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'यूपी चुनावों को मद्देनजर रखते हुए आए जीडीपी के आंकड़े'

अमित अग्निहोत्री / नई दिल्‍ली 03 08, 2017

बीएस बातचीत

वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने 7.1 फीसदी सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के सरकार के ताजा आंकड़े पर सवाल उठाया है। उन्होंने अमित अग्निहोत्री को साक्षात्कार में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में फायदा हासिल करने के लिए ये आंकड़े जारी किए हैं क्योंकि वह राज्य में नोटबंदी के असर को लेकर चिंतित हैं।

सरकार द्वारा जारी आंकड़ों में कहा गया है कि इस वित्त वर्ष में जीडीपी वृद्धि 7.1 फीसदी रहेगी। यह कांग्रेस के रुख के बिल्कुल विपरीत है, जिसने कहा है कि नोटबंदी से अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होगी। इस बारे में आपका क्या राय है? 
केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (सीएसओ) ने 7.1 फीसदी जीडीपी का आंकड़ा जारी किया है, लेकिन उसने यह भी कहा है कि असली तस्वीर और आंकड़े उपलब्ध होने पर एक साल बाद प्राप्त होगी। अभी ग्रामीण क्षेत्र के आंकड़े संग्रहित नहीं किए गए हैं, जहां नकद लेनदेन सबसे अधिक होता है।

ऐसे में सरकार कैसे 7.1 फीसदी जीडीपी वृद्धि का दावा कर सकती है? आपको ऐसा क्यों लगता है कि सरकार ऐसा करेगी?
देश के महत्त्वपूर्ण राज्य उत्तर प्रदेश में चुनाव जीतने के लिए। मेरा मानना है कि सरकार ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए जीडीपी का आंकड़ा जारी किया। लेकिन मैं यह कहना चाहूंगा कि आज भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सबसे ज्यादा नकदी रखने वाली पार्टी है। इसे उत्तर प्रदेश का दौरा कर देखा और महसूस किया गया है, जहां भाजपा के उम्मीदवार पैसे को पानी की तरह खर्च करते रहे। इससे ऐसा लगता है कि उत्तर प्रदेश में नोटबंदी का कोई असर नहीं पड़ा।

क्या इससे सीएसओ की प्रतिष्ठा पर कोई असर पड़ेगा?
देखिए, नोटबंदी के बाद लोगों ने भारतीय रिजर्व बैंक पर संदेह करना शुरू कर दिया है। अब उनके लिए सीएसओ पर भी भरोसा करना मुश्किल हो जाएगा। अगर सरकार सही आंकड़़े एकत्रित नहीं कर सकती तो उसकी नीतियां सही नहीं हो सकतीं। यह बुनियादी चीज को सरकार को समझना चाहिए।

आप नोटबंदी के धुर विरोधी क्यों हैं?
पहला, यह स्वतंत्र भारत के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला है। हम जानते हैं कि नोटबंदी की वजह से 15.45 लाख करोड़ रुपये के नोट चलन से बाहर कर दिया गया। मीडिया रिपोर्टों से हमें यह भी पता चला है कि करीब 14.97 लाख रुपये बैंकों में वापस आ गए हैं। काले धन पर रोक और ऐसे धन के पैदा होने पर रोक के सरकार के दावे का क्या हुआ? हम जानते हैं कि जब आम आदमी अपना पैसा निकालने के लिए बैंकों के सामने लंबी कतारों में लगा हुआ था, तब कुछ प्रभावशाली लोगों के पास नए नोटों के बंडल थे। हम जानते हैं कि नोटबंदी के बाद एक हाथ से दूसरे हाथ में गया है और बैंकों ने अपने राजनीतिक स्वामियों के निर्देश पर कुछ लोगों को खुश किया है। हम जानते हैं कि जो कोई अपने पुराने नोटों को बदलवाना चाहता था, वह ब्रोकरों को 20 से 50 फीसदी कमीशन देकर ऐसा कर सकता था। मेरा मानना है कि केवल संयुक्त संसदीय समिति की जांच से ही नोटबंदी का पूरा मामला साफ हो पाएगा।

आपके नजरिये से नोटबंदी के क्या दुष्प्रभाव हुए हैं?
इसने गरीब को और गरीब बना दिया। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछना चाहूंगा कि अगर नोटबंदी इतना बड़ा फैसला था तो उन्होंने उत्तर प्रदेश में प्रचार के दौरान इसका जिक्र क्यों नहीं किया। उन्होंने अपने इस महान काम के बारे में लोगों को क्यों नहीं बताया? नोटबंदी से गोवा में पर्यटन और खनन उद्योग पर बुरा असर पड़ा है और 11 मार्च को राज्य के विधानसभा चुनावों के नतीजे नोटबंदी का असर दिखाएंगे। इसी तरह उत्तर प्रदेश के कानपुर एवं मुरादाबाद और पंजाब के लुधियाना जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में लघु उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। प्रधानमंत्री 2014 में सत्ता में आने के बाद से झूठ फैला रहे हैं। 2019 में हम सब कुछ ठीक कर देंगे।

