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'कम समय में पीएसयू हों सूचीबद्ध'
पवन बुरुगुला / मुंबई March 08, 2017

सरकारी कंपनियों को समयबद्ध तरीके से सूचीबद्ध कराने का मकसद पूरा करने के लिए केंद्र सरकार बाजार नियामक सेबी को पेशकश दस्तावेज की जल्द से जल्द मंजूरी देने की खातिर पत्र लिखने की योजना बना रही है। सेबी आंरभिक सार्वजनिक निर्गम के दस्तावेज को मंजूरी देने में औसतन दो महीने से ज्यादा का वक्त लेता है। केंद्र चाहता है कि पीएसयू के आईपीओ को एक महीने में मंजूरी दे दी जाए।
 
यह कदम बजट में पीएसयू की सूचीबद्धता का काम तेज गति से कराने के संबंध में हुई घोषणा की पृष्ठभूमि में उठाया जाएगा। दिलचस्प रूप से सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) ने एक दस्तावेज में पीएसयू को सूचीबद्ध कराने की खातिर सेबी की मंजूरी पाने के लिए 30 दिन की नई समयसीमा को रेखांकित किया है। दीपम का मानना है कि पूरी प्रक्रिया 165 दिन के भीतर पूरी की जा सकती है।
 
इस प्रगति के बारे में एक सूत्र ने कहा, सेबी की मंजूरी किसी कंपनी को सूचीबद्ध कराने की समयसीमा के निर्धारण के लिए अहम है। केंद्र मंजूरी प्रक्रिया में तेजी चाहता है और इसने खुद ही 30 दिन के भीतर पेशकश दस्तावेज की मंजूरी का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय कर दिया है। सेबी व दीपम के अधिकारियों के बीच शुरुआती स्तर पर इस संबंध में बातचीत हुई है। दीपम ने तैयारी व मसौदा विवरणिका जमा कराने के लिए 90 दिन का वक्त तय किया है। सेबी से मंजूरी के बाद सार्वजनिक पेशकश एक महीने के भीतर सामने रखी जा सकती है। खेतान ऐंड कंपनी के पार्टनर सुधीर बस्सी ने कहा, समयसीमा तय करना दीपम की तरफ से बढिय़ा पहल है क्योंकि इससे विभिन्न पीएसयू समय से सूचीबद्ध हो पाएगी। नई व्यवस्था से इसमें शामिल सभी हितधारकों के बीच बेहतर सामंजस्य बनाने में मदद मिलेगी।
 
हालांकि निवेश बैंकरों का एक वर्ग मान रहा है कि दीपम की तरफ से सेबी से एक महीने के भीतर मंजूरी की उम्मीद काफी महत्वाकांक्षी है। एक निवेश बैंकर ने कहा, तय की गई सीमा में काम पूरा करना मुश्किल है। किसी पेशकश दस्तावेज की जांच में सेबी को कम से कम 20 दिन लग सकता है और अगर इसे लगता है तो वह स्पष्टीकरण मांग सकता है। बैंकरों ने यह भी सुझाव दिया कि सेबी को पीएसयू के दस्तावेजों को तेजी से मंजूरी देने के लिए औपचारिक तौर पर कहने के बजाय इस अपवाद को नियमों में शामिल किया जा सकता है। कीनोट कॉरपोरेट सर्विसेज के चेयरमैन मधु प्रसाद ने कहा, मुझे नहीं लगता कि सरकार प्रवर्तित कंपनियों के विशेष रियायत देने में सेबी को कोई समस्या होगी। इन प्रावधानों से पीएसयू की तेजी से सूचीबद्ध कराने में मदद मिलेगी। इन अपवादों को सेबी के आईसीडीआर नियमन के सेक्शन 26 (1), (2) और (3) में शामिल किया जा सकता है।
Keyword: share, market, sensex, बीएसई, कंपनी, शेयर, बाजार नियामक सेबी,
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