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कर अधिकारी गर पहुंच जाएं घर

संजय कुमार सिंह /  March 12, 2017

आयकर विभाग ने आय के बारे में पूछताछ के लिए 18 लाख लोगों को नोटिस भेजे हैं। अगर आपको भी नोटिस मिला है, लेकिन आप उन 11 लाख लोगों में शामिल हैं, जिन्होंने विभाग के ईमेल और एसएमएस का जवाब नहीं दिया है तो आप यूं ही नहीं बचेंगे। विभाग आपको एक बार फिर चि_ïी भेजेगा और अभी तक शायद यह चि_ïी आपके पते की ओर चल भी दी होगी। खबरों के मुताबिक इसी महीने कुछ और लोगों को भी सत्यापन के नोटिस भेजे जा सकते हैं। अगर आपके शुरुआती जवाब से आयकर विभाग संतुष्टï नहीं होता है तो आपको कर अधिकारी की तरफ से कुछ और सवालों का सामना करना पड़ सकता है और उनका जवाब भी हर हाल में देना पड़ेगा। ऐसी सूरत में यह बहुत जरूरी हो जाता है कि आपको इस बात की समझ हो कि यह सब पढऩे के बाद आपके लिए यह समझना बहुत जरूरी हो जाता है कि कर अधिकारी आपके जवाब की सत्यता का पता किस तरह लगाएंगे। यह भी पता होना चाहिए कि वे आपको कितना कुरेदेंगे और कौन-कोन से गड़े मुर्दे उखाड़ेंगे। आपको यह भी जानना चाहिए कि उनके सवालों के सही जवाब किस तरह दिए जाएंगे।

 
जवाब नहीं तो दिक्कत
 
यदि आपने नोटिस का जवाब दिया है और आकलन अधिकारी आपके जवाब से संतुष्टï है तो वह आपके मामले को 'स्वीकार्य' बनाएगा और मामले को बंद कर देगा। लेकिन यदि वह संतुष्टï नहीं हो तो वह अतिरिक्त जानकारी मांग सकता है, जिसे आप ऑनलाइन यानी इंटरनेट के जरिये भी भेज सकते हैं। अगर जानकारी पाने के बाद भी वह संतुष्टï नहीं होता है तो आपके मामले को 'अस्वीकार्य' की श्रेणी में डाला जा सकता है। इससे मामला सिस्टम्स निदेशालय के पास पहुंच जाएगा और हो सकता है कि वहां आपके मामले को संभावित कर चोरी का मामला मान लिया जाए और आगे की कार्रवाई की जाए।
 
आपको जो दूसरा नोटिस भेजा जा रहा है, अगर आप उसका जवाब तय समय के भीतर नहीं देते हैं तो आपको तगड़ा खमियाजा भुगतना पड़ सकता है। उस सूरत में अधिकारी स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस), वार्षिक सूचना रिटर्न (एआईआर) और केंद्रीय सूचना शाखा (सीआईबी) के अंतर्गत आपके संबंध में विभाग के पास उपलब्ध जानकारी का इस्तेमाल करेंगे। यदि व्यक्ति की जमा राशि उसके द्वारा जमा किए गए आयकर से मेल नहीं खाती है तो कर अधिकारी धारा 133 (6) के तहत कुछ और तथ्य हासिल कर सकते हैं। इसके लिए धारा 133ए के तहत जांच भी कराई जा सकती है या मामले को जांच प्रकोष्ठï के पास भेजा जा सकता है।
 
कैसे निपटें पूछताछ से
 
यदि आपको किसी प्रकार की कारोबारी आय नहीं होती है और आप नाबालिग नहीं हैं तो 2.5 लाख रुपये से अधिक की रकम जमा नहीं करने की सूरत में आपको किसी तरह की दरयाफ्त के लिए तलब नहीं किया जाएगा। 70 वर्ष से अधिक उम्र के करदाताओं के लिए नकद जमा की सीमा में राहत दी गई है ओर उनके लिए यह रकम बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी गई है।
 
यदि आपकी जमा 2.5 लाख रुपये से अधिक की है तो कर आकलन अधिकारी पिछले कुछ सालों में आपके द्वारा दाखिल किए गए आयकर रिटर्न खंगालेगा और देखेगा कि आपने उनमें अपनी कितनी आय दिखाई है। आप अपने बैंक खाते का स्टेटमेंट भी अधिकारी को सौंप सकते हैं। इससे भी पता चल जाएगा कि आपने कितनी नकद निकासी की है। उसे देखकर आकलन अधिकारी को यह जानने में सहूलियत होगी कि आपके द्वारा दिखाई गई जमा रकम सही है अथवा नहीं।
 
दूसरों से मिली रकम जमा
 
किसी की मां यह दावा कर सकती है कि उसके जो रकम जमा कराई है, वइ उसने अपने नौकरीपेशा बेटे से मिली रकम में से बचाई थी। पीडब्ल्यूसी इंडिया में पार्टनर और लीडर-पर्सनल टैक्स कुलदीप कुमार कहते हैं, 'आकलन अधिकारी आपके बेटे से इस भुगतान के बारे में पुष्टिï करने को कह सकता है। वह आपके बेटे द्वारा पिछले तीन साल में दाखिल किए गए रिटर्न पर भी नजर दौड़ा सकता है। इससे उसे पता चल जाएगा कि बेटे की आर्थिक स्थिति कैसी है। बेटा अपने बैंक खाते का स्टेटमेंट दिखा सकता है, जिससे साबित हो सकेगा कि उसने अपनी मां को देने के लिए खाते से रकम निकाली थी।'
 