इसलिए क्या यह कह रहे हैं कि उत्तर प्रदेश को लेकर भाजपा चिंतित है?
अगर नहीं तो मोदी का मंत्रिमंडल वाराणसी में क्यों प्रचार में जुटा रहा? अगर प्रधानमंत्री इतने ही लोकप्रिय हैं तो उन्हें अपने संसदीय क्षेत्र और राज्य में वरिष्ठ मंत्रियों को भेजने और भाजपा के लिए वोट मांगने की जरूरत क्यों पड़ी? वाराणसी में गंगा नदी प्रदूषित है और उन्होंने इसके बारे में बहुत बातें की हैं। उनका विकास का गुजरात मॉडल कहां गया, जो वह मुख्यमंत्री के रूप में बेचा करते थे?

क्या सरकार ने अर्थव्यवस्था को ठीक से संभाला है?
किसी भी अर्थव्यवस्था की वृद्धि का सबसे अच्छा संकेतक रोजगार सृजन है। प्रधानमंत्री ने हर साल 2 करोड़ रोजगार का वादा किया था, लेकिन श्रम मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि महज 1,35,000 रोजगार अवसरों का सृजन हुआ है। इससे नोटबंदी के बाद अर्थव्यवस्था की असफलता का पता चलता है। सरकार आर्थिक वृद्धि की कहानी को बेचने के लिए ज्यादा कर संग्रहण का हवाला दे रही है, लेकिन गैर-सब्सिडीयुक्त गैस सिलिंडरों की कीमतें बढ़ाने में दोबारा नहीं सोचती है। वे आम लोगों पर कर बढ़ाकर संग्रहित पैसे को भारत की आर्थिक वृद्धि के रूप में पेश कर रहे हैं। यह अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा अदूरदर्शी नजरिया है। प्रधानमंत्री एक तरफ गरीबों की बात करते हैं। दूसरी ओर एक ही बार में एलपीजी सिलिंडर के दाम 86 रुपये बढ़ा देते हैं। यह देश के इतिहास में अप्रत्याशित है। सितंबर 2016 में गैर-सब्सिडी वाले गैस सिलिंडर के दाम 466 रुपये थे, जो अब बढ़कर 737 रुपये हो गए हैं। इससे 271 रुपये या 58 फीसदी बढ़ोतरी का पता चलता है। क्या आप देश के गरीबों के साथ ऐसा बरताव करने जा रहे हैं?

लेकिन मोदी ने नोटबंदी के असर पर अर्थशास्त्रियों की राय का जवाब देते हुुए कहा है कि उनकी कड़ी मेहनत रंग लाई है। इस पर आपकी टिप्पणी।
जाने-माने अर्थशास्त्रियोंं पर निशाना साधकर मोदी असलियत को नहीं छुपा सकते। उन्होंने नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अमत्र्य सेन सहित नोटबंदी के आलोचकों का मजाक उड़ाया है। सत्यता यह है कि अयोग्यता और कुप्रशासन उनकी कार्यशैली का हॉलमार्क बन गए हैं।

दिल्ली यूनिवर्सिटी में छात्र समूहों में हाल के विवाद पर आपकी क्या राय है?
मेरा मानना है कि विश्वविद्यालय और कॉलेज शिक्षा हासिल करने की जगह हैं। ऐसे मुद्दे उन्हें बंजर रेगिस्तान बना देंगे। मेरा मानना है कि भाजपा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को देशभर के परिसरों में हिंसा भड़काने के लिए संरक्षण दे रही है। हम ऐसा पहले जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में देख चुके हैं और अब यह डीयू के एक कॉलेज में हो रहा है।

बहुत से मौकों पर प्रधानमंत्री भाजपा के कांग्रेस-मुक्त अभियान का जिक्र करते हैं। क्या यह चिंता का विषय है?
भारत कभी कांग्रेस-मुक्त नहीं हो सकता क्योंकि यह पार्टी संविधान पर आधारित है। कांग्रेस की विचारधारा संविधान के मूलभूत सिद्धांतों पर आधारित है। समावेशी और धर्मनिरपेक्ष भारत संविधान का मूलाधार है। यह हकीकत है कि भाजपा का विभाजनकारी एजेंडा असहिष्णु भारत है, जिसमें अन्य व्यक्ति की कोई प्रासंगिकता नहीं है।

Keyword: उत्तर प्रदेश चुनाव, जीडीपी, कपिल सिब्बल, नोटबंदी, सीएसओ, साक्षात्‍कार, ग्रामीण क्षेत्र,
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