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एसटीटी पर रियायत चाहे सेबी

पवन बुरुगुला / मुंबई March 17, 2017

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने वैसे बाजार परिदृश्य की सूची भेजी है जिसे बजट के उस प्रस्ताव से बाहर रखा जा सकता है जिसमें शेयरों के वैसे लेनदेन पर पूंजीगत लाभ कर लगाने का प्रस्ताव है, जिसे प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) चुकाए बिना हासिल किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, बाजार नियामक ने वित्त मंत्रालय से सिफारिश की है कि उत्तराधिकार के तौर पर शेयरों का हस्तांतरण, कंपनी के भीतर पुनर्गठन और एम्पलॉयी स्टॉक ऑप्शंस (ईसॉप्स) के तहत होने वाले हस्तांतरण को छूट वाली सूची में रखा जा सकता है। किसी प्रतिफल के बिना विदेशी फंडों के जरिए होने वाले लेनदेन को इस सूची में शामिल किया जा सकता है।
 
सेबी ने ऐसे लेनदेन पर दी गई राहत पर एतराज नहीं जताया है, मसलन आईपीओ या बोनस या राइट्स इश्यू के जरिए मिले शेयर, जिस पर मोटे तौर पर एसटीटी का भुगतान नहीं किया जाता है। ऐसे लेनदेन के बारे में सरकार के वित्त विधेयक में जानकारी दी गई है। केंद्र सरकार छूट वाली सूची को अगले दो हफ्ते में अंतिम रूप दे सकती है क्योंकि नए नियम 1 अप्रैल से प्रभावी हो जाएंगे। बजट प्रस्ताव को लागू करने के मामले ने बाजार के प्रतिभागियों के बीच अनिश्चितता पैदा की है। सूत्रों ने कहा कि केंद्र अब सेबी व अन्य हितधारकों मसलन कानूनी विशेषज्ञों व कर पर परामर्श देने वालों से संपर्क कर रहा है।
 
प्रवर्तकों के बीच होल्डिंग पर सेबी के रुख से बाजार को थोड़ी राहत मिल सकती है। कई प्रवर्तक पहले ही आपस में शेयरों का हस्तांतरण कर रहे हैं ताकि उच्च कराधान को टाला जा सके। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अगला कदम तय करने से पहले इस मसले पर कुछ कंपनियां और स्पष्टता का इंतजार कर रही हैं। एक सूत्र ने कहा, सेबी की सिफारिश है कि आयकर अधिनियम की धारा 47 के तहत सभी लेनदेन को पूंजीगत कर लाभ से छूट दी जानी चाहिए क्योंंकि ऐसे लेनदेन की प्रकृति वाणिज्यिक नहीं है। धारा 47 में सभी गैर-वाणिज्यिक लेनदेन मसलन उपहार या परिवार या कंपनी के बीच संपत्तियों का हस्तांतरण आदि।
 
नियामक ईसॉप्स के जरिए अधिग्रहीत शेयरों के लिए भी छूट चाहता है, जो भारतीय कंपनी जगत प्रोत्साहन की प्रमुख व्यवस्था है। बाजार के भागीदारों का कहना है कि बजट प्रस्ताव का लक्ष्य बाजार से बाहर होने वाले लेनदेन पर लगाम कसना है, जिसका इस्तेमाल अक्सर उचित कीमत से कम पर शेयर अधिग्रहण के लिए किया जाता है और एसटीटी के भुगतान से बच जाता है। समझा जाता है कि नियामक बाजार से बाहर होने वाले सभी शेयर हस्तांतरण पर कराधान के हक में है।
 
शार्दुल अमरचंद मंगलदास के पार्टनर अमित सिंघानिया ने कहा, सामान्य तौर पर बाजार से बाहर होने वाले लेनदेन अनियंत्रित बने हुए हैं और ये लेनदेन उचित कीमत से कम पर हो सकते हैं। मकसद है ऐसे लेनदेन पर निशाना साधने और सही मामलों को छूट देने का है। एफपीआई के लिए सेबी ने तथाकथित फ्री ऑफ कॉस्ट (एफओसी) हस्तांतरण पर छूट मांगी है। ये हस्तांतरण मोटे तौर पर फंडों के बीच पुनर्गठन के मकसद से या विलय या अधिग्रहण के मामले में होते हैं। 
Keyword: share, market, sensex, बीएसई, कंपनी, शेयर, पुनर्खरीद,
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