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इन्फी: हरेक दो साल में पुनर्खरीद संभव

आयान प्रामाणिक / बेंगलूरु March 16, 2017

पिछले कुछ वर्षों के दौरान सॉफ्टवेयर शेयरों पर रिटर्न में काफी नरमी दिख रही है और ऐसे में विश्लेषकों का कहना है कि इन्फोसिस को अपनी प्रति शेयर आय वृद्धि में सुधार के लिए हरेक दो साल बाद पुनर्खरीद पर विचार करना चाहिए। देश की दूसरी सबसे बड़ी सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी 31 दिसंबर के अनुसार 35,985 करोड़ रुपये यानी 5.4 अरब डॉलर के नकदी भंडार पर बैठी है।

 
प्रभुदास लीलाधर के आईटी विश्लेषक मधु बाबू ने कहा, 'उन्हें हर साल लाभांश भुगतान अथवा प्रत्येक दो साल बाद पुनर्खरीद के जरिये अतिरिक्त नकदी भंडार को खपाना चाहिए। इससे कंपनी को शेयरों की संख्या घटाने और प्रति शेयर आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। फिलहाल  अर्जित मुनाफे पर इसका लाभांश भुगतान अनुपात 40 से 50 फीसदी है लेकिन उसने अभी तक बहीखाते पर नकदी जमा नहीं होने दिया है।'
 
फरवरी में इन्फोसिस ने कंपनी कानून के तहत शेयर पुनर्खरीद सहित अपने आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन में संशोधन के लिए शेयरधारकों से मंजूरी मांगी थी। बेंगलूरु की यह आईटी सेवा कंपनी नकदी के उपयोग के मामले में काफी परंपरागत रही है और अपने संस्थापक एनआर नारायणमूर्ति द्वारा तैयार नीति को ही मानती रही। जबकि मुख्य कार्याधिकारी विशाल सिक्का ने कहा कि कंपनी 2020 तक 20 अरब डॉलर के अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए अधिग्रहण के जरिये 1.5 अरब डॉलर अतिरिक्त राजस्व अर्जित कर सकती है। हालांकि कंपनी ने अधिग्रहण के मोर्चे पर फिलहाल कोई बड़ा दांव नहीं लगाया है।
 
अगस्त 2014 में सिक्का के बतौर सीईओ कंपनी की कमान संभालने के बाद इन्फोसिस चार कंपनियों के अधिग्रहण के लिए 54 करोड़ डॉलर खर्च कर चुकी है। लेकिन कंपनी ने स्वचालन और डिजिटल प्रौद्योगिकी में क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से ये अधिग्रहण किए। कंपनी को उस समय झटका लगा जब उसके प्रमुख हितधारकों ने बहीखाते पर दर्ज अतिरिक्त नकदी का इस्तेमाल नहीं किया जबकि प्रमुख प्रतिस्पर्धी कॉग्निजेंट ने अपने संस्थागत निवेशक इलियट कैपिटल के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए पुनर्खरीद और लाभांश के रूप में शेयरधारकों को 3.4 अरब डॉलर लौटाने की घोषणा की थी। पिछले छह-सात साल के दौरान इन्फोसिस के शेयर मूल्य में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। कंपनी का शेयर भाव 2011 में करीब 850 रुपये था जो पिछले छह साल में महज 20 फीसदी बढ़त के साथ शुक्रवार को 1,020 रुपये रहा।
 
एक अन्य विश्लेषक ने कहा कि कंपनी ने अब तक पुनर्खरीद अथवा किसी बड़े अधिग्रहण पर विचार नहीं किया है और इसलिए उसने लाभांश भुगतान बढ़ाकर उसे समायोजित करने की कोशिश की है। कंपनी का लाभांश भुगतान अनुपात वित्त वर्ष 2013 में 25 फीसदी से बढ़कर वित्त वर्ष 2015 और वित्त वर्ष 2016 में करीब 40 फीसदी हो गया। यह शीर्ष तीन भारतीय आईटी कंपनियों- टाटा कंसल्टैंसी सर्विसेज (टीसीएस), इन्फोसिस और विप्रो- के बीच सर्वाधिक आंकड़ा है। वित्त वर्ष 2010 और वित्त वर्ष 2013 के बीच लाभांश भुगतान अनुपात 20 से 30 फीसदी (वित्त वर्ष 2011 को छोड़कर) रहा जबकि अतिरिक्त नकदी में दो अंकों (14 से 26 फीसदी) में वृद्धि हुई। सिक्का के नेतृत्व में अतिरिक्त नकदी भंडार में 4 से 8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
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