Search BS HindiWeb         Follow us on 
Business Standard
Tuesday, June 27, 2017 10:52 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|
 
होम बाजार खबर

क्या आईटी दिग्गज टीसीएस के पुनर्खरीद के कदमों पर चलेंगी?
ईशान बख्शी / नई दिल्ली March 05, 2017

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज की तरफ से शेयर पुनर्खरीद की घोषणा दो सवाल उठाती हैं। पहला, क्या अच्छी खासी नकदी पर बैठी अन्य भारतीय आईटी कंपनियां भी ऐसा ही कदम उठाएंगी? दूसरा, क्या यह इकलौता मामला होगा या फिर यह नई प्रवृत्ति की शुरुआत करेगा जहां भारी नकदी पर बैठी कंपनियां शेयरधारकों को रकम वापस करेंगी? पारंपरिक तौर पर भारतीय आईटी कंपनियों ने खासी नकदी बनाए रखी है। वित्त वर्ष 2017 की तीसरी तिमाही के आखिर में इन्फोसिस के पास 26,113 करोड़ रुपये की नकदी थी। इसके पास 9,872 करोड़ रुपये का निवेश भी था। इसी तरह एचसीएल टेक्नोलॉजिज के पास वित्त वर्ष 2017 की दूसरी तिमाही के आखिर में 10,258 करोड़ रुपये की नकदी थी। इसके पास 684 करोड़ रुपये का निवेश है। खासी नकदी अपने पास रखने की वजह विलय-अधिग्रहण के जरिए विस्तार के लिए नकदी की आवश्यकता है। इक्रा के सुब्रत राय (कॉरपोरेट रेटिंग के प्रमुख) ने कहा, कंपनियों के अधिग्रहण के लिए आईटी कंपनियों की बैलेंस शीट में नकदी रखी गई।
 
लेकिन भारतीय आईटी कंपनियों ने वास्तव में बड़ा अधिग्रहण नहीं किया। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक, टीसीएस ने साल 2016 में किसी कंपनी का अधिग्रहण नहीं किया। साल 2015 में इसने कुल 7.04 करोड़ डॉलर में दो कंपनियों का अधिग्रहण किया था। इसकी तुलना में इन्फोसिस अधिग्रहण के मामले में आगे रही है। इसने साल 2016 में आठ कंपनियों का अधिग्रहण किया। लेकिन इन कंपनियों की तरफ से छह कंपनियों के अधिग्रहण की कुल लागत महज 3.1 करोड़ डॉलर रही। इन सौदों की कीमत कहीं भी उनकी नकदी के आसपास नहीं ठहरती।
 
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के विश्लेषक अपूर्व प्रसाद ने हा, पिछले दो सालों में एक्सेंचर ने अधिग्रहण पर 1.7 अरब डॉलर खर्च किए हैं, वहीं भारत में टियर-2 आईटी कंपनियों ने 2.3 अरब डॉलर खर्च किए हैं। आईटी फर्मों की तरफ से बड़े अधिग्रहण का मामला शायद ही देखा जा रहा है और कुल खर्च बहुत ज्यादा नहीं रहा है। भारतीय आईटी कंपनियों ने काफी ज्यादा नकदी अपने पास बनाए रखी है।
 
एक्सेंचर के पास नकदी व बाजार पूंजीकरण का अनुपात छह फीसदी है, वहींं इन्फोसिस के लिए यह 14 फीसदी है। विप्रो का आंकड़ा और भी ज्यादा यानी 20 फीसदी है। उनके भुगतान का अनुपात भी इसकी तुलना में कम है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के मुताबिक, पिछले तीन सालों में एक्सेंचर का भुगतान अनुपात (लाभांश व पुनर्खरीद) इसके मुक्त नकदी प्रवाह का 100 फीसदी से ज्यादा रहा है।
 
कॉग्निजेंट के लिए वित्त वर्ष 2019 में यह करीब 75 फीसदी रह सकता है। भारतीय आईटी कंपनियों के लिए यह कम है यानी करीब 54 फीसदी। निवेशकों को डर है कि बैलेंस शीट पर ज्यादा नकदी शेष कंपनी के इक्विटी रिटर्न व इसके शेयरों के मूल्यांकन को दबा देता है। मोटे तौर पर नकदी या तो सावधि जमाओं के तौर पर है या सरकारी प्रतिभूतियों में इसका निवेश किया गया है या डेट व लिक्विड म्युचुअल फंडों में निवेशित है। लेकिन नकदी पर प्रतिफल कम रहा है। इससे इक्विटी पर कंपनी का कुल रिटर्न दब जाता है। नकदी को छोड़, आईटी कंपनियों का मुख्य रिटर्न बेहतर रहा है।
Keyword: TCS, IT, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
Advertisements 
Cover from Natural Calamities. Buy Home Insurance
Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*

स्मार्ट इंवेस्टर

क्या है आंकड़ों के पीछे का सच?

Investmentsअगर आप कंपनी के परिणामों के आंकड़ों पर ही केवल निगाह डाल रहे हैं तो दोबारा

विनिवेश योजना से शेयर पर बना रहेगा दबाव

केयर्न इंडिया : मजबूत उत्पादन से मिली मदद

धातु कंपनियों की चमक बरकरार रहने के आसार

निवेश के नए साधन, अस्पताल, स्कूल और एटीएम

आगे पढ़े
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.