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2020 तक सोने की मांग 850 टन पार!
दिलीप कुमार झा / मुंबई March 08, 2017

सरकार द्वारा सोने की खरीदारी के संदर्भ में पारदर्शिता लाने के लिए उठाए गए कई कदमों से तीन साल बाद भारत में सोने की मांग में फिर से मजबूती आने की संभावना है। वैश्विक उद्योग संगठन विश्व स्वर्ण परिषद (डब्ल्यूजीसी) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में अनुमान व्यक्त किया है कि भारत की स्वर्ण मांग 2020 तक 850-950 टन के दायरे में रह सकती है। सोने के प्रति उपभोक्ताओं का लगाव बरकरार रहने की वजह से इस धातु की मांग में सुधार देखा जा सकता है। हालांकि चालू कैलेंडर वर्ष के लिए डब्ल्यूजीसी ने भारत में सोने की मांग 650-750 टन के दायरे में रहने का अनुमान जताया है। संभवत: भारत की स्वर्ण मांग अगले तीन साल के लिए 850 टन से नीचे बनी रह सकती है। भारतीय निवेशकों के समक्ष कई तरह की समस्याओं की वजह से देश में सोने की मांग 21 फीसदी तक घटकर 676 टन रह गई है जो सात वर्षों में सबसे कम है। हालांकि आभूषण कारोबारी आने वाली तिमाहियों में आभूषण मांग में तेजी की संभावना जता रहे हैं।
 
डब्ल्यूजीसी में मार्केट इंटेलीजेंस के निदेशक एलिस्टेयर हेविट ने बुधवार को जारी रिपोर्ट में कहा, 'भारत में सोने की मांग हाल के समय में तेजी से घटी, लेकिन बाद में इसमें सुधार दिखा है। सोने पर सख्ती के लिए अधिकारियों द्वारा पूर्व में किए गए प्रयास विफल साबित हुए हैं। भारतीय समाज में सोने के प्रति अटूट लगाव रहा है।' विभिन्न पहलुओं पर विचार करने से यह संकेत मिलता है कि जहां मांग में सुधार आने की संभावना है वहीं 2017 के लिए हमारा नजरिया सतर्क बना हुआ है। इसलिए, हम उम्मीद कर रहे हैं कि उपभोक्ता 650 टन और 750 टन के बीच खरीदारी करेंगे। हमारा मानना है कि आर्थिक वृद्घि और भारत के स्वर्ण बाजार में पारदर्शिता से मांग मजबूत होगी। वर्ष 2020 तक, हम भारतीय उपभोक्ताओं द्वारा 850-950 टन के बीच खरीदारी की उम्मीद कर रहे हैं।'
 
वर्ष 2016 के चुनौतीपूर्ण के दौरान भारत के स्वर्ण बाजार को कई समस्याओं का सामना करना पड़ा। साथ ही पिछले साल क्रियान्वित हुई कुछ नीतियों से भी दबाव पैदा हुआ। उद्योग को 2017 में भी संघर्ष से जूझना होगा। जहां 300,000 रुपये से अधिक के नकद लेनदेन पर प्रतिबंध से भारतीय मांग प्रभावित हो सकती है, वहीं वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से अल्पावधि में उद्योग पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है, 'पिछले साल भारी गिरावट के बाद, सोने की मांग में अब बहुत ज्यादा कमी आने की आशंका नहीं है। संबंधित समस्याओं की भरपाई अनुकूल बदलावों से हो जाएगी। बैंकिंग तंत्र में पर्याप्त नकदी मौजूद है, अच्छे मॉनसून के बाद बंपर पैदावार और केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनधारकों को वेतन और पेंशन वृद्घि आदि से आर्थिक वृद्घि को मजबूती मिलेगी। जीएसटी भारत के जटिल कर ढांचे को सुगम बनाने में मदद मिलेगी और साथ ही अर्थव्यवस्था को मजबूत होगी। इसके अलावा अर्थव्यवस्था को मानव श्रम बल में युवा भारतीयों की दिलचस्पी बढऩे से भी मदद मिलेगी। इन सभी कारकों से भारत की आर्थिक वृद्घि को ताकत मिलेगी और सोने की मांग में तेजी आएगी।' इस बीच, मुंबई के लोकप्रिय जवेरी बाजार में पांच सप्ताह से सोने की कीमत 28,900 रुपये और 29,500 रुपये (प्रति 10 ग्राम) के आसपास मंडरा रही है। वहीं अंतरराष्टï्रीय बाजारों में सोने का भाव 1200 डॉलर और 1260 डॉलर प्रति औंस पर है। 
Keyword: gold,सराफा बाजार, आभूषण,
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