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एनपीए पर माथापच्ची करेंगे जेटली-पटेल

अरूप रॉयचौधरी और अनूप रॉय / नई दिल्ली/मुंबई 03 10, 2017

एनपीए पर अलग बैंक बनाने पर होगी चर्चा

एएमसी के संभावित ढांचे पर हो सकती है चर्चा
विरल आचार्य के प्रस्ताव पर सरकार कर सकती है विचार

फंसे कर्ज (एनपीए) के बढ़ते बोझ के मुद्दे पर वित्त मंत्री अरुण जेटली रिजर्व बैंक के गवर्नर ऊर्जित पटेल और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। इसमें संपत्ति प्रबंधन कंपनी (एएमसी) की रूपरेखा पर भी चर्चा होने की संभावना है जो एनपीए की जिम्मेदारी संभालेगी। इसके अलावा बैंकों का कर्ज कम करने के उपायों पर भी चर्चा होगी। वित्त मंत्रालय और आरबीआई के सूत्रों से बिज़नेस स्टैंडर्ड को मिली जानकारी के मुताबिक बैठक में बैंकों के नुकसान सहने की क्षमता और मौजूदा पुनॢनर्माण कंपनियों की स्थिति पर भी चर्चा होगी। यह बैठक वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये होगी और इसमें ऊर्जित पटेल के अलावा सभी डिप्टी गवर्नर हिस्सा लेंगे। 

एएमसी का ढांचा मोटे तौर पर उसी तरह का रहने का अनुमान है जैसे डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने सुझाया था। वैसे आरबीआई और वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग के अधिकारी इसके संभावित ढांचे पर काम कर रहे हैं। एक बात यह है कि यह कंपनी पूरी तरह केंद्र सरकार के स्वामित्व वाली नहीं होगी। सूत्रों का कहना है कि शेयरहोल्डिंग ढांचे के संदर्भ में दो प्रस्तावों पर विचार चल रहा है। पहले प्रस्ताव के मुताबिक इस कंपनी में 49 फीसदी केंद्र सरकार की हिस्सेदारी होगी जबकि बाकी हिस्सेदारी निजी फंडों और निवेशकों की होगी। यह ढांचा नैशनल इन्वेस्टमेंट ऐंड इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड (एनआईआईएफ) की तरह है। दूसरे प्रस्ताव में एनआईआईएफ का दायरा बढ़ाकर एनपीए को उसमें शामिल करने का है। 

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'इन दोनों प्रस्तावों के बारे में एक प्रस्तुतिकरण तैयार किया जा रहा है जिसे वित्त मंत्री और गवर्नर के समक्ष रखा जाएगा। अगर वे इस पर कोई फैसला लेते है तो फिर इसे प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजा जाएगा।' दिसंबर 2016 तक बैंकों का कुल एनपीए 6 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा था। आचार्य ने फंसे कर्ज की समस्या से निपटने के लिए दो एएमसी के गठन का प्रस्ताव रखा था। इनमें से एक निजी होगी और दूसरी अद्र्घसरकारी। निजी कंपनी ऐसे मामलों से निपटेगी जिन्हें जल्दी से जल्दी सुलझाया जा सकता है। इसी तरह अद्र्घ सरकारी कंपनी ऐसे मामलों को देखेगी जहां लंबा समय लगने की संभावना है। आरबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आचार्य के सुझाव जेटली को सही लगे और उन्होंने इस पर गंभीर चर्चा करने को कहा।
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