गृहिणी भी यह दावा कर सकती है कि नोटबंदी के दौरान उसने जो रकम जमा कराई थी, वह पति से घरेलू खर्च के लिए मिले हुए पैसों में से बचाई गई थी। ऐसे में आकलन अधिकारी यह पता लगाएगा कि उस महिला का पति उसे कितनी रकम देता है। वह इस बात का अनुमान लगाने की कोशिश भी कर सकता है कि घर में कितना खर्च होता है। इसके बाद वह देखेगा कि उस महिला ने जो रकम जमा कराई है, वह घर खर्च के पैसों में से बचाई जा सकती है अथवा नहीं। कुमार कहते हैं, 'जांच-पड़ताल काफी हद तक जमा कराई गई रकम के इर्द-गिर्द ही घूमेगी। लब्बोलुआब यही है कि आकलन अधिकारी इस बात से संतुष्टï हो जाए कि वह रकम वैध स्रोत से आई है और उस पर कर चुकाया जा चुका है।'
 
नोटबंदी से पहले निकासी
 
अगर आप यह कह रहे हैं कि जमा कराई गई रकम वही है, जो आपने नोटबंदी से ऐन पहले अपने खाते से निकाली थी तो आपके बैंक खाते से इसकी गवाही मिलनी चाहिए। उस सूरत में आकलन अधिकारी खाते से रकम निकासी की तारीख और रकम की मात्रा का मिलान जमा की गई राशि से करने की कोशिश कर सकता है। आकलन अधिकारी को केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड से जो निर्देश मिले हैं, उनके मुताबिक रकम नोटबंदी से जितना पहले निकाली गई है, मामला उतना ही अधिक संदेहास्पद माना जाएगा। 
 
कृषि आय से नकदी
 
कोई शख्स यह दावा भी कर सकता है कि उसने जो रकम जमा कराई है, वह कृषि से होने वाली आय की है, जिस पर किसी तरह का कर नहीं लगता। लेकिन विश्लेषकों के मुताबिक आयकर विभाग यह पता लगाने के लिए गहन जांच कर सकता है कि उस व्यक्ति की आय वाकई कृषि से हुई है अथवा नहीं। इसका पता लगाने के लिए आकलन अधिकारी भू-राजस्व के रिकॉर्ड भी खंगाल सकता है ताकि देखा जा सके कि आपने कौन सी फसल बोई थी।
 
कुमार कहते हैं, 'इसका पता लगाने के लिए कर अधिकारी यह भी देख सकता है कि उस व्यक्ति की भूमि कितनी अधिक उपजाऊ है ताकि पता चल सके कि संबंधित भूमि से उतनी आय हो सकती है, जितनी का आपने दावा किया था या नहीं। इतना ही नहीं, वह व्यापारियों के पास जाकर दरयाफ्त भी कर सकता है कि आपने अपनी फसल उनके पास बेची थी या नहीं।'
 
कारोबारी जमा
 
यदि जमा कराई गई नकद राशि आयकर रिटर्न के मुताबिक 31 मार्च, 2016 को बची हुई नकदी से कम है तो किसी तरह की पूछताछ नहीं की जाएगी। लेकिन कारोबार मालिकों को पिछले वर्श के लिए दाखिल कराए गए रिटर्न में किसी तरह का बदलाव करने से परहेज ही करना चाहिए। क्लियरटैक्स डॉटकॉम में संपादक प्रीति खुराना का कहना है, 'यदि आप अपने रिटर्न को संशोधित करते हैं तो कर अधिकारी गौर से उसकी पड़ताल कर यह देखेगा कि आपने क्या बदलाव किया है। फिलहाल अपने टैक्स रिटर्न में बदलाव की कोशिश न करें क्योंकि इससे आप शक के घेरे में आ जाएंगे।' 
 
कुछ व्यवसायी अप्रैल से सितंबर के रिकॉर्ड में फेरबदल करने की कोशिश कर सकते हैं। कर अधिकारी इस साल अप्रैल से सितंबर के बीच के बिक्री आंकड़ों का मिलान पिछले साल हुई बिक्री से करेगा। अगर बिक्री में बड़ा अंतर दिखता है तो उसका शक बढ़ जाना लाजिमी है। उस सूरत में वह खरीदारी और भंडारण के साथ भी बिक्री की तुलना कर सकता है। इनमें किसी तरह की गड़बड़ी से आपकी मुश्किल बढ़ सकती है। 
 
तोहफा मिला हो तो
 
यदि आप दावा करते हैं कि आपको यह रकम या सामान तोहफे में मिला था तो कर अधिकारी यह पता लगाने में जुट जाएगा कि आपने उपहार पर कर अदा किया है या नहीं। नियमों के मुताबिक 50,000 रुपये से अधिक कीमत का तोहफा कर के दायरे में आता है। खुराना का कहना है, 'संबंधियों से मिला उपहार कर मुक्त है।' वैध करदाताओं को उचित कागजात एकत्रित करने और अपने दावों की पुष्टिï के लिए प्रमाण के तौर पर इन्हें मुहैया कराने की जरूरत है। यदि इनके स्पष्टïीकरण की जांच हो जाती है तो मामला बंद हो जाएगा। मुंबई के वित्तीय योजनाकार अर्णव पंड्ïया का कहना है, 'यदि आप अपने नकद जमा के स्रोत के बारे में स्पष्टïीकरण देने में विफल रहते हैं तो आपको 'प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना' के तहत उपलब्ध आखिरी विकल्प का इस्तेमाल करना चाहिए जो 31 मार्च तक खुला हुआ है।' 
Keyword: income tax, CBDT, आयकर विभाग कराधान,
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