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लौह अयस्क उद्योग की मांग बाजार आधारित हों कीमतें
मेघा मनचंदा / नई दिल्ली March 06, 2017

ऐसे समय में जब घरेलू लौह अयस्क उद्योग में मांग में सुधार दिखना शुरू हो गया है, केंद्र सरकार इस्पात उद्योग के लिए सस्ते कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के प्रयास में लौह अयस्क की कीमतों पर सीमा निर्धारित करने की योजना बना रही है। लेकिन लौह अयस्क उद्योग का कहना है कि कीमतें बाजार आधारित होनी चाहिए।
चीन से लौह अयस्क की अधिक आपूर्ति की वजह से पिछले कुछ समय में कीमतों में सुस्ती आई थी। हालांकि चीन में मांग में सुधार के साथ कीमतों में अब तेजी दिखी है।
अधिकारियों के अनुसार, केंद्र सरकार लौह अयस्क की कीमत पर सीमा तय करने की योजना बना रही है जिससे इस्पात उत्पादकों को सस्ती कीमत पर इस कच्चे माल की खरीदारी करने में मदद मिलेगी।
इस कदम से इस्पात उद्योग को न्यूनतम आयात मूल्य की समाप्ति के बाद मदद मिलेगी। न्यूनतम आयात मूल्य की वजह से घरेलू क्षेत्र को मुख्य रूप से चीन से सस्ते आयात की वजह से एक साल से मदद मिली है। इस्पात निर्माण में कच्चे माल का कुल लागत में बड़ा योगदान है। उद्योग के अनुमानों के अनुसार ब्लास्ट फर्नेस विकल्प का इस्तेमाल करने वाले छोटे इस्पात उत्पादकों के लिए कुल लागत में लौह अयस्क का योगदान 18 प्रतिशत है जबकि स्पंज आयरन उत्पादकों के लिए यह 20 फीसदी है। उद्योग के एक जानकार ने कहा कि कुल लागत ढांचे में लौह अयस्क की भागीदारी की कम प्रतिशतता की मुख्य वजह यह है कि घरेलू बाजार में अयस्क सस्ती कीमत पर उपलब्ध है।  फेडरेशन ऑफ इंडियन मिनरल इंडस्ट्रीज (फिमी) के वाइस-चेयरमैन बसंत पोद्दार ने कहा कि लगभग 90 प्रतिशत लौह अयस्क खनन पट्टïे वर्ष 2020 में समाप्त हो जाएंगे और उस समय इस्पात उत्पादक खदानों के लिए बोली लगाने में दिलचस्पी दिखा सकते हैं।
पोद्दार ने कहा कि घरेलू इस्पात उद्योग ने खदानों के लिए बोली प्रक्रिया में कभी दिलचस्पी नहीं दिखाई क्योंकि लौह अयस्क कम कीमत की वजह से हमेशा से खरीदार का प्रमुख उत्पाद रहा है। भारतीय लौह अयस्क खनन कंपनियां दावा कर रही हैं कि उन्हें ऊंची रॉयल्टी, विभिन्न राज्य स्तर के करों, ऊंचे निर्यात शुल्क, निर्यात प्रतिबंधों और उत्पादन पर सीमा आदि की समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। 
भारतीय घरेलू बाजार में लौह अयस्क वास्तव में सस्ती कीमत पर उपलब्ध है और इससे भारतीय इस्पात उत्पादकों पर किसी तरह की समस्या का सामना नहीं करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि वहीं कोकिंग कोयले की लागत और अन्य खर्च तथा अक्षमता की वजह से इस्पात उद्योग का मुनाफा प्रभावित हो रहा है। घरेलू लौह अयस्क उद्योग का मानना है कि चूंकि इस्पात कीमतें पूरी तरह बाजार-केंद्रित और गैर-नियंत्रित हैं, इसलिए लौह अयस्क कीमतों को भी निष्पक्ष रूप से बाजार के मांग-आपूर्ति सिद्घांत के जरिये निर्धारित किए जाने की अनुमति दी जानी चाहिए और कीमतों को लेकर कोई सीमा या दायरा नहीं थोपा जाना चाहिए।

Keyword: steel, iron ore, minerals,
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