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मुनाफे के लिए इन बैंकों पर लगाएं दांव

हंसिनी कार्तिक /  March 12, 2017

नोटबंदी के बाद बाजार अनुमानों को पीछे छोड़ते हुए पांच छोटे निजी बैंकों ने एक बार फिर से अपनी लोकप्रियता कायम की है। हालांकि सेक्टर में समेकन से संबंधित किसी भी खबर से इन शेयरों में बदलाव देखा जाता है, पर निवेशकों को हाल के वर्षों में इनके मजबूत आधार को ध्यान में रखकर इन पर विचार करना चाहिए। इस सेक्टर में जहां बड़े बैंकों को भी अपना शुद्घ ब्याज मार्जिन (एनआईएम) 3 फीसदी से ऊपर बनाए रखने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है वहीं इन छोटे बैंकों के लिए यह कठिन कार्य साबित नहीं हुआ है। यहां ऐसे पांच बैंकों पर विस्तार से प्रकाश डाला जा रहा है जिन्हें निवेशक अपने पोर्टफोलियो में नमूने के तौर पर शामिल कर सकते हैं।

 
सिटी यूनियन बैंक
 
यह सबसे पुराने निजी क्षेत्र के बैंकों में शामिल है और इसकी पकड़ दक्षिण में, खासकर तमिलनाडु में मजबूत बनी हुई है। यही वजह है कि अपने ऋण का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा छोटे एवं मझोले उद्योगों (एसएमई) से जुड़े होने के बावजूद यह दूसरे बैंकों के मुकाबले परिसंपत्ति गुणवत्ता चुनौतियों का बेहतर ढंग से प्रबंधन करने में सक्षम रहा है। बैंक की अधिक परिपक्वता अवधि वाली जमाएं रिटेल-केंद्रित (छोटे जमाकर्ताओं की अधिक भागीदारी) हैं। बैंक को दो कारकों की वजह से अपने एनआईएम को तीन फीसदी से ऊपर बनाए रखने में मदद मिली है। हालांकि एनआईएम पर कुछ अल्पावधि दबाव की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि जमाएं पूर्व की ऊंची दरों से संबंधित हैं। मार्जिन पर दबाव में अन्य स्रोतों से जमाओं की लागत में कमी आने से कुछ हद तक नरमी आएगी। इलारा कैपिटल के विश्लेषकों ने हाल में सिटी यूनियन की रेटिंग को 'बिकवाली' के बजाय 'खरीदें' कर दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि बैंक वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान 16 प्रतिशत से अधिक का आरओई (पूंजी पर प्रतिफल) हासिल करने की स्थिति में है। 
 
डीसीबी बैंक
 
एक साल पहले, जब बैंक ने अपने महत्त्वाकांक्षी विस्तार लक्ष्य की घोषणा की थी तो बाजार में ज्यादा बदलाव नहीं दिखा था। लेकिन डीसीबी द्वारा शाखाओं का लगातार विस्तार किए जाने के बाद निराशा घटी है। बहीखाते में मॉर्गेज ऋणों की 44 फीसदी की भागीदारी के साथ बैंक मुख्य तौर पर वाणिज्यिक उधारी पर ध्यान दे रहा है। अपनी अंडरराइटिंग क्षमता से भी बैंक को इस सेगमेंट में अपने प्रतिस्पर्धियों की तुलना में आगे बने रहने में मदद मिली है। चूक की कम दर (1.9 फीसदी) और शुद्घ गैर-निष्पादित आस्तियों का अनुपात (1.1 फीसदी) भी महत्त्वपूर्ण है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के विश्लेषकों ने डीसीबी के लिए उसकी मजबूत व्यावसायिक वृद्घि, विविधीकृत ऋण बुक और सक्षम प्रबंधन की वजह से 'खरीदारी' रेटिंग दी है। यह शेयर अपने लक्षित भाव के नजदीक है और निवेशक गिरावट पर इसे खरीद सकते हैं।
 
