Search BS HindiWeb         Follow us on 
Business Standard
Wednesday, May 24, 2017 09:36 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|
 
होम विशेष खबर

सेबी के नए प्रमुख के समक्ष तात्कालिक चुनौतियां
बाअदब
सोमशेखर सुंदरेशन /  March 01, 2017

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के नए प्रमुख के तौर पर अजय त्यागी ने कामकाज संभाला है। इस पद पर बैठने वाले व्यक्ति के लिए शांतचित्त होकर नए विचारों को समझना एवं नवाचार-परक सोच के प्रति खुले दिमाग से काम करना जरूरी है। पूंजी बाजार की यह नियामक संस्था इन दिनों चौराहे पर खड़ी है। सेबी के इतिहास में पहले कभी भी इसका काम इतना जटिल नहीं रहा है। त्यागी के सामने पेश तात्कालिक चुनौतियों पर एक नजर डालते हैं।

 
पहला, सेबी को शांति काल के एक जनरल की बहुत जरूरत है। इस संस्था की मूलभूत धारणा के चलते कुछ लोगों को ऐसा लग सकता है कि अब उनकी प्रतिभूति बाजार की बड़ी और खराब दुनिया से मुठभेड़ चल रही है। एक संस्था के तौर पर सेबी में प्रतिभूति बाजार के आचरण का विनियमन करने पर अत्यधिक बल दिया गया है जबकि बुद्धिमानी से भरे नियमन पर कम ध्यान दिया गया है।
 
सेबी के पास कभी भी अपने नियमों के प्रवर्तन के लिए इतनी अधिक शक्तियां नहीं रही हैं। लोकप्रिय मान्यता के उलट गंभीर आर्थिक गड़बडिय़ों से निपटने के लिए सेबी के पास पर्याप्त शक्तियां मौजूद हैं। अमेरिका और ब्रिटेन के प्रतिभूति बाजार नियामकों की तुलना में सेबी अधिक शक्ति-संपन्न है। किसी आर्थिक क्रियाकलाप में गड़बड़ी पाए जाने पर सेबी को कार्रवाई करने के लिए किसी न्यायाधीश से मंजूरी लेने की जरूरत नहीं पड़ती है। सेबी का डंडा आम तौर पर संदेह के ही आधार पर चलता है और फिर यह पीडि़त पक्ष की जिम्मेदारी बन जाती है कि वह खुद को पाक-साफ साबित करे। यह काफी हद तक संदेह के आधार पर किसी भी हिरासत में ले लेने की पुलिसिया कार्रवाई जैसा है। सेबी के कदम के खिलाफ अपील की जा सकती है लेकिन वहां पर भी प्रभावित पक्ष को ही यह साबित करना होता है कि सेबी ने गलत कदम उठाया है।
 
सेबी की विधायी शक्तियां भी लगभग स्वच्छंद हैं। सेबी अधिनियम के तहत नियामक को अधीनस्थ विधायन का व्यापक अधिकार दिया गया है। कोई भी नियम बनाने के पहले पूंजी बाजार के साथ सलाह-मशविरा करने की व्यवस्था नहीं है। इसी तरह नियम बन जाने के बाद उसके क्रियान्वयन के असर की पड़ताल की भी कोई प्रणाली विकसित नहीं की गई है। निश्चित तौर पर लोगों से सलाह लेने के कुछ रूप मौजूद हैं लेकिन न तो यह बताया जाता है कि किस तरह की समस्या का समाधान तलाशा जा रहा है और न ही किसी कानून या नीतिगत वक्तव्य के माध्यम से लागू किए गए किसी समाधान की समय-समय पर समीक्षा का ही प्रावधान है। इसका नतीजा यह होता है कि इस बाजार नियामक के प्रति एक तरह का भय पैदा होता है। अत्यधिक शक्तियां संकेंद्रित होने के बाद सेबी को हमेशा जंग के लिए तैयार होने के बजाय बाजार के भीतर शांतिपूर्ण क्रियाकलाप सुनिश्चित करने के लिए काफी परिपक्वता दिखाने की जरूरत है। इस लिहाज से सेबी के नजरिये में बदलाव आवश्यक हो जाता है। 
 
