Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Wednesday, August 23, 2017 03:35 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|
 
होम खबर

नेताओं के चुनावी रथ के खेवनहार
प्रियंका राठी /  03 06, 2017

चुनावी रथों पर सवार महारथी

चुनावी मौसम में नेताओं के प्रचार के लिए बनाए गए खास वाहन हर सुख-सुविधा से हैं भरपूर
इस बार के चुनाव में चुनावी रथों का इस्तेमाल इस कदर किया गया है कि आम लोगों के मन में इसकी छवि कई वर्षों तक बनी रहेगी

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के लिए जारी प्रक्रिया में सभी दलों के नेताओं ने अधिक से अधिक मतदाताओं तक अपनी बात पहुंचाने के लिए संचार के सभी साधनों का खुलकर इस्तेमाल किया है। हरेक बड़े नेता की यही कोशिश रही कि वह ज्यादा स्थानों पर जा सके और रैलियों एवं सभाओं को संबोधित कर सके। इसके लिए हेलीकॉप्टरों का बखूबी इस्तेमाल किया गया। लेकिन इस बार के चुनाव में चुनावी रथों का इस्तेमाल इस कदर किया गया कि आम लोगों के मन में इसकी छवि कई वर्षों तक बनी रहेगी। रोड शो से लेकर छोटी सभाओं तक में लोगों को संबोधित करने के लिए नेताओं ने इन खास वाहनों का दिल खोलकर प्रयोग किया है।

इस चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी तक हरेक प्रमुख नेता इन वाहनों का इस्तेमाल करते हुए नजर आए हैं।  खास तौर पर उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में इन चुनावी प्रचार वाहनों की अहमियत से शायद ही इनकार किया जा सकता है। इसके जरिये किसी खास नेता या राजनीतिक दल के संदेश को जनसमूह तक पहुंचाने की कोशिश की जाती है। इसके साथ उस नेता या दल की राजनीतिक शक्ति का प्रदर्शन कर मतदाताओं को यह संदेश देने की कोशिश की जाती है कि बड़े पैमाने पर लोगों का समर्थन हासिल कर रहे नेता के ही पक्ष में अन्य लोग भी खड़ा होना चाहिए।

बहरहाल चुनावी मौसम की गहमागहमी को देखकर लोगों के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि प्रचार का पूरा तंत्र कैसे काम करता है और उसके लिए भारी-भरकम खर्च का इंतजाम कैसे होता है? इसी तरह प्रचार में लगी गाडि़यों खासकर चुनावी रथों के बारे में जानने को लेकर लोग काफी उत्सुक होते हैं।

चुनाव अभियान में लगने वाले इन वाहनों को देखकर इतना जरूर कहा जा सकता है कि ये आम वाहन नहीं होते हैं। ये वाहन न केवल किसी नेता को सुविधाजनक तरीके और सुरक्षित तरीके से एक जगह से दूसरी जगह ले जाता है बल्कि उसमें रूफ टॉप और एलिवेटर जैसी सुविधाएं भी होती हैं। दरअसल वाहन की छत में बने रूफ टॉप से नेता आसपास मौजूद  लोगों से संवाद कर सकता है। लेकिन अगर वहां हजारों की संख्या में लोग मौजूद हों तो उन्हें संबोधित करने के लिए एलिवेटर प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाता है।

आखिर इन वाहनों को किस तरह से तैयार किया जाता है कि वे उपभोगकर्ताओं के लिए सुविधाजनक बने रहें। इसका जायजा लेने के लिए बिज़नेस स्टैंडर्ड ने चुनावी वाहन की आपूर्ति करने वाली कंपनी बीआरएम कैरवैन्स के कारखाने का दौरा किया। गुरुग्राम के मानेसर में स्थित इस कारखाने में ग्राहकों की पसंद और जरूरत के हिसाब से वाहनों को तैयार किया जाता है। यह कंपनी वर्ष 1986 से ही चुनावी मकसद से इस्तेमाल होने वाले वाहन तैयार करने में लगी हुई है और उसका दावा है कि देश के लगभग हरेक बड़े नेता ने उसके बनाए वाहनों का इस्तेमाल किया है।

