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ऊंची कीमत पर शेयरों में निवेश... दे सकता है आपको क्लेश

संजय कुमार सिंह /  March 12, 2017

इस समय शेयर बाजारों में शेयरों के भाव ऊंचे स्तर पर हैं। ज्यादातर सूचकांक पांच साल के औसत से ऊपर और अपने सर्वोच्च स्तर के नजदीक हैं। डिपॉजिटरीज के आंकड़ों से पता चलता है कि 2016 में करीब 24 लाख नए निवेशकों ने डीमैट खाते खोले हैं, जो 2008 के बाद सर्वाधिक हैं। इस तरह निवेशक न केवल म्युचुअल फंडों के सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के जरिये शेयरों में प्रवेश कर रहे हैं बल्कि वे सीधे भी शेयरों में निवेश कर रहे हैं। लेकिन सीधे निवेश में जोखिम है और जब शेयरों के दाम ऊंचे स्तर पर हों तो जोखिम और बढ़ जाता है। अगर उन्हें पहली दफा नुकसान होता है तो वे लंबे समय तक शेयरों से दूरी बना सकते हैं। इससे वे इस संपत्ति वर्ग में मोटी पूंजी बनाने की संभावनाओं से खुद को वंचित कर सकते हैं। 

 
गलत उम्मीद और अनुचित तरीका 
 
शेयर बाजार में उतरने वाले ज्यादातर निवेशक इस संपत्ति वर्ग के जोखिमों को पूरी तरह समझे बिना इसमें प्रवेश करते हैं। मुंबई के फाइनैंशियल प्लानर अर्णव पांड्या कहते हैं, 'वे आमतौर पर उस समय बाजार में प्रवेश करते हैं, जब वह अच्छा प्रदर्शन कर रहा होता है। जब बाजार में गिरावट आती है तो वे पाते हैं कि वे इतने उतार-चढ़ाव वाले बाजार में निवेश करने में सक्षम नहीं हैं और नुकसान उठाकर बाहर निकल जाते हैं।' ज्यादातर नौसिखिए निवेशक निवेश की अवधि बहुत कम रखते हैं और तुरंत मुनाफा कमाने की उम्मीद करते हैं।
 
इससे नाकामी उनके हाथ लगती है। शेयरों में पहली बार निवेश करने वाले लोग निवेश के फंडामेंटल का बुनियादी ज्ञान हासिल किए बिना ही शेयरों में निवेश शुरू करते हैं। कुछ डे ट्रेडिंग में हाथ आजमाकर खुद की असफलता की जमीन तैयार कर लेते हैं। कुछ अन्य टिप्स के आधार पर निवेश करते हैं। बेंगलूरु की क्राइस्ट यूनिवर्सिटी में संपत्ति प्रबंधन पढ़ाने वाले एस जी राजा शेखरन कहते हैं, 'वे खुद शेयरों का विश्लेषण नहीं करते हैं, इसलिए उन्हें उन शेयरों पर ज्यादा भरोसा नहीं होता है जिन पर वे दांव लगाते हैं। वे प्रत्येक शेयर में थोड़ी-थोड़ी राशि का निवेश करते हैं और कुछ समय में बहुत से शेयर इकट्ठे कर लेते हैं, जिन पर वे ठीक से निगरानी नहीं रख पाते हैं।'
 
