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पॉलिसी लेने से पहले बीमा कंपनियों को तोलें मगर तराजू मिलेगा कैसे...
प्रिया नायर /  March 05, 2017

अगर आप बीमा पॉलिसी खरीदने की योजना बना रहे हैं तो चाहे जीवन बीमा हो या गैर-जीवन बीमा, किसी भी पॉलिसी के बारे में जानकारी जुटाना बिल्कुल भी मुश्किल काम नहीं है और अंगुली की हल्की हरकत से आपको सब पता चल जाता है। बीमा कंपनियां आजकल अपनी वेबसाइट पर पॉलिसी के बारे में अच्छी खासी जानकारी मुहैया करा देती हैं। अगर इससे काम नहीं चलता है तो विभिन्न बीमा पॉलिसियों की जानकारी एक साथ देने वाले वेब एग्रीगेटर और बीमा ब्रोकर भी मौजूद हैं, जिनकी वेबसाइट से आपको बहुत कुछ पता चल जाएगा। लेकिन सबसे अहम बात यह है कि पॉलिसी का चुनाव करते समय आपको किन-किन आंकड़ों और सूचना पर नजर डालनी चाहिए?

 
मार्स इंडिया इंश्योरेंस ब्रोकर्स के कंट्री हेड और सीईओ संजय केडिया मानते हैं कि पॉलिसी तलाश रहे किसी भी व्यक्ति को बीमा कंपनी का चयन करने से पहले सबसे पहले यह देखना चाहिए कि दावों को निपटाने की कितनी क्षमता उसके भीतर है और इस बारे में उसकी नीयत कितनी साफ है। अगर किसी बीमा कंपनी के पास नकदी का ढेर है तो आप यह मान सकते हैं कि दावे निपटाने में वह अच्छी तरह सक्षम है। इसी तरह पिछले दावों को निपटाने के बारे में उसके ट्रैक रिकॉर्ड पर नजर डालने से आपको पता चल सकता है कि वह दावों को निपटाना और सही भुगताना करने में कितना भरोसा करती है। केडिया कहते हैं, 'जब भारतीय बाजारों में बदलाव आएगा और जोखिम के आधार पर भुगतान क्षमता का आकलन किया जाने लगेगा तो कंपनी की दावों का भुगतान करने की क्षमता का बेहतर पता चल पाएगा। लेकिन आकलन करने की मौजूदा पद्घति का कुछ समय तक तो इस्तेमाल किया ही जा सकता है।'
 
आम तौर पर उन कंपनियों में दावों के निपटान का अनुपात बहुत ज्यादा होता है, जो पुरानी होती हैं। लेकिन इसके पीछे असली वजह यह है कि वे कंपनियां पहले ही अच्छी खासी तादाद में पॉलिसी बेच चुकी होती हैं। इसीलिए अगर वे ढेर सारी पॉलिसियों के दावों को खारिज भी कर दें तो वह संख्या बहुत छोटी नजर आती है। इसीलिए कुछ और पहलुओं पर भी नजर डालनी चाहिए। मसलन दावों के अनुपात के अलावा यह भी देखना चाहिए कि कोई भी कंपनी दावों का निपटरा करने में कितना वक्त लगाती है। अगर कंपनी ज्यादा से ज्यादा पॉलिसियों को मंजूर करती है, लेकिन दावों को निपटाने में अच्छा खासा वक्त लगा देती है तो पॉलिसीधारक के लिए शायद वहां का सौदा बहुत फायदेमंद नहीं होगा।
 
हालांकि कोई भी कंपनी दावों के निपटान में जो वक्त लेती है, उसके पीछे बड़ी वजह पॉलिसी का प्रकार भी होता है। मिसाल के लिए, मोटर बीमा का दावा निपटाने में ज्यादा वक्त लग सकता है, लेकिन स्वास्थ्य बीमा के दावे में नहीं। इसकी वजह यह है कि वाहन बीमा का दावा निपटाने और रकम देने से पहले कंपनी को वाहन का निरीक्षण करने की जरूरत पड़ सकती है।
 
आईसीआईसीआई लोंबार्ड जनरल इंश्योरेंस के प्रमुख (अंडरराइटिंग एवं दावे) संजय दत्ता कहते हैं, 'ग्राहक अगर इन मामलों में दो कंपनियों या पॉलिसियों की तलना करना चाहते हैं तो उन्हें उद्योग के मानदंडों पर नजर डालनी चाहिए। इससे उन्हें एकदम सही तस्वीर मिल जाएगी।' उन्होंने कहा कि तुलना करने वाली कोई वेबसाइट तो फिलहाल मौजूद नहीं है। लेकिन इस बारे में आंकड़े और सूचना भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) या सामान्य बीमा परिषद की वेबसाइट पर जाकर आसानी से हासिल किए जा सकते हैं।
 
केडिया कहते हैं, 'इरडा ने अब साफ निर्देश दिया है कि किसी भी बीमा कंपनी को अपनी वेबसाइट पर यह बताना ही होगा कि हरेक श्रेणी मसलन आग, इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य आदि में कितने दावे अब तक बकाया हैं। यह जानकारी वाकई में बहुत काम की है। लेकिन अभी तक इस तरह की कोई भी जानकारी सार्वजनिक नहीं है, जिससे पता चल सके कि हरेक बीमा कंपनी के कितने दावे हरेक श्रेणी में बकाया हैं और उनमें कितनी रकम अटकी हुई है। आदर्श स्थिति तो यही है कि बकाया दावों की राशि के बारे में खुलासा करते समय यह भी पता चले कि प्रत्येक श्रेणी में किस-किस मूल्य आकार की कितनी रकम और दावे बकाया हैं। यह सब कुछ नियामक द्वारा तय किए गए प्रारूप में ही मिलना चाहिए। यदि ऐसा होता है तो विश्लेषण काफी आसान हो जाएगा और पॉलिसी खरीदने वाला आसानी से समझ सकेगा कि कौन सी बीमा कंपनी उसके लिए अधिक फायदेमंद है।'
 
ग्राहकों को यह भी देखना चाहिए कि वे अपनी शिकायतें कहां दर्ज करा सकते हैं। अगर आपको वितरक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की जरूरत पड़ती है या किसी समस्या का समाधान आप चाहते हैं तो यह जानकारी आपके बहुत काम आएगी। बीमा आप किसी एजेंट के जरिये खरीदें या ब्रोकर के जरिये या फिर ऑनलाइन खरीद करें, कंपनी की वेबसाइट पर दिया गया योजना का ब्रॉशर पढऩा बिल्कुल मत भूलिएगा। भारती एक्सा लाइफ इंश्योरेंस के मुख्य अनुपालना अधिकारी और मुख्य जोखिम अधिकारी सी एल भारद्वाज कहते हैं कि इससे आपको न केवल उत्पाद की विशेषताएं समझने और संदेह दूर करने में मदद मिलेगी बल्कि एजेंट या ब्रोकर द्वारा उत्पाद की विशेषताओं के बारे में दी गई जानकारी का सत्यापन करने में भी मदद मिलेगी। जीवन बीमा यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (यूलिप) उत्पादों के मामले में यह जरूरी है कि नेट एसेट वैल्यू (एनएवी) की वृद्धि पर नजर रखना जरूरी है। जीवन बीमा कंपनियों के विभिन्न फंडों के एनएवी के बारे में सूचनाएं रोजाना प्रकाशित होती हैं, इसलिए कोई भी पॉलिसी लेने से पहले एनएवी की चाल को देखना जरूरी है। 
Keyword: insurance, बीमा पॉलिसी,
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