बाजार में धोखेबाजों की भरमार की सैकड़ों शिकायतें होती हैं और उन पर कड़ी कार्रवाई की जरूरत होती है। ऐसे मामलों में आसानी से भटक जाने की आशंका होती है। शक्तियां होने के बावजूद दंतहीन होने के आरोप चीख-चीखकर लगाए जाने लगते हैं जिससे सोचे-समझे बगैर फौरी कार्रवाई की मांग जोर पकडऩे लगती है। सेबी के शीर्ष पदाधिकारियों को इस तरह के हमलावर रवैये से परहेज करना होगा। दूसरा, प्राथमिक बाजार के नियमों को बेहतर बनाने के लिए उनकी गहरी समीक्षा और शोध की जरूरत है। बाजार से जुटाए जाने वाले फंड के आकार को कभी भी बाजार नियमन के बेहतर प्रदर्शन का पैमाना नहीं माना जा सकता है। प्रतिभूतियों के दस्तावेज काफी बोझिल होते हैं और उनसे शायद ही तस्वीर पूरी तरह साफ दिख पाती है। सेबी के नियमों को लागू करने की प्रक्रिया काफी बोझिल औपचारिक हो चुकी है। बाजार के इस क्षेत्र में लागू नीतियों को दुरुस्त करना सेबी के नए प्रमुख के लिए तात्कालिक लक्ष्य होना चाहिए। 
 
तीसरा, विलय एवं अधिग्रहण से संबंधित प्रावधानों की समीक्षा का काम लंबे समय से लंबित है। अधिग्रहण से संबंधित नए कानून के वजूद में आने के बाद छह साल का समय बीत चुका है। आज के समय भारत में इस पूरी प्रक्रिया के विभिन्न चरणों के बारे में अलग-अलग प्रावधान हैं। कानून का एक हिस्सा अधिग्रहण कर रही कंपनी को यह अनुमति देता है कि वह किसी सूचीबद्ध कंपनी का अधिकतम हिस्सा खरीदे जाने की सीमा को पार सकता है, वहीं सूचीबद्धता से संबंधित नियम यह कहता है कि शेयरधारिता संबंधी शर्तों का अनुपालन करना होगा। 
 
अंत में, त्यागी को सेबी के अंदरूनी मामलों और अपने मानव संसाधन पर खास ध्यान देना होगा। जूनियर स्तर के अधिकारियों में अक्सर निर्णय को लेकर असमंजस होता है और वे सुरक्षित होने के चक्कर में गलत फैसला कर बैठते हैं। सतर्कता जांच और ईमानदार फैसलों को लेकर निशाना बनाए जाने की प्रवृत्ति के चलते अधिकारी फैसले लेने में हिचकते हैं। सेबी अब 25 साल पुराना संगठन हो चुका है और उसके पास निष्ठावान कर्मचारियों की पूरी फौज मौजूद है। संगठन में तेजतर्रार और प्रतिभाशाली लोगों को शामिल कर और उन्हें गलत तरीके से निशाना बनाए जाने से संरक्षित करना प्राथमिकता में होना चाहिए। वायदा बाजार आयोग के सेबी में विलय हो जाने के बाद वरिष्ठ कर्मचारियों को समाहित करना एक चुनौती बना हुआ है। 
 
त्यागी को अपना कार्यकाल पांच साल से घटाकर तीन साल कर दिए जाने के बारे में उतना ध्यान नहीं देना चाहिए। एक वरिष्ठ नौकरशाह होने के चलते उन्हें अच्छी तरह पता है कि सरकारी व्यवस्था किस तरह काम करती है। शायद इसमें कुछ भी निजी नहीं है। लेकिन सेबी के अन्य अधिकारी शायद उतने परिपक्व नहीं होंगे। इन प्रतिभावान कर्मचारियों के लिए ढाल की तरह खड़े होकर त्यागी सेबी को एक पेशेवर शक्ल दे सकते हैं। इस तरह वह अपने पीछे एक शानदार विरासत छोड़कर जा सकेंगे।
Keyword: भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी),
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   New to investing in shares?
  Get a Forex Card at 0 Currency Conversion Charges.
  Rs 2 lakh health coverage @ Rs 8* per day
  New to the Stock Market? Take your FirstStep
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
Advertisements 
Cover from Natural Calamities. Buy Home Insurance
Open a demat account with Sharekhan & learn online trading.
Super Saver Health Insurance For Your Family
  आपका मत
 क्या जीएसटी से कारोबारियों की बढ़ेगी मुश्किल?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.