्योगिकियां विकसित हो रही हैं। इनके लिए कोई पाठ्ïय पुस्तक नहीं हैं। विश्वविद्यालयों के प्रोफेसरों को उद्योग से सीखना होगा जिससे कि वे अपने छात्रों को दक्ष बना सकें। दुर्भाग्य से, भारत में हमारे पास ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है कि विश्वविद्यालय ोंके कई प्रोफेसर उद्योग के साथ मिलकर काम करते हों।' इंडियन इंस्टीट्ïयूट ऑफ साइंस, बेंगलूरु में पूर्व प्रोफेसर और माइक्रोसॉफ्ट रिसर्च में शोधकर्ता स्वामी मनोहर कहते हैं, 'दूसरा मसला है परीक्षा-आधारित ऐसी व्यवस्था जिस पर विश्वविद्यालय अमल करते हों। छात्रों का पूरा ध्यान हर सेमेस्टर में कई परीक्षाएं पास करने पर रहता है। इस तरह के दबाव वाला माहौल मौलिक अवधारणा और कौशल अपनाने के लिए उपयुक्त नहीं है।'
आईटी सेवा कंपनियों में मझोले स्तर के प्रबंधकों की नौकरियों पर भी जोखिम बना हुआ है। उद्योग के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि कई कंपनियों में कर्मचारी अपने पहले कुछ घंटे उन परियोजनाओं पर रुटीन कोडिंग जॉब्स पर खर्च करते हैं जो प्रौद्योगिकी केंद्रित नहीं हैं। इसलिए इन वर्षों के दौरान उनका तकनीकी कौशल बहुत ज्यादा नहीं बढ़ता। तब वे प्रबंधक बनते हैं और 10-15 लोगों की टीम का प्रबंधन करते हैं। प्रबंधक के रुप में वे उस तरह के तकनीकी कौशल को भी खो देते हैं जो उनके पास पहले से होता है। इसलिए आईटी सेवा कंपनियों में मझोले स्तर के कई प्रबंधक कहीं भी सेवा योग्य नहीं हैं। ये कंपनियां वेतन देने में भी सक्षम नहीं हो सकतीं क्योंकि उनका मार्जिन घट रहा है। मनोहर कहते हैं, 'मझोले स्तर के प्रबंधकों की भरमार है और इनके पास नई प्रौद्योगिकी के अनुकूल कौशल नहीं है।' इसलिए इन दोनों श्रेणियों में कौशल के विकास पर जोर दिए जाने की जरूरत है।

अवसरों के क्षेत्र
जहां निचले स्तर और सामान्य रोजगारों में कमी आएगी, वहीं नई प्रौद्योगिकी वाले क्ष्ेात्रों में अवसर पैदा होंगे। बल्लुरकर का कहना है, 'एनालिटिक्स एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें अच्छी मांग है। बिजनेस इंटेलीजेंस टूल के बारे में ज्ञान अगले कम से कम तीन-चार वर्षों के लिए फायदेमंद होगा। मोबलिटी ऐसा अन्य क्षेत्र है जिसमें बढ़ोतरी की बढिय़ा संभावनाएं हैं।' सान्याल के अनुसार कौशल से संबंधित जिस क्षेत्र में मांग अच्छी रहेगी, वह है हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, एनालिटिक्स और व्यावसायिक समस्याओं को एक साथ कैसे सुलझाया जाए। सान्याल का कहना है, 'ऐसे लोगों की जरूरत बढ़ेगी जो सॉल्युशन के सभी पहलुओं पर विचार कर सकें और इस बारे में निर्णय ले सकें कि कौन से हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जाए? उसके साथ क्या एनालिटिक्स अपनाया जाए? आपको व्यावसायिक समस्या भी समझने की जरूरत होगी और उसी हिसाब से सॉल्युशन  अपनाने की जरूरत होगी।'