बीआरएम ने समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव से लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के तमाम नेताओं तक चुनावी वाहन पहुंचाए हैं। इस बार के चुनाव में भी सभी दलों के शीर्ष नेता इस कंपनी के वाहनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। कपंनी के प्रबंधकीय साझेदार एवं संस्थापक विवेक बब्बर कहते हैं, 'हम तकनीक के साथ पूरे जुनून से काम करते हैं और उस वाहन को इस तरह तैयार करते हैं कि वह किसी नेता के लिए दूसरे घर की तरह लगे। उसमें जरूरत की सभी चीजों का पूरा ध्यान रखा जाता है।'

बब्बर बताते हैं कि उनकी कंपनी दल या नेता की मांग के हिसाब से उसमें जरूरी बदलाव भी करती है ताकि उसका इस्तेमाल करते समय दिग्गज नेता अधिक सहज महसूस कर सकें। वह कहते हैं, 'अमूमन हरेक पार्टी अपनी कुछ खास जरूरतों को लेकर हमारे पास आती है। इस बार के चुनावी वाहनों की खास बात यह रही है कि हमने उनके पिछले हिस्से में एलसीडी स्क्रीन का इस्तेमाल किया है जहां पर उस दल विशेष की योजनाओं, उपलब्धियों और चुनावी वादों को प्रदर्शित किया जा सकता है।' इस बार के वाहनों में मोड़े जा सकने लायक मंडप भी लगाए गए हैं ताकि कहीं भी वाहन को रोककर लोगों को संबोधित किया जा सके।

इन सुविधाजनक गाडिय़ों के लिए अच्छी-खासी कीमत भी अदा करनी पड़ती है। करीब 25 लाख से 40 लाख रुपये की कीमत वाली इन गाडिय़ों को तैयार करने में बीआरएम को ढाई से लेकर तीन महीने तक का वक्त लगता है। हालांकि बब्बर कहते हैं कि किसी ग्राहक की विशेष जरूरत को देखते हुए कुछ दिनों में ही वाहन तैयार किया जा सकता है। वह दिवंगत नेता पी ए संगमा का उदाहरण देते हुए बताते हैं कि उनके लिए  केवल 13 दिनों में ही चुनावी वाहन तैयार किया गया था। इसे पहलू को ध्यान में रखते हुए  बीआरएम के संयंत्र में चुनावों का समय शुरू होने के कई महीने पहले से ही वाहनों में बुनियादी सुविधाएं और उपकरण लगाए जाने की शुरुआत हो जाती है।

जब किसी वाहन को ग्राहक की पसंद के हिसाब से तैयार करने की स्थिति आती है तो आम तौर पर वह 26 सीट वाला टेम्पो वाहन होता है। उस वाहन को एक तरह से केवल ढांचे से तैयार करना शुरू किया जाता है। इस दौरान मूल वाहन की सारी अंदरूनी सजावट को हटा दिया जाता है और उसके बाद लकड़ी का फर्श लगाया जाता है। बेहद आरामदायक सीट वाले सोफा सेट भी लगाए जाते हैं जिसे मोड़कर लेटने के लायक भी बनाया जा सकता है। फिर उसमें मोड़ी जा सकने लायक टेबल, कैबिनेट और छोटी आलमारी, कालीन, चार्जिंग प्वाइंट और वॉशरूम भी लगाया जाता है।

दरअसल चुनावी मौसम में किसी नेता की जरूरत की हर चीज को उस गाड़ी में मुहैया कराने की कोशिश की जाती है। इसीलिए उस वैन में स्प्लिट एयर कंडीशनर, दो टेलीविजन सेट, एक माइक्रोवेव ओवन और एक रेफ्रीजरेटर भी लगा होता है। इन उपकरणों के लिए बिजली की आपूर्ति उस वैन के इंजन या जेनसेट से की जाती है। खास बात यह होती है कि नेता के आराम का ध्यान रखते हुए वैन के ड्राइवर के कैबिनेट को भीतरी कक्ष से एकदम अलग कर दिया जाता है। बीआरएम इन वाहनों को गाड़ी बनाने वाली कंपनी से खुद खरीदकर ग्राहक की पसंद के मुताबिक तैयार करती है और फिर बेच देती है। खास बात यह है कि बीआरएम इस चुनावी वाहन को किराये पर मुहैया नहीं कराती है।
Keyword: विधानसभा चुनाव, मतदाता, संचार साधन, रै‍ली, हेलीकॉप्टर, चुनावी रथ, रोड शो, खास वाहन,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
Advertisements 
Cover from Natural Calamities. Buy Home Insurance
Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
  आपका मत
 क्या दालों की कीमतों में तेजी जमाखोरी का संकेत है?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.