फेडरल बैंक
 
विविधीकृत ऋण बुक लाभदायक है। कॉरपोरेट और रिटेल (लोगों के) खातों के लिए उधारी की उचित भागीदारी के साथ बैंक की ऋण वृद्घि को लेकर हाल के समय में कोई समस्या नहीं दिखी है। दिसंबर तिमाही (नोटबंदी से प्रभावित) में भी बैंक की ऋण बुक में 32 प्रतिशत का इजाफा दर्ज किया गया। इसकी एसएमई और कॉरपोरेट ऋण बुक मजबूत बनी रही और प्रबंधन को निकट भविष्य में इन पोर्टफोलियो पर किसी तरह के दबाव की आशंका नहीं दिख रही है। जहां मजबूत परिसंपत्ति गुणवत्ता ने फेडरल को आकर्षक बना दिया है वहीं उसे अच्छी ऋण वृद्घि से भी आय में तेजी दर्ज करने में मदद मिलनी चाहिए। प्रभुदास लीलाधर के विश्लेषकों ने वित्त वर्ष 2018-19 में प्रति शेयर आमदनी (ईपीएस) 28-35 फीसदी तक बढऩे का अनुमान जताया है। 
 
करूर वैश्य बैंक
 
अद्र्घ-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी मजबूत उपस्थिति वाले इस बैंक को दिसंबर तिमाही में दबाव का सामना करना पड़ा है। शुद्घ ब्याज आय में 15 प्रतिशत की वृद्घि के बावजूद, बैंक को सपाट ऋण वृद्घि की वजह से गैर-ब्याज आय में भारी गिरावट का सामना करना पड़ा और इससे दिसंबर तिमाही में उसका शुद्घ लाभ भी प्रभावित हुआ। इस सबके बावजूद विश्लेषक करूर वैश्य बैंक (केवीबी) को लेकर आश्वस्त बने हुए हैं। मुख्य रूप से बैंक द्वारा एनआईएम को 3.5 फीसदी से ऊपर बनाए रखने की वजह से विश्लेषक सकारात्मक बने हुए हैं। परिसंपत्ति गुणवत्ता से जुड़ी चिंताओं की वजह से निवेशकों को किसी बड़े सकारात्मक बदलाव की उम्मीद नहीं दिख रही है। यही वजह है कि शेयर वित्त वर्ष 2018 के प्राइस-टु-बुक अनुपात के 1.8 गुना पर कारोबार कर रहा है जो उसके प्रतिस्पर्धियों की तुलना में कम है। रिटेल व्यवसाय बढ़ाए जाने पर ध्यान केंद्रित करने और बडे कंसोर्टियम ऋणों से दूर बने रहने की वजह से ऐंटीक स्टॉक ब्रोकिंग के विश्लेषकों ने केवीबी के लिए 'खरीदारी' रेटिंग दी है। 
 
आरबीएल बैंक
 
अपनी ऋण बुक में वाणिज्यिक ऋणों का 62 प्रतिशत योगदान होने के बावजूद आरबीएल अपनी परिसंपत्ति गुणवत्ता के मोर्चे पर सक्षम बना हुआ है। इस मोर्चे पर बैंक को कार्यशील पूंजी ऋणों पर ध्यान केंद्रित करने से मदद मिली है। बैंक दिसंबर तिमाही में अपना एनआईएम बढ़ाकर 3.5 फीसदी पर पहुंचाने में सफल रहा। खुदरा ऋण बुक में विस्तार किया जा रहा है और बैंक अपने शाखा नेटवर्क को भी दुरुस्त बना रहा है। इन सब बदलावों से शेयर को मजबूत मूल्यांकन बरकरार रखने में मदद मिलेगी और निवेशक गिरावट पर खरीदारी कर सकते हैं। 
Keyword: bank, loan, debt, भारतीय रिजर्व बैंक नोटबंदी,
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