आपको क्या करना चाहिए?
आपको अपनी कंपनी से मिला प्रशिक्षण: प्रमुख आईटी सेवा कंपनियों में कार्यरत लोगों के लिए अच्छा मौका यह है कि वे अपनी कंपनी की ओर से चलाए जा रहे रीस्कीलिंग प्रोग्राम में हिस्सा लें। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ने डिजिटल टेक्नोलॉजी में 100,000 लोगों को फिर से प्रशिक्षित किए जाने की बात कही है, वहीं विप्रो ने चालू वित्त वर्ष की पहली तीन तिमाहियों में 30,000 कर्मचारियों को दुबारा प्रशिक्षित किया है। हालांकि आईटी से जुड़े एक कर्मचारी का कहना है कि हर कर्मचारी को पुन: प्रशिक्षण का मौका नहीं मिलता है। यदि प्रशिक्षक 'इंटरनल' है तो उसकी गुणवत्ता निष्पक्ष हो सकती है जबकि  'एक्सटर्नल' प्रशिक्षक महंगा साबित होगा।

ऑनलाइन पाठï्ïयक्रम
 जरूरतमंद लोगों को अब मैसिव ओपन ऑनलाइन कोर्सेज (एमओओसी) पर विचार करना चाहिए। सान्याल कहते हैं, 'यह ऐसा क्षेत्र है जिसमें कम कीमत पर पर्याप्त जानकारी उपलब्ध है। बेसिक कोर्स आमतौर पर नि:शुल्क हैं जबकि एडवांस्ड लेवल कोर्स की कीमत 3,000-10,000 रुपये होगी। ये कुछ सप्ताह से कुछ महीने चलते हैं।' मैसाच्यूसेट्ïस इंस्टीट्ïयूट ऑफ टेक्नोलॉजी और स्टैनफोर्ड के ऑनलाइन पाठ्ïयक्रम उपलब्ध हैं। साथ ही, उडासिटी और कोर्सरा जैसे ऑनलाइन लर्निंग प्रदाताओं के पाठ्ïयक्रमों को उद्योग में कार्यरत लोग अपना सकते हैं। हालांकि यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि खुद से पढ़ाई करना और जानकारी बढ़ाना थोड़ा टेढ़ा काम है और इसके लिए काफी अनुशासन की जरूरत है।
आईईटी एक महीने में तीन पाठ्ïयक्रम शुरू करेगा। नैसकॉम ने आईआईएम-बेंगलूरु के साथ मिलकर जल्द ही अपना लीडरशिप रिसोर्स सेंटर शुरू करने की योजना बनाई है। नैसकॉम में वरिष्ठï उपाध्यक्ष संगीता गुप्ता का कहना है, 'शुरू में सेल्स एवं मार्केटिंग के लिए ऑनलाइन सामग्री उपलब्ध होगी। साथ ही, डिजिटल दौर में आवश्यक नेतृत्व क्षमता के बारे में बी सामग्री होगी। इसके बाद हम औपचारिक पाठ्ïयक्रमों की पेशकश पर जोर देंगे।'

बूट कैम्प
मौजूदा समय में बेंगलूरु और हैदराबाद जैसे शहरों में कोडिंग या प्रोग्रामिंग बूट कैम्प नाम से प्रशिक्षण केंद्र खुल रहे हैं। मनोहर कहते हैं, 'वे आपको प्रोग्रामिंग स्किल्स में एक महीने से लेकर 12 महीने के लिए प्रशिक्षित करते हैं। इसका लाभ यह है कि ये पाठï्ïयक्रम ऐसा समुदाय मुहैया कराते हैं जिसके भीतर आप नए कौशल सीख सकते हैं। ये प्रशिक्षण केंद्र ऐसे कौशल सिखाते हैं जिनकी बाजार में मांग है।' इनमें ऐस हैकर एकेडेमी, गीकस्कूल और जग्गा शामिल हैं। बूट कैम्प का खर्च अवधि पर आधारित करता है और यह कुछ दिन के लिए 50,000 रुपये से लेकर 12 सप्ताह के कोर्स के लिए 2 लाख रुपये तक हो सकता है। कुछ प्रशिक्षण केंद्र किस्तों में भुगतान का मॉडल भी अपनाते हैं। पर इनसे जुडऩे से पहले आप यहां सीख चुके लोगों से अता-पता कर सकते हैं।

Keyword: IT, employment, jobs,
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