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रिकॉर्ड स्तर पर देसी कंपनियों का लाभांश भुगतान

कृष्ण कांत और ऐश्ली कुटिन्हो / मुंबई March 16, 2017

भारतीय कंपनियां शेयरधारकों को इनाम देने के लिए उच्च लाभांश का इस्तेमाल कर रही है जबकि आय में बढ़त की रफ्तार सुस्त बनी हुई है। देश की अग्रणी सूचीबद्ध कंपनियों के लाभांश भुगतान का अनुपात वित्त वर्ष 2016 में अब तक के सर्वोच्च स्तर 40.5 फीसदी पर पहुंच गया, जो वित्त वर्ष 2008 में 20 फीसदी के निचले स्तर पर रहा था। पिछले पांच सालों में कुल लाभांश भुगतान में 11.9 फीसदी की चक्रवृद्धि दर से इजाफा हुआ है जबकि इस अवधि में शुद्ध लाभ में सालाना आधार पर 0.6 फीसदी की गिरावट आई है। कुल मिलाकर वित्त वर्ष 2016 में शेयरधारकों ने 1.56 लाख करोड़ रुपये का लाभांश हासिल किया, जो वित्त वर्ष 2011 के 89,000 करोड़ रुपये के लाभांश भुगतान का करीब दोगुना है। भारतीय कंपनियों की आय इस अवधि में स्थिर रही और यह वित्त वर्ष 2011 के 3.97 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले घटकर वित्त वर्ष 2016 में 3.86 लाख करोड़ रुपये रह गई।
 
बीएनपी पारिबा म्युचुअल फंड के डिप्टी सीईओ आनंद शाह ने कहा, यह सकारात्मक रुख है और अपनी बैलेंस शीट में कम नकदी रखने की वैश्विक संस्कृति के अनुरूप भी। मौजूदा वित्त वर्ष में यह प्रवृत्ति और मजबूत हुई है। वित्त वर्ष 2017 के पहले नौ महीने में कंपनियों की तरफ से दिए गए अंतरिम लाभांश में 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है और अब तक 166 कंपनियों ने अंतरिम लाभांश की घोषणा की है, जो पिछले साल की समान अवधि में 153 रही थी। कुल मिलाकर कंपनियां वित्त वर्ष 2017 में अंतरिम लाभांश के तौर पर करीब 50,300 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुकी है, जो वित्त वर्ष 2016 में पूरे साल के दौरान दिए गए लाभांश का करीब एक तिहाई है।
 
लाभांश भुगतान अनुपात का मतलब मौजूदा साल के शुद्ध लाभ से कंपनियों की तरफ से शेयरधारकों को वितरित किए जाने वाले इक्विटी लाभांश का अनुपात। यह विश्लेषण 953 कंपनियों के नमूने पर आधारित है जो बीएसई-500, बीएसई मिडकैप और बीएसई स्मॉलकैप इंडेक्स का हिस्सा है। मुमकिन तरीके से सभी आंकड़े एकीकृत आधार पर हैं। यह अनुपात और बढ़ सकता है अगर हम शेयर पुनर्खरीद को इसमें शामिल करें। पुनर्खरीद के जरिए कंपनियां शेयरधारकों को नकदी देती हैं। दिसंबर 2016 में समाप्त नौ महीने की अवधि में कंपनियों ने 51,275 करोड़ रुपये के शेयरों की पुनर्खरीद का ऐलान किया है, जो पिछले साल की समान अवधि में 3,849 करोड़ रुपये रहा था। इसमें से 26,743 करोड़ रुपये का इस्तेमाल कंपनियां पहले ही कर चुकी हैं, जो पिछले वित्त वर्ष में 3,461 करोड़ रुपये रहा था।
 
मॉर्गन स्टैनली के अनुमान के मुताबिक, पिछले 12 महीने में कंपनियों का 90 फीसदी लाभ शेयरधारकों को दिया गया है। इनमें से आधे से ज्यादा का भुगतान पुनर्खरीद के जरिए हुआ है। मॉर्गन स्टैनली के इक्विटी रणनीतिकार रिधम देसाई और शीला राठी ने एक रिसर्च नोट में कहा है, मुक्त नकदी प्रवाह कुछ साल पहले सकारात्मक हो गया और यह परिचालन में सुधार और कम पूंजीगत खर्च को प्रतिबिंबित करता है। पिछले 12 महीने में कंपनियों ने मुक्त नकदी के भुगतान को प्राथमिकता दी है। बढ़त के संकेतों का अभाव और आकर्षक शेयर मूल्यांकन इसकी व्याख्या करता है। बीएनपी पारिबा म्युचुअल फंड के शाह कहते हैं, आखिर में अगर कंपनियों के पास मौजूदा कारोबार में बढ़त के पर्याप्त मौके नहीं हैं तो दूसरे कारोबार में रकम निवेश करने और नुकसान उठाने के बजाय शेयरधारकों को रकम वापस देना बेहतर होता है, जो कई सालों से भारत में देखा गया है।
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