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फेडरल की दर वृद्घि से बाजार में तेजी ने विश्लेषकों को चौंकाया

हंसिनी कार्तिक /  March 19, 2017

सामान्य तौर पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा दर वृद्घि को, खासकर उभरते बाजारों (ईएम) के लिए सकारात्मक नहीं माना जाता है, क्योंकि अधिक ब्याज दरों से उन फंडों (लिक्विड) की कीमतें बढ़ जाती हैं जो अक्सर अधिक प्रतिफल के लिए ईएम इक्विटी जैसी जोखिमपूर्ण परिसंपत्तियों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। पिछले प्रदर्शन को संकेतक के तौर पर मानते हुए कारोबारी गुरुवार के कारोबारी सत्र में भी कुछ गिरावट या तेजी की उम्मीद कर रहे थे। लेकिन पिछले प्रदर्शन के ठीक विपरीत हुआ और वह तर्कपूर्ण भी था।  विश्लेषकों का सर्वसम्मति से मानना है कि गुरुवार का कारोबारी सत्र स्पष्टï रूप से तार्किक या अंतनिॢहत बाजार सिद्घांतों पर हावी रहा। मौजूदा स्तरों से, तेजी की तुलना में गिरावट अधिक  है।
यूटीआई म्युचुअल फंड में वरिष्ठï उपाध्यक्ष एवं फंड प्रबंधक (इक्विटी) ललित नांबियार का कहना है, 'उत्तर प्रदेश में भाजपा की चुनावी जीत ने विदेशी संस्थागत निवेशकों के लिए भी रुझान बदल दिए हैं।' एक अन्य फंड प्रबंधक का मानना है कि कुछ संस्थागत निवेशकों ने अमेरिकी फेड की दर वृद्घि की व्याख्या और उसके प्रमुख द्वारा कमेंट्री अमेरिका में वृद्घि की रफ्तार में सुधार का संकेत देती है। अमेरिकी फेड की प्रमुख जैनेट येलेन ने इस साल दो दर वृद्घि और अगले साल तीन दर वृद्घि का लक्ष्य रखा है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, 'सामान्य तौर पर इसे वैश्विक तरलता पर एक सीमा के तौर पर परिभाषित किया जाएगा। लेकिन इस समय दुनियाभर में इक्विटी बाजार फेडरल के निर्णय को वृद्घि के सकारात्मक संकेत के तौर पर देख रहे हैं। जब अमेरिका में संरक्षणवाद को लेकर नेतृत्व आक्रामक रुख अपना रहा है तो इसकी आशंका है कि भारत को इस समय अमेरिका के मजबूत होने से लाभ होगा।' विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका में अपनी उपस्थिति बढ़ाने की कोशिश कर रही कंपनियों के लिए कर दर घटाए जाने जैसे उपाय भारत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकते हैं। यूबीएस में भारतीय शोध के प्रमुख गौतम छाछरिया का कहना है, 'भारतीय इक्विटी बाजार वैश्विक विपरीत परिस्थितियों को पूरी तरह नजरअंदाज कर रहे हैं।'
जिन चिंताओं ने विश्लेषकों को प्रभावित किया है, उनमें मौजूदा तेजी में बाजार धारणा में गंभीरता का अभाव है। नांबियार कहते हैं, 'अब तक (1993-97 और 2003-07) भारतीय बाजार में दर्ज की गई 6 तेजी में से सिर्फ दो को ही आय में वृद्घि से मदद मिली। अन्यथा, यह काफी हद तक महज मूल्य-आय वृद्घि से संबंधित है। यह इक्विटी बाजारों की परंपरा रही है और मैं नहीं मानता कि मौजूदा तेजी पिछली बार की तेजी के कारणों से बहुत ज्यादा अलग है।' ऐम्बिट कैपिटल में इक्विटी प्रमुख प्रमोद गुब्बी कहते हैं, 'बाजार आय अनुमानों में कमी के एक अन्य चरण की तेजी से ओर बढ़ रहा है।' गुब्बी कहते हैं, 'आय पर स्थिति की स्पष्टïता के बगैर मूल्यांकन को जायज ठहराना चुनौतीपूर्ण होगा।' उन्होंने कहा, 'वित्त वर्ष 2018 में वस्तु एवं सेवा कर के क्रियान्वयन की वजह से आय में गिरावट की आशंका का असर कीमतों पर बहुत ज्यादा नहीं पड़ा है। यदि मार्च तिमाही के आय परिणामों के बाद कमेंट्री मजबूत नहीं रहती है तो मैं तेजी पर विराम लगने की उम्मीद करूंगा।' वहीं छाछरिया वित्त वर्ष 2018 के लिए आय अनुमानों में आठ फीसदी की कमी का संकेत दे रहे हैं।
मुख्य रूप से मिड-कैप शेयरों के पोर्टफोलियो का प्रबंधन करने वाले नांबियार का कहना है कि वह अब ऐसे शेयरों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं जो वैश्विक समस्याओं के प्रभाव से बचे रहने में सक्षम साबित हो सकते हों और क्षमता विस्तार चक्र के शुरू होने की स्थिति में कमाई का मौका प्रदान करने में कामयाब हों। वह कहते हैं, 'लेकिन क्या हम शेयरों के लिए सही कीमत चुका रहे हैं।' विश्लेषकों का मानना है कि भले ही वृद्घिशील घरेलू फंड प्रवाह बढ़ाने की राह में चुनौती सामने नहीं आ सकती हो, पर शेयरों का चयन बेहद जटिल साबित हो सकता है।
वह कहते हैं, 'एक साल पहले की तुलना में मौजूदा समय मे कुछ ही ऐसे अच्छे नाम बचे हैं जिन पर विचार किया जा सकता है और मेरा मानना है कि यदि तेजी लगातार रुझान-केंद्रित बनी रहती है तो हमारे पास जल्द ही विकल्प समाप्त हो जाएंगे।' इक्विटी से संबंधित अन्य जोखिम भी हैं। एमके ग्लोबल फाइनैंशियल में इक्विटी रणनीतिकार धनंजय सिन्हा का कहना है कि फेडरल की दर वृद्घि के साथ आरबीआई अपनी दरें नहीं घटा सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि इससे ऋण वृद्घि की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। सिन्हा कहते हैं, 'इसका परिणाम बेहद गंभीर हो सकता है क्योंकि इससे आय अनुमान प्रभावित हो सकते हैं।' फिलहाल विश्लेषक निवेशकों को अपनी बचत पर सतर्कता के साथ आगे बढऩे और शेयरों के चयन पर बेहद चयनात्मक रुख अपनाने की सलाह दे रहे हैं। वित्त वर्ष 2018 का आय अनुमान पिछले साल मार्च से लगभग 12 फीसदी तक घटाया जा चुका है और विश्लेषकों का कहना है कि भविष्य में इसमें और कमी की गुंजाइश बनी हुई है।

Keyword: federal reserve, interest rates, market,
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