उन्हें अपने शेयरों में भरोसा नहीं होता है, इसलिए पहली बार बाजार गिरने पर वे तुंरत अपने शेयर बेच देते हैं। आमतौर पर ज्यादातर नए निवेशक ऊंचे मूल्यांकन और भविष्य के प्रतिफल के बीच विपरीत संबंध को नहीं समझते हैं। निर्माल्य बरुआ कहते हैं, 'तेजी के बाजार में शेयरों के दाम बढऩे से अच्छे प्रतिफल की संभावना कम हो जाती है।' बरुआ बेंगलूरु के निवेशक हैं, जिन्होंने 2007-08 में शेयर बाजार में भारी नुकसान उठाया था। इसके बाद उन्होंने निवेश से संबंधित पुस्तकें पढ़कर फंडामेंटल के आधार पर निवेश करना सीखा। बहुत से निवेशक अपने ब्रोकरों के कहने पर डेरिवेटिव में निवेश करते हैं। एक स्वतंत्र विश्लेषक आर बालाकृष्णन कहते हैं, 'नए निवेशक सोचते हैं कि वे अपने पैसे से डेरिवेटिव सेगमेंट में अच्छा प्रतिफल कमा सकते हैं। वे पेशेवरों की तरह इसका हेज के रूप में इस्तेमाल नहीं करते हैं।' नौसिखिये निवेशक प्रतिफल को लेकर भी गलत उम्मीदें रखते हैं। एक साल में 12 से 13 फीसदी प्रतिफल के बजाय वे एक दिन में 20 फीसदी मुनाफे की उम्मीद करते हैं। 
 
सुरक्षा के कुछ उपाय 
 
नए निवेशकों को म्युचुअल फंडों के जरिये शेयर बाजार में प्रवेश करना चाहिए। वे एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) या इंडेक्स फंडों में निवेश के जरिये शुरुआत कर सकते हैं, जिसमें उन्हें सही फंड भी चुनने की जरूरत नहीं पड़ती है। इन आसान उत्पादों में निवेश से वे यह सीख सकते हैं कि वे शेयर बाजारों के उतार-चढ़ाव को पचा सकते हैं या नहीं। जब वे यह सीख जाते हैं कि सही फंडों का चयन कैसे किया जाए तो वे सक्रिय रूप से प्रबंधन किए जाने वाले फंडों में निवेश को अपना सकते हैं। 
 
बजाज कैपिटल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और प्रमुख (निवेश विश्लेषण) आलोक अग्रवाल कहते हैं, 'लार्ज कैप या फ्लैक्सी कैप फंडों में निवेश से शुरुआत करनी चाहिए। इससे यह सुनिश्चित होगा कि आपको बाजारों का अच्छा अनुभव मिल जाएगा।' वह सुझाव देते हैं कि उन्हें फंड रेटिंग एजेंसियों द्वारा दी जाने वाली स्टार रेटिंग के बारे में लोगों से विचार-विमर्श करना चाहिए। निवेशकों को उस पैसे का भी शेयर बाजार में निवेश करने से बचना चाहिए, जिसकी उन्हें अलगे अगले 5 से 7 साल में जरूरत पड़ सकती है। बालाकृष्णन कहते हैं, 'अगर वह उस पैसे का निवेश कर रहे हैं, जिसकी उन्हें 2 से 3 साल बाद जरूरत पड़ेगी तो वे खुद को बाजारों की दया पर छोड़ रहे हैं।' शेयर बाजारों में उतरने से पहले निवेशकों को खुद को लंबी अवधि के लिए भावनात्मक रूप से तैयार कर लेना चाहिए, जब उनका निवेश ऋणात्मक प्रतिफल दिखा सकता है। उन्हें खुद को पूरी पूंजी के ही नुकसान जैसी स्थितियों के लिए खुद को तैयार करना चाहिए। शेयर बाजार में केवल उसी राशि का निवेश करना चाहिए, जो अगर डूब भी गई तो वे वित्तीय संकट में नहीं फंसेंगे। 
 
म्युचुअल फंडों में निवेश करते समय निवेशकों को यह सीखने का प्रयास करना चाहिए कि किस तरह फंडामेंटल के आधार पर शेयरों में निवेश किया जाए। शेयरों में सीधा निवेश केवल उन्हीं लोगों के लिए है, जो शेयरों के शोध के लिए समय, रुचि और झुकाव रखते हैं। थोड़ी राशि के निवेश से शुरुआत कीजिए और विशेषज्ञता और आत्मविश्वास हासिल होने पर निवेश और बढ़ाएं। 
 
