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रोबोट कर का असर
संपादकीय /  March 06, 2017

माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स ने मशविरा दिया है कि मनुष्य के रोजगार बचाने के लिए रोबोट पर कर लगाया जाना चाहिए। इस बात ने चौतरफा बहस को जन्म दिया है, खासतौर पर राजनीतिक फलक में। उनकी योजना के मुताबिक लगाया जाने वाला कर स्वचालन की सामाजिक लागत की वसूली करेगा और उसका इस्तेमाल एक सार्वभौमिक मूलभूत आय (यूबीआई) के लिए धन जुटाने में किया जा सकता है। औद्योगिक वृद्घि के हिमायतियों का कहना है यह नवाचार को हतोत्साहित करने वाला कदम होगा और इसका असर उत्पादकता में कमी के रूप में हमारे सामने आएगा। ग्रीस के पूर्व वित्त मंत्री यानीस वारोफाकिस जो धुर वामपंथी विचारधारा के हैं, ने यह सवाल उठाया है कि इस कर का निर्धारण किस प्रकार किया जाएगा। उन्होंने इस संबंध में तीन समस्याएं गिनाई हैं।
पहली समस्या: उनका कहना है कि आमतौर पर किसी कर्मचारी के अंतिम निर्धारित वेतन का प्रतिस्थापन किया जाता है। ऐसे में इस बात को लेकर अलग-अलग विचार हो सकते हैं कि प्रासंंगिक वेतन में कितनी बढ़ोतरी या कमी की जानी चाहिए। ऐसे मनमर्जी वाले और व्याख्या के अधीन रुख में भ्रष्टïाचार की बहुत अधिक आशंका रहती है। भारत में कर अधिकारियों का सामना करने वाले इस बारे में बता सकते हैं। दूसरी बात, सभी रोबोट मनुष्यों के रोजगार नहीं छीनेंगे। उनमें से कुछ ऐसे काम भी करेंगे जो मनुष्यों ने कभी किए ही नहीं। उन मामलों में प्रश्न यह उठता है कि किस वेतन स्तर पर कर लगेगा। तीसरी समस्या थोड़े दार्शनिक रुख वाली है। अगर मान लिया जाए कि रोबोट द्वारा प्रतिस्थापित किए जाने के पहले कोई मनुष्य एक खास मशीन को चला रहा था तो जब मशीन रही ही नहीं तो उस पर आयकर कैसे लगाया जा सकता है? इसके लिए गेट्स ने यह सुझाव दिया कि मोटा-मोटा कर लगाया जा सकता है कि जो स्वचालन की गति को धीमा कर देगा। यह बात उत्पादकों को इस बात के लिए भी प्रेरित कर सकती है कि वे कृत्रिम बुद्घिमता की जगह मौजूदा मशीनरी का इस्तेमाल शुरू कर दें। इससे स्वचालन का पूरा विचार ही विफल हो जाएगा।
अमेरिका में इस बात को लेकर बहस की तीव्रता इस बात को रेखांकित करती है कि रोबोट का आगमन किस कदर उथलपुथल पैदा कर सकता है और उससे निपटने के लिए नीतिगत प्रतिक्रिया में स्थिरता लाने की आवश्यकता है। इसे लेकर कर्मचारियों पर कुल वेतन कर लगेगा जो उन पर बोझ डालेगा। इसके अलावा लाभांश से होने वाली आय और पूंजीगत लाभ पर कर लगाकर यूबीआई को वित्तीय मदद मुहैया कराना भी इसमें शामिल है। भारत में इसके लिए इतर प्रतिक्रिया की आवश्यकता है। चीन और जापान में जहां रोबोट को इसलिए बढ़ावा मिल रहा है क्योंकि वहां कामगार वर्ग उम्रदराज हो रहा है, वहीं भारत में ऐसी कोई दिक्कत नहीं है इसलिए यहां लागत कोई मुद्दा नहीं है। उदाहरण के लिए भारत में हर साल 15 लाख इंजीनियर तैयार होते हैं। इनकी प्रति घंटा श्रम लागत एक डॉलर से भी कम है। इसके बावजूद देश में तमाम कंपनियां कृत्रिम बुद्घिमता के पीछे हैं क्योंकि कुशल श्रमिकों की कमी है। अधिकांश इंजीनियर अमेरिका चले जाते हैं जबकि करीब एक चौथाई बेरोजगार रह जाते हैं।
उस दृष्टिï से देखा जाए तो विभिन्न सरकारों ने कौशल विकास पर कतई काम नहीं किया है। वर्ष 2022 तक 40 करोड़ लोगों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य भी दूर की कौड़ी नजर आ रहा है। ऐसे में गेट्स का रोबोट कर शायद भारत पर लागू नहीं हो। परंतु रोबोटीकरण के कारण भविष्य में रोजगार तैयार होने की कमजोर दर का असर भविष्य में सामाजिक अशांति को बढ़ावा देगा। इससे यह भी पता चलता है कि उचित प्रशिक्षण और कौशल संबंधी पहल पर बल देने की आवश्यकता है। तभी व्यवस्था बरकरार रह सकेगी।

Keyword: robot, Tax, Employment,
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