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राज्यों में लाभ का उदय
श्रेया जय / नई दिल्ली 03 03, 2017

वितरण कंपनियों के कर्ज का पुनर्गठन

► बिजली के बकाये पर लगने वाला ब्याज हुआ कम, बचेंगे सालाना 7,255 करोड़ रुपये
उदय में शामिल 22 राज्यों में से 15 राज्यों ने अपनी वितरण कंपनियों के कर्ज के लिए जारी किए हैं बॉन्ड
अब तक जारी किए गए हैं कुल 2.7 लाख करोड़ रुपये के बॉन्ड
राज्यों ने 1.83 लाख करोड़ रुपये और वितरण कंपनियों ने 0.87 लाख करोड़ रुपये के बॉन्ड जारी किए

बिजली वितरण सुधार योजना उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना (उदय) से धीरे धीरे बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) की वित्तीय स्थिति सुधर रही है। डिस्कॉम के कर्ज के बदले जिन राज्यों ने वित्तीय पुनर्गठन योजना के तहत बॉन्ड जारी किए थे उससे अनुमानित रूप से 7,255 करोड़ रुपये सालाना ब्याज की बचत हो रही है। उदय में शामिल होने वाले 22 राज्यों में से 15 राज्यों ने अपनी वितरण कंपनियों के कर्ज के लिए बॉन्ड जारी किए हैं, जो कर्ज के पुनर्गठन का हिस्सा है। अब तक कुल 2.7 लाख करोड़ रुपये के बॉन्ड जारी किए गए हैं। इसमें से 1.83 लाख करोड़ रुपये के बॉन्ड राज्यों ने और शेष वितरण कंपनियों ने जारी किया है। 

उदय के लिए हस्ताक्षर करने वाले राज्यों को पहले चरण में वितरण कंपनी का 30 सितंबर 2015 तक का 75 प्रतिशत कर्ज अपने ऊपर लेना है, जिसमें से 50 प्रतिशत कर्ज 2015-16 और 25 प्रतिशत 2016-17 में लेना है। उसके बाद ये राज्य इसके पूंजीकरण के लिए बाजार में बॉन्ड जारी करेंगे। शेष   25 प्रतिशत बकाये के लिए डिस्कॉम अलग से सॉवरिन गारंटी लेंगे। 

2015-16 में इस योजना में शामिल होने वाले राज्यों से उम्मीद थी कि वे 50 प्रतिशत कर्ज पिछले वित्त वर्ष में और शेष मार्च 2016 तक ले लेंगे। बाद में कैबिनेट के फैसले के मुताबिक बाज में शामिल होने वालों को कर्ज के 50 प्रतिशत पर पिछले साल बॉन्ड जारी करने व 25 प्रतिशत 2017-18 में ले जाने की अनुमति दी गई। बिजली मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि राज्यों की ओर से जारी किए गए बॉन्ड पर ब्याज दरें 7.04 से 8.68 प्रतिशत हैं, जबकि डिस्कॉम द्वारा जारी बॉन्डों पर ब्याज दरें 9.75 प्रतिशत हैं। 

एक अधिकारी ने कहा, 'कर्ज के करीब 70 प्रतिशत के लिए कम ब्याज दरों पर बॉन्ड जारी करने से राज्यों/डिस्कॉम के ब्याज खर्च में उल्लेखनीय कमी आई है।' राजस्थान, पंजाब, हरियाणा जैसे राज्य कर्ज का भुगतान कर ब्याज का बोझ खत्म करने पर विचार कर रहे हैं। उदाहरण के लिए राजस्थान पर ब्याज का बोझ वित्त वर्ष 17 में घटकर 4,738 करोड़ रुपये तक आने की उम्मीद है, जो वित्त वर्ष 16 में 9,435 करोड़ रुपये था। इसी तरह से पंजाब के ब्याज में 160 करोड़ रुपये और हरियाणा के ब्याज में 765 करोड़ रुपये की बचत होगी। 

कर्ज से दबी वितरण कंपनियों में 80,000 करोड़ रुपये कर्ज के साथ राजस्थान सबसे ऊपर है, उसके बाद उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश व पंजाब आते हैं। उदय के लिए सहमति पत्र (एमओयू) के मुताबिक उदय लागू होने के बाद पहले साल में राज्यों द्वारा कर्ज का बोझ अपने ऊपर लेने को राजकोषीय सीमा में शामिल नहीं किया जाएगा, जिससे राज्य एफआरबीएम सीमा बरकरार रख सकेंगे। 

इस योजना में परिचालन कुशलता में सुधार के लिए भी कुछ कदम उठाए गए हैं। एटीऐंडसी हानि को बड़ा लक्ष्य बनाया गया है, जो 2019 तक मौजूदा स्तर से घटाकर 15 प्रतिशत पर लाया जाना है। इसके साथ ही संग्रह और बिलिंग में भी सुधार करने, बिजली की चोरी रोकने, एसीएस और एआरआर के बीच अंतर कम करना भी लक्ष्य में शामिल किया गया है। इस योजना के तहत नियमित रूप से बिजली के दाम के पुनरीक्षण और दरें सस्ती रखने पर जोर दिया गया है। इस समझौते पर हस्ताक्षर के बाद राज्य सरकारें कोयले की आपूर्ति तार्किक बनाए जाने व केंद्रीय वित्तीय सहायता में भी सक्षम हो सकेंगी।
Keyword: बिजली वितरण, उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना, उदय, बॉन्ड, सॉवरिन गारंटी, एमओयू,
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