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बैंकों को इस साल कृषि ऋण में ज्यादा चूक की उम्मीद

नम्रता आचार्य / कोलकाता March 19, 2017

चालू वित्त वर्ष में बैंक कृषि क्षेत्र के कर्ज में ज्यादा चूक की उम्मीद कर रहे हैं। नोटबंदी की वजह से पहले ही वसूली पर असर पड़ा है, वहीं जिन राज्यों में चुनाव हुए हैं वहां कर्जमाफी की अटकलों के कारण डिफॉल्ट और बढ़ गया है।
इसके अलावा दक्षिण भारत के राज्यों जैसे कर्नाटक और तमिलनाडु में सूखा पडऩे की वजह से चूक और बढ़ी है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के मुताबिक परंपरागत अनुमानों के आधार पर कम ïअवधि के कर्ज की रिकवरी पिछले साल की तुलना मेंं 20 प्रतिशत कम रहने की उम्मीद है।
सुस्त वसूली का असर पहले ही नए कर्ज लेने वालों पर नजर आने लगा है। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक कृषि ऋण वृद्धि 20 जनवरी 2017 के आंकड़ोंं के मुताबिक सालाना करीब 8 प्रतिशत बढ़ा है, जबकि जनवरी 2016 तक समान अवधि के दौरान 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी। कृषि ऋण की वृद्धि दर पिछले 3 साल के न्यूनतम स्तर पर है।
कोलकाता के यूनाइटेड बैंंक आफ इंडिया की रबी फसल के कम अवधि कर्ज की रिकवरी 20 प्रतिशत कम रही है। इस साल 700-800 करोड़ वसूली की जगह इस साल रबी फसल ऋण की रिकवरी करीब 550-650 करोड़ रुपये रही।
सिंडिकेट बैंक के प्रवक्ता के मुताबिक इस साल बैंकों को बड़े पैमाने पर कृषि कर्ज के पुनर्गठन की जरूरत पड़ेगी, खासकर सूखे की वजह से इस पर असर पड़ेगा। केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और पुदुच्चेरी ने खुद को सूखा प्रभावित प्रदेश घोषित कर दिया है।
भारतीय स्टेट बैंक के भी एक प्रवक्ता ने इस बात की पुष्टि की कि इस साल कृषि ऋण के डिफॉल्टरों की संख्या ज्यादा रहेगी और नया कर्ज लेने वाले कम रहेंगे।
नोटबंदी की वजह से नकदी का संकट होने से दिसंबर 2016 में भारतीय रिजर्व बैंक ने कृषि ऋण के भुगतान के लिए अतिरिक्त 60 दिन का वक्त दिया था, जिसका भुगतान 1 नवंबर से 31 दिसंबर 2016 के बीच होना था। बाद में भुगतान करने की अवधि को 30 दिन और बढ़ा दिया गया। इससे किसानों को कर्ज के भुगतान के लिए 90 दिन का वक्त मिल गया।
खरीफ सत्र के कर्ज की वसूली नवंबर दिसंबर में चरम पर होती है। हाल ही में राजस्थान के सहकारिता मंत्री अजय सिंह ने विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान बताया था किसानोंं को दिए गए फसल ऋण की रिकवरी 14.50 प्रतिशत के निम्न स्तर पर रही, क्योंकि सरकार ने उन पर पुनर्भुगतान के लिए दबाव नहींं डाला।
उन राज्यों में कर्ज भुगतान में चूक करने वालों की संख्या ज्यादा है, जहां हाल में विधानसभा चुनाव हुए हैं। एक सरकारी बैंक के अधिकारी ने कहा किकिसानों को उम्मीद है कि उनका कर्ज माफ हो जाएगा।
कर्जमाफी की अफवाह के कारण सूक्ष्म वित्त क्षेत्र में पहले ही डिफॉल्टरों की संख्या बढ़ी है। उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड में दिसंबर महीने में पुनर्भुगतान 25-30 प्रतिशत पर आ गया, जिसके बाद एमएफआई ने पुनर्भुगतान को बढ़ावा देने के लिए एक्सटेंसिव एडवोकेसी कार्यक्रम भी चलाया। पश्चिम बंगाल के आरआरबी के एक प्रवक्ता ने भी कहा कि क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) में भी कृषि ऋण में वृद्धि दर इस साल करीब स्थिर रहने की उम्मीद है।

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