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डिजिटल लेनदेन की निरंतरता ही नोटबंदी की वास्तविक सफलता
दिल्ली डायरी
ए के भट्टाचार्य /  March 08, 2017

फिलहाल हमारे पास दो तरह के आंकड़े मौजूद हैं जिनके आधार पर देश में आर्थिक गतिविधियों की गति और उनके रुख पर नोटबंदी के असर का आकलन किया जा सकता है। वर्ष 2016-17 के लिए राष्ट्रीय आय के दूसरे अग्रिम अनुमान केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने गत सप्ताह जारी किए। उससे कुछ अरसा पहले भारतीय रिजर्व बैंक ने बीते कुछ महीनों में लेनदेन के रुख पर अपने आंकड़े प्रस्तुत किए थे। दोनों ही आंकड़े न केवल नोटबंदी के बाद के पिछले कुछ महीनों का लेखाजोखा प्रस्तुत करते हैं, बल्कि अधिक महत्त्वपूर्ण बात यह है कि इनमें आने वाले कुछ महीनों की आर्थिक गतिविधियों के रुख और रुझान के बारे में भी बताया गया है। 

 
जिन लोगों की दलील है कि चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में देश की अर्थव्यवस्था के किसी भी क्षेत्र पर नोटबंदी का कोई नकारात्मक असर नहीं हुआ उनको विनिर्माण और अचल संपत्ति क्षेत्र के आंकड़ों पर नजर डालनी चाहिए। विनिर्माण क्षेत्र जो काफी हद तक नकदी की उपलब्धता और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों पर निर्भर करता है, उसने वर्ष की पहली तिमाही में 1.7 फीसदी की दर से वृद्घि हासिल की। सितंबर 2016 में समाप्त हुई दूसरी तिमाही में वृद्घि दर बढ़कर 3.4 फीसदी हो गई। परंतु तीसरी तिमाही में देश की कुल नकदी का 86 फीसदी चलन से बाहर कर दिया गया। इस तिमाही में विनिर्माण क्षेत्र की वृद्घि 2.7 फीसदी दर्ज की गई।
 
अचल संपत्ति क्षेत्र के आंकड़े वित्तीय श्रेणी के साथ आते हैं। वे आंकड़े यह भी बताते हैं कि सितंबर से दिसंबर तिमाही के दौरान वृद्घि दर में 3.1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। उससे पहले की दो तिमाहियों में इस क्षेत्र ने अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की थी। अप्रैल से जून तिमाही में 8.7 फीसदी और जुलाई से सितंबर तिमाही में 7.6 फीसदी की वृद्घि दर मिली। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि यह गिरावट इसलिए हो सकती है क्योंकि नए अचल संपत्ति कानून को लेकर अनिश्चितता का माहौल रहा है कि वह गतिविधियों को धीमा कर सकता है। अगर ऐसा होता है तो वर्ष की चौथी तिमाही में अचल संपत्ति क्षेत्र की वृद्घि में 5.9 फीसदी का नाटकीय सुधार कैसे होगा? निश्चित तौर पर विनिर्माण क्षेत्र में भी चौथी तिमाही में सुधार आने की संभावना है। पूरे वर्ष के राष्ट्रीय आय के दूसरे अग्रिम अनुमान के मुताबिक जनवरी-मार्च तिमाही में इसके 4.8 फीसदी की दर से बढऩे की उम्मीद जताई गई। पुनर्मुद्रीकरण की मौजूदा गति से देखा जाए तो यह मानने की पर्याप्त वजह है कि विनिर्माण और अचल संपत्ति के क्षेत्र में आगे उच्च वृद्घि दर आएगी। 
 
इसके साथ ही इस बात की भी पुष्टिï होगी कि नोटबंदी ने इन दोनों क्षेत्रों पर कम से कम पहले छह सप्ताह तक तो कोई असर नहीं डाला। परंतु विनिर्माण क्षेत्रों और निजी खपत की बात करें तो तीसरी तिमाही को लेकर पहेली बरकरार है। इनमें क्रमश: 8.3 फीसदी और 10.1 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। नोटबंदी के बाद तमाम आर्थिक गतिविधियों में गिरावट के बीच इस गतिविधि में तेजी की एक वजह यह भी रही कि इसने अर्थव्यवस्था को औपचारिक बनाने में मदद की। इसके चलते औपचारिक अर्थव्यवस्था में नए कारोबारी शामिल हुए और कर दायरे में भी। इनकी वजह से वृद्घि दर में सुधार हुआ। 
 
अब चिंता की बात यह है कि पुनर्मुद्रीकरण का काम पूरे जोर पर है। आर्थिक गतिविधियां जो काफी हद तक औपचारिक हो गई थीं वे एक बार फिर नकदी पर स्थानांतरित हो सकती हैं। निश्चित तौर पर चौथी तिमाही के अनुमानित आंकड़े विनिर्माण और निजी खपत की वृद्घि दर दोनों में क्रमश: 6.8 फीसदी और 6.5 फीसदी की गिरावट दर्शा रहे हैं। अगर यह आकलन सही है तो यह दुर्भाग्यपूर्ण होगा क्योंकि नोटबंदी की मदद से देश की अर्थव्यवस्था को डिजिटल बनाने के लाभ हासिल नहीं हो पाएंगे। 
 
इस डर को अतिरंजित भी नहीं माना जा सकता है। आरबीआई के आंकड़े बताते हैं कि फरवरी में रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट यानी आरटीजीएस के जरिये होने वाला वित्तीय लेनदेन नोटबंदी के ठीक पहले वाले महीने यानी अक्टूबर की तुलना में कमतर रहा। हालांकि नैशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रंासफर (एनईएफटी) और क्रेडिट कार्ड तथा पीओएस मशीन के जरिए होने वाले लेनदेन में इजाफा जारी रहा। इस बीच मोबाइल से होने वाले भुगतान में भी गिरावट आई है। 
 
बहरहाल अच्छी खबर यह है कि देश में प्वाइंट ऑफ सेल यानी पीओएस मशीनों की संख्या अक्टूबर के 15 लाख से बढ़कर जनवरी के अंत में 20 लाख हो गई जबकि डेबिट कार्ड की संख्या भी इस अवधि में 73.9 करोड़ से बढ़कर 81.8 करोड़ हो गए। क्रेडिट कार्ड की तादाद भी इस अवधि में 2.7 करोड़ से बढ़कर 2.9 करोड़ हो गई। संक्षेप में कहा जाए तो डिजिटल लेनदेन का दायरा इतना विस्तारित हो चुका है कि पुनर्मुद्रीकरण के पूरी गति पकड़ लेने के बाद भी हालात में बहुत अधिक बदलाव आता नहीं नजर आता। सरकार को अब दोबारा पूरा ध्यान डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने पर लगा देना चाहिए। अगर वह ऐसा कर पाती है तो कहा जा सकता है कि नोटबंदी की यह एक वास्तविक उपलब्धि रही जिसका लाभ देश की अर्थव्यवस्था को हासिल हुआ।
Keyword: digital, डिजिटल भुगतान, अर्थव्यवस्था,
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