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बाजार विजेताओं की तलाश

साप्ताहिक मंथन
टी. एन. नाइनन /  March 17, 2017

शेयर बाजार सूचकांक अपने अब तक के उच्चतम स्तर पर हैं। ऐसे में यह देखना श्रेयस्कर होगा कि जनवरी 2008 के उच्चतम स्तर के बाद से बतौर निवेश शेयरों का प्रदर्शन कैसा रहा है? उस दौरान वैश्विक वित्तीय संकट के भंवर में फंसने के ऐन पहले तक बाजार जबरदस्त उछाल पर थे। तब से अब तक नौ साल की अवधि में सेंसेक्स में 40 फीसदी की तेजी आई है। यह इसी अवधि में किसी बैंक में सावधि जमा के प्रतिफल से थोड़ी कम है। इसी अवधि में सोने के दाम 11,000 रुपये प्रति 10 ग्राम से उछलकर 28,000 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गए। यह किसी भी शेयर समूह से बेहतर प्रदर्शन है। 

 
अचल संपत्ति कीमतों के मामले में किसी विश्वसनीय संकेतक के अभाव में शेयरों और परिसंपत्ति के मूल्य की तुलना करना कठिन है। हमें केवल यह पता है कि गत पांच वर्ष में अचल संपत्ति की कीमतों में भारी गिरावट आई है खासतौर पर नवंबर में नोटबंदी के बाद। बहरहाल उसके पहले इस क्षेत्र का प्रदर्शन अच्छा था। आप कह सकते हैं कि वर्ष 2008 के शुरुआती सप्ताह शेयरों के लिए अस्वाभाविक उछाल वाले थे। ऐसे में उन्हें संदर्भ मानकर हम सही तस्वीर नहीं हासिल कर सकते। शायद यह सही हो लेकिन हमें उच्चतम से उच्चतम तक की ही तुलना करनी होगी।
 
सर्वाधिक बाजार पूंजीकरण वाले शेयरों की बात करें तो एक श्रेणी जिसका प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है वह है सरकारी क्षेत्र। यह बात समझी जा सकती है कि तेल कीमतों ने ओएनजीसी के शेयरों को प्रभावित किया और इस अवधि में उसके दाम गिरे लेकिन अन्य का प्रदर्शन भी बेहतर नहीं रहा। एनटीपीसी के शेयर मूल्य भी गिरे और वर्ष 2011 में सूचीबद्घ होने के बाद कोल इंडिया के शेयरों के दाम भी कम हुए हैं। पावरग्रिड और गेल किसी तरह बाजार के साथ कदमताल कर सके हैं। इंडियन ऑयल के शेयरों के दाम इस अवधि में तकरीबन दोगुने हो गए हैं और वह सबसे मूल्यवान सरकारी कंपनी के रूप में उभरी है। 
 
कहना न होगा कि सबसे अच्छा प्रदर्शन निजी क्षेत्र का रहा। एशियन पेंट्स, इंडसइंड बैंक, मारुति सुजूकी और सन फार्मा जैसी कंपनियों ने जबरदस्त गति दिखाई है। उनके शेयरों की बात करें तो पहली दो कंपनियों के शेयर की कीमत इस अवधि में 10 गुना बढ़ी जबकि बाद वाली दो की कीमत छह गुना। हालिया दिक्कतों के बावजूद प्रौद्योगिकी क्षेत्र की कंपनियों का प्रदर्शन बेहतर रहा है। टाटा कंसल्टेंसी और एचसीएल टेक्नॉलजीज का मूल्यांकन पांच गुना हो गया जबकि इन्फोसिस का प्रदर्शन भी अपेक्षाकृत बेहतर रहा। विप्रो ने धीमी गति से बढ़ोतरी दर्ज की। बैंकों और वित्तीय क्षेत्र की बात करें तो दो सबसे बड़े बैंकों भारतीय स्टेट बैंक और आईसीआईसीआई बैंक का प्रदर्शन अन्य प्रमुख संस्थानों की तुलना में कमजोर रहा। खासतौर पर एचडीएफसी बैंक, ऐक्सिस बैंक, कोटक और एचडीएफसी की बात करें तो उनमें मोटेतौर पर 150 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी हुई। जिन बड़ी निजी कंपनियों का प्रदर्शन कमजोर रहा उनकी बात करें तो दूरसंचार क्षेत्र में रिलायंस और भारती एयरटेल के शेयरों की कीमत में 2008 के स्तर से गिरावट देखने को मिली। लार्सन ऐंड टुब्रो एक अन्य बड़ी निजी कंपनी है जिसने निराश किया। इसके शेयरों की कीमत 15 फीसदी से भी कम की दर से बढ़ी। इस बीच उपभोक्ता वस्तुओं के क्षेत्र की दो बड़ी कंपनियों आईटीसी और हिंदुस्तान यूनिलीवर ने भी स्थायित्व भरा और बढिय़ा प्रदर्शन किया। उनका मूल्यांकन मोटे तौर पर चार गुना हो गया। 
 
हाल के वर्षों में असली खिलाड़ी मिड कैप शेयर साबित हुए। उस लिहाज से बाजार के केवल ऊपरी क्षेत्र पर नजर डालना भ्रामक साबित होगा। इस क्षेत्र में प्रदर्शन में तमाम अंतर हैं। मसलन आयशर मोटर्स के शेयरों की कीमत इस अवधि में चकित करने वाली रफ्तार से बढ़कर 60 गुना हो गई। जबकि टीटीके प्रेस्टीज की कीमत में 30 गुना इजाफा हुआ। निश्चित रूप से ऐसी कई और कंपनियां भी होंगी। समग्र बाजार पर नजर डाली जाए तो इन नौ वर्षों में सारे शेयरों की कीमत औसतन 140 फीसदी बढ़ी है जबकि सकल घरेलू उत्पाद तीन गुना हो गया है। आखिर में तीन बातें ध्यान देने लायक हैं। बड़े समूह नदारद नजर आ रहे हैं, जिनका प्रदर्शन अच्छा है, उन क्षेत्रों का प्रदर्शन भी अच्छा है और व्यक्तिगत स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले नाम चौंकाते नहीं। अच्छी कारोबारी गाथाएं अक्सर कोई गोपनीय नहीं होतीं और उनका अपना मूल्य होता है।
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