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आयात शुल्क में छूट चाहता है टायर उद्योग
टीई नरसिम्हन / चेन्नई March 01, 2017

यूनाइटेड प्लांटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया का कहना है कि प्राकृतिक रबर के आयात पर शुल्क में कोई कटौती नहीं की जानी चाहिए। फिलहाल यह 25 प्रतिशत है। एसोसिएशन के अध्यक्ष विनोद शिवप्पा का कहना है कि इस तरह का कोई भी कदम इस बागवानी क्षेत्र के 12 लाख उत्पादकों के हितों के लिए नुकसानदेह और ताबूत में अंतिम कील ठोकने जैसा होगा। प्राकृतिक रबर के प्रमुख उपभोक्ता टायर विनिर्माता इस शुल्क में कटौती की मांग कर रहे हैं। 

 
उधर एसोसिएशन का कहना है कि यह शुल्क पहले ही काफी कम है। विनोद ने कहा कि इस शुल्क में कुछ भी कमी करने का कोई मतलब नहीं है। पिछले कुछ सालों में प्राकृतिक रबर के आयात में तेजी आ रही है और यह हर साल नई ऊंचाई पर जा रहा है। 2008-2009 में प्राकृतिक रबर का आयात 77,762 टन और 20015-16 में यह 4,58,374 टन था। चालू वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में यह पिछले साल के मुकाबले 1,34,000 टन और ज्यादा रहा।
 
टायर विनिर्माताओं का कहना है कि रबर बोर्ड का 2017-18 के लिए उत्पादन का अनुमान 7,20,000 टन है, जबकि उपभोग 10.6 लाख टन है। एसोसिएशन का कहना है कि उत्पादन का अनुमान पिछले सालों के मुकाबले इजाफे को दर्शाता है और आयात शुल्क के ढांचे में किसी भी खलल से उत्पादन पर चोट पड़ेगी। 2012-13 में उत्पादन 9,13,000 टन था जो 2015-16 में खिसकते हुए 5,62,000 टन हो गया। तब से 2016-17 में चालू वर्ष का उत्पादन 6,50,000 टन और 2017-18 में 7,20,000 टन रहने का अनुमान है। 
 
विनोद ने कहा कि प्रत्यक्ष रूप से प्राकृतिक रबर के आयात शुल्क में कटौती की मांग का उत्पादन में कमी से कोई लेना-देना नहीं है बल्कि यह प्राकृतिक रबर की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में इजाफे की वजह से है। जहां घरेलू कीमत 160 रुपये प्रति किलोग्राम है, वहीं अंतरराष्ट्रीय कीमत 175 रुपये प्रति किलोग्राम है। आयात शुल्क में कटौती की मांग सिर्फ घरेलू कीमतों पर और दबाव बनने के लिए है। घरेलू उत्पादक कीमतों में कम उतार-चढ़ाव के साथ कच्चे माल की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करते हैं।
Keyword: tyre, आयात शुल्क, यूनाइटेड प्लांटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया,
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