जोखिम घटाने के उपाय 
 
नए निवेशकों को शुरुआत में ब्लूचिप शेयरों में निवेश करना चाहिए। स्टॉक एक्सचेंजों के कुल बाजार पूंजीकरण की करीब 12 से 13 फीसदी हिस्सेदारी खुदरा निवेशकों के पास है। आउटलुक एशिया कैपिटल के मुख्य कार्याधिकारी मनोज नागपाल कहते हैं, 'इस 12 से 13 फीसदी में 60 से 70 फीसदी निवेशक मिड और स्मॉल कैप शेयरों में है। हालांकि ये शेयर ज्यादा प्रतिफल देने की गुंजाइश रखते हैं, लेकिन ऐसा केवल तभी होता है जब सही शेयरों का चुनाव किया जाता है। गलत चयन करने पर आपको भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।'
 
नए निवेशक को ऐसी कंपनियों और क्षेत्रों से दूर रहना चाहिए, जिनके कारोबारी मॉडल को वह नहीं समझता हो। उदाहरण के लिए वह बैंकिंग क्षेत्र की तुलना में खपत आधारित क्षेत्रों में निवेश करना ज्यादा आसान होगा क्योंकि बैंकिंग क्षेत्र के बदलावों को समझना ज्यादा मुश्किल है। निवेशकों को भारी कर्ज वाली कंपनियों से भी बचना चाहिए। निवेशक शिक्षा कार्यक्रमों का आयोजन करने वाले मनी बी इंस्टीट्यूट के प्रबंध निदेशक आशुतोष वखारे कहते हैं, 'बड़ा गोता खाने वाले ज्यादातर शेयर कर्ज से दबी कंपनियों के होते हैं। कंपनी के कर्ज और इक्विटी अनुपात को देखना चाहिए।'नए निवेशकों को शुरुआत से ही यह रणनीति बनानी चाहिए कि वे कैसा पोर्टफोलियो बनाना चाहते हैं। नागपाल कहते हैं, 'पोर्टफोलियो में पर्याप्त शेयरों से समुचित विविधीकरण सुनिश्चित होता है। लेकिन पोर्टफोलियो में इतने अधिक शेयर भी नहीं होने चाहिए कि आप उन पर निगरानी ही नहीं रख पाएं। सभी क्षेत्रों और बाजार पूंजीकरण सेगमेंट में निवेश करें और यह सुनिश्चित करें कि आपके पास वैल्यू एवं ग्रोथ शेयरों का संतुलित मिश्रण है।' बालकृष्णन सलाह देते हैं कि नए निवेशकों को एक डायरी रखनी चाहिए, जिसमें उन्हें किसी शेयर मेंं निवेश की वजह लिखनी चाहिए। उन्हें यह पता लगाने के लिए समय-समय पर समीक्षा भी करनी चाहिए कि उनकी निवेश रणनीति उम्मीद के मुताबिक काम कर रही है या नहीं। 
 
उन्होंने कहा कि निवेशकों को कीमत लक्ष्य तय करने चाहिए, जिस पर उन्हें यह समीक्षा करनी चाहिए कि वे शेयर में बने रहें या बाहर निकल जाएं। उन्हें स्टॉप लॉस का स्तर भी निर्धारित करना चाहिए। इसका मतलब है कि अगर कीमत इससे नीचे गिरती है तो उन्हें शेयर बेच देना चाहिए। सीधे निवेश करने वाले निवेशकों को शेयरों के मूल्यांकन का ध्यान रखना चाहिए। राजा शेखरन कहते हैं, 'बहुत से निवेशकों को मासिक वेतन मिलता है और वे निवेशक को लेकर लालायित रहते हैं। लेकिन अगर वे सीधे निवेश कर रहे हैं तो उन्हें गिरावट का इंतजार करना चाहिए। ऐसा करने से लंबी अवधि में उनके प्रतिफल में काफी बढ़ोतरी होगी।'
Keyword: share, market, sensex, बीएसई, कंपनी, शेयर, पुनर्खरीद,
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