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वेतन ढांचा बदलेगा स्टेट बैंक

अनूप रॉय / मुंबई March 17, 2017

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) वेतन ढांचे का पुराना प्रस्ताव बहाल कर सकता है, जिसे कर्मचारी संगठनों के दबाव में अब तक लागू नहीं किया जा सका। इस ढांचे में अधिकारियों का वेतनमान 4 से 7 पैमाने पर निर्धारित व परिवर्तनीय घटकों में विभाजित किया जाएगा। निर्धारित वेतन में मूल वेतन, महंगाई भत्ता, आवास भत्ता और शेष प्रदर्शन से जुड़ा परिवर्तनीय वेतन होगा। अगर नया ढांचा स्वीकार किया जाता है तो यह सहयोगी बैंकोंं पर भी लागू होगा, जब वे 1 अप्रैल को एसबीआई का हिस्सा बन जाएंगे। स्टेट बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक बेहतर प्रदर्शन करने वाले कर्मचारी परिवर्तनीय वेतन ढांचा चाहते हैं, क्योंकि उनके कठिन परिश्रम का कोई पुरस्कार नहीं मिलता। नए वेतन ढांचे में जरूरी नहीं है कि भुगतान मौजूदा पैकेज से कम हो, लेकिन इसमें इस ढांचे से ज्यादा वेतन होने की गुंजाइश होगी।
 
स्टेट बैंक इस व्यवस्था को कुछ समय से पेश करने की कोशिश कर रहा है और वेतन को लेकर बातचीत में इसे रखा जा रहा है, लेकिन कर्मचारी संगठन इस प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं। बहरहाल इस बार मामला कुछ अलग हो सकता है। यूनियनों का कहना है कि परिवर्तनीय ढांचा अब लगता है कि अवश्यंभावी हो गया है। यूनियन के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, 'अब ऐसा लगता है कि विलय के बाद हम इस ढांचे को रोकने में सक्षम नहीं हो पाएंगे। बैंक प्रबंधन अधिकारियोंं को इस पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव बनाएगा और इसके बाद अलग ढांचा लागू हो जाएगा।' 
 
सहयोगी बैंकों ने पहले ही कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (वीआरएस) की पेशकश की है। उम्मीद की जा रही है कि यह योजना व्यापक रूप से स्वीकार्य होगी। योजना उन कर्मचारियों के लिए है, जिन्होंने 20 साल की सेवा पूरी कर ली है या सेवा के 5 साल ही बचे हैं। यूनियनों ने कर्मचारियों से इस योजना को खारिज करने की अपील की है। लेकिन यूनियनों के लिए कर्मचारियों को मनाना मुश्किल होगा। यूनियनों का कहना है कि ऐसा इसलिए है क्योंकि तमाम शाखाएं बंद कर दी जाएंगी या विलय के बाद उन्हें अलग तरीके से डिजाइन किया जाएगा और मौजूदा कर्मचारियोंं का अनिवार्य रूप से स्थानांतरण होगा। 
 
मार्च 2016 तक के आंकड़ों के मुताबिक उसके कर्मचारियोंं की संख्या 2,07,739 है। स्टेट बैंक आफ त्रावणकोर में 14,892, स्टेट बैंक आफ बीकानेर ऐंड जयपुर में 13,529, स्टेट बैंंक आफ मैसूर में 10,650, स्टेट बैंक आफ हैदराबाद में 17,414 और स्टेट बैंक आफ पटियाला में 11,175 कर्मचारी हैं। आखिरी दो बैंक सूचीबद्ध नहीं हैं। एक सहयोगी बैंक के अधिकारी ने कहा, 'सहयोगी बैंकों के साथ व्यवहार बड़े पैमाने पर इस बात पर निर्भर कि वीआरएस योजना कितनी सफल रहती है। अगर यह विफल रहती है तो कर्मचारियों के साथ खराब वर्ताव हो सकता है।' अगर पहले के विलय को संकेत माना जाए तो सहयोगी बैंकों के कर्मचारियों के साथ कुछ भेदभाव की संभावना बनती है। इस अनुमान के कारण यूनियन इस कदम का विरोध कर रहे हैं और विरोध जल्द ही तेज हो सकता है। स्टेट बैंक आफ सौराष्ट्र और स्टेट बैंक आफ इंदौर के एसबीआई के साथ विलय के बाद प्रबंधन ने विलय हुई इकाइयों के अधिकारियों की वरिष्ठता कम कर दी थी। 
Keyword: SBI, bank, भारतीय स्टेट बैंक बीमा,
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