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एक बार में चुकाएं ट्रैक्टर का कर्ज

अभिजित लेले / मुंबई 03 14, 2017

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने अपना लेखा जोखा साफ करने की ओर एक कदम बढ़ाते हुए आज कर्ज लेकर ट्रैक्टर खरीदने और कर्ज न चुका पाने वाले कर्जदारों के लिए एकमुश्त निपटान योजना (ओटीएस) पेश की है। कर्ज देने वाले देश के सबसे बड़े बैंक ने कृषि ऋण की माफी को लेकर भी आपत्ति जताई है और कहा है कि इससे देश की भुगतान संस्कृति पर बुरा असर पड़ेगा। 
 
स्टेट बैंक के अधिकारी ने कहा कि ट्रैक्टर क्रेडिट बुक कृषि ऋण पोर्टफोलियो का हिस्सा है। बैंक नियमित रूप से ओटीएस योजना पेश करता रहता है, जिससे कि पुराने कर्ज (एनपीए) से छुटकारा मिल सके, जहां रिकवरी की संभावना कम होती है। बैंक ने नियामकीय मानकों के मुताबिक इस तरह की संपत्तियों के लिए पर्याप्त प्रावधान किए हैं। ट्रैक्टर लोन के लिए ओटीएस पिछले महीने की शुरुआत में आई थी और इस माह के आखिर तक (31 मार्च 2017) जारी रहेगी। योजना के तहत एसबीआई बकाये का 40 प्रतिशत लेगा। एसबीआई के प्रबंधन निदेशक रजनीश कुमार ने कहा कि यह योजना उन कर्जों के लिए है, जो 20 सितंबर 2011 के पहले दिए गए थे और सितंबर 2016 तक बकाया बढ़कर 25 लाख रुपये तक हो गया है। 
 
इस खाते की स्थिति गैर निष्पादित संपत्ति (संदेहास्पद या घाटे की संपत्ति) है। इस पोर्टफोलियो के कुल 4,000 करोड़ रुपये कर्ज में से इसके दायरे में 400 करोड़ रुपये ऋण आएगा। यह एक छोटा पोर्टफोलियो है। एसबीआई के अधिकारी ने कहा कि फसलों के नुकसान और ट्रैक्टरों को अन्य कार्यों में न लगाए जा सकने जैसी कुछ वजहों के कारण कर्ज का भुगतान नहीं हो पाया। 
 
मई 2015 में बैंक ने 'कर्ज निपटान सप्ताह' का विज्ञापन दिया था और गैर निष्पादित संपत्ति में जा चुके कर्ज को लेने वालों से कहा था कि इसके समाधान की कवायद करें। यह योजना सबके लिए उपलब्ध थी, जिसमें खुदरा, थोक और एसएमई ग्राहक शामिल थे। हालांकि जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों को इससे अलग रखा गया था। बहरहाल बैंक का ध्यान खुदरा उधारी लेने वालों और एसएमई को यह सुविधा देने की था। कर्ज समाधान सभी तरह के कर्ज पर लागू था, जिसमें व्यक्तिगत, कार व आवास ऋण शामिल था। 
 
बहरहाल कृषि कर्ज माफी को लेकर सावधानी बरतने की सलाह देते हुए रजनीश कुमार ने कहा कि बैंक अभी सरकार की ओर से इसके बारे में कुछ अहम घोषणा का इंतजार कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह की किसी कवायद से भुगतान को लेकर अनुशासन खराब होता है और फैसले करते समय इस पहलू पर ध्यान रखा जाना चाहिए। एसबीआई ने इसके पहले आंध्र प्रदेश व तेलंगाना में 2014 में कृषि ऋ ण माफी के विरोध में आवाज उठाई थी। बैंक की चेयरमैन अरुंधती भट्टाचार्य ने कहा था कि भुगतान अनुशासन खराब होगा, जिससे बैंकों की संपत्ति की गुणवत्ता पर असर पड़ेगा। 
 
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने अपने एक शोध नोट के विस्तृत विश्लेषन में कहा है कि कर्जमाफी की घोषणाओं (चुनाव के पहले और चुनाव के बाद) से कर्ज चुकाने के व्यवहार में गिरावट के कोई संकेत नहीं मिले हैं और न ही इसके बाद के वर्षों में कोई सुस्ती आई है। बहरहाल प्राथमिकता के क्षेत्र वाले कर्ज में कर्जमाफी की घोषणा आम हो गई है। ब्रोकरेज ने कहा कि उत्तर प्रदेश पर पंजाब में इस पोर्टफोलियो में 10 प्रतिशत कर्ज है। इसका असर निजी बैंकों की तुलना में सरकारी बैंकों पर ज्यादा होगा। 
Keyword: bank, loan, debt, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई),
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