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म्यूजिक ब्रॉडकास्ट: बैलेंस शीट सुधारने में मिलेगी मदद
शीतल अग्रवाल /  March 05, 2017

प्रख्यात रेडियो ब्रांड रेडियो सिटी की मालिक म्यूजिक ब्रॉडकास्ट (एमबीएल) की आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) कंपनी को अपनी बैलेंस शीट में सुधार लाने में सक्षम बनाएगी। लगभग 489 करोड़ रुपये तक की निर्गम प्राप्ति में से 400 करोड़ रुपये एमबीएल में जाएंगे, शेष रकम ऑफर फॉर सेल से संबंधित होगी। कंपनी इन कोष के जरिये अपने 300 करोड़ रुपये के कर्ज का बड़ा हिस्सा चुकाएगी, जिससे उसकी ब्याज लागत में कमी आएगी और नकदी प्रवाह मजबूत होगा।
 
रेडियो सिटी ब्रांड की कई बाजारों में अच्छी पैठ है और एमबीएल 30 फीसदी से अधिक के मजबूत परिचालन मुनाफा मार्जिन में सक्षम है। बड़े शहरों में नंबर एक या नंबर दो पर आने के लिए कंपनी की रणनीति उसे विज्ञापन राजस्व का बड़ा हिस्सा लगातार हासिल करने में सक्षम बनाएगी। हालांकि उसकी राजस्व वृद्घि और मार्जिन को लेकर संभावना मजबूत बनी हुई है, लेकिन निर्गम के मूल्य निर्धारण ने निकट भविष्य में लाभ के लिए कम गुंजाइश छोड़ी है। एकमात्र सूचीबद्घ प्योर-प्ले रेडियो कंपनी एंटरटेनमेंट नेटवर्क या ईएनआईएल ही वित्त वर्ष 2018 की अनुमानित आय के 41 गुना पर कारोबार कर रही है। अपर प्राइस बैंड पर, आईपीओ की कीमत वित्त वर्ष 2018 की अनुमानित आय के लगभग 39 गुना पर है। 
 
यह ध्यान देने की बात है कि एमबीएल आगामी वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में कर भुगतान शुरू करेगी और वित्त वर्ष 2018 में 11 नए चैनलों की वजह से नुकसान दर्ज किया जा सकता है। कंपनी प्रबंधन का कहना है कि नए चैनल अक्सर भरपाई की स्थिति में आने में 12 से 24 महीने का समय लेते हैं। सूचीबद्घता के लाभ के लिहाज से एकमात्र कारक यह है कि यदि बाजार में अधिक नकदी आती है तो शेयर मजबूत हो सकता है। 
 
विश्लेषकों का मानना है कि ईएनआईएल का शेयर अपने ऊंचे राजस्व आधार (एमबीएल के वित्त वर्ष 2016 के राजस्व से दोगुना), समान एबिटा मार्जिन, विविध राजस्व प्रवाह और दोहरे स्टेशनों की नीति के साथ एमबीएल की तुलना में अधिक मूल्यांकन पर कारोबार करने में सक्षम है। ईएनआईएल को 13 प्रमुख शहरों में से 12 में डुअल रेडियो स्टेशनों का लाभ हासिल है। इससे कंपनी को कई नॉन-डिफरेंशिएटेड, जनरल एंटरटेनमेंट चैनलों में मदद मिली है। इसकी वजह से इन्हें इस सेगमेंट में अधिक श्रोताओं तक पहुंच बनाने और बाजार भागीदारी बढ़ाने में भी मदद मिली है। रेडियो सिटी डुअल स्टेशन नीति पर केंद्रित नहीं है। क्षेत्रीय स्तर पर, कुल विज्ञापन खर्च (लगभग चार प्रतिशत) में अन्य माध्यमों की तुलना में रेडियो की मामूली हिस्सेदारी को देखते हुए रेडियो कंपनियों का विज्ञापन राजस्व मजबूत रफ्तार से बढऩे की अच्छी संभावना है। नए रेडियो स्टेशनों और शहरों में इजाफा कंपनी के लिए वृद्घि का एक प्रमुख वाहक है। इन्वेंट्री इस्तेमाल के स्तर में आ रहा सुधार भी मददगार है। दूसरी तरफ एमबीएल के लिए, शीर्ष पांच विज्ञापनदाताओं (वित्त वर्ष 2016 के राजस्व का 32 प्रतिशत) के साथ साथ तीन महानगरों मुंबई, दिल्ली और बेंगलूरु (वित्त वर्ष 2016 के राजस्व का लगभग 50 प्रतिशत) पर अधिक निर्भरता दबाव के लिहाज से प्रमुख जोखिम भी है। 
 
सरकार द्वारा नोटबंदी से कई मीडिया कंपनियों के लिए विज्ञापन और विपणन खर्च पर दबाव देखने को मिला है। इसे लेकर एमबीएल के लिए भी अल्पावधि चिंता बनी रहेगी। इसके अलावा कंपनी के 11 नए स्टेशन शुरू होने से भी मार्जिन पर शुरुआती लागत की वजह से अल्पावधि में दबाव बन सकता है। विश्लेषकों का कहना है कि चूंकि ये स्टेशन एक या दो वर्ष के दौरान पूरी तरह से परिचालन में आएंगे इसलिए मार्जिन 30 फीसदी के मौजूदा स्तरों पर लौटने की संभावना है। सरकार को चुकाए जाने वाले लाइसेंस शुल्क (राजस्व का 4 प्रतिशत) और संगीत कंपनियों के लिए रॉयल्टी (3 प्रतिशत) के साथ एमबीएल की ज्यादातर लागत निर्धारित है जिससे यह राजस्व के अनुरूप बनी रह सकती है।
Keyword: radio, MBL, म्यूजिक ब्रॉडकास्ट (एमबीएल),
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