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एक साल में एफटीए पर हस्ताक्षर
दिलीप कुमार झा / मुंबई February 28, 2017

ऐसे में जबकि यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) एक दशक से ज्यादा समय से लंबित है, भारत ने एक साल के अंदर यूरेशियाई देशों (रूस, आर्मेनिया, बेलारूस, कजाकस्तान और किर्गिजस्तान) के साथ एफटीए पर हस्ताक्षर करने की तैयारी कर ली है। व्यापारिक प्रदर्शनी के दूसरे संस्करण कैपइंडिया 2017 के सिलसिले में आयोजित बैठक में वाणिज्य विभाग के संयुक्त सचिव सुनील कुमार ने कहा कि यूरोपीय देशों के साथ संयुक्त संभावनाओं को अलग-अलग सभी देशों ने स्वीकार किया है। अब जल्द ही इस समूह में सभी देशों के साथ व्यापारिक बातचीत शुरू की जाएगी। 21-22 मार्च को होने वाली इस प्रदर्शनी का आयोजन वाणिज्य मंत्रालय के सहयोग से रसायन निर्यात संवर्धन परिषद, रसायन और संबद्ध निर्यात संवर्धन परिषद, प्लास्टिक निर्यात संवर्धन परिषद तथा लाख एवं वन्य उत्पाद निर्यात संवर्धन परिषद के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है।
 
यूरेशियाई देशों के साथ इस एफटीए का अगुआ रूस है और इसका लक्ष्य 2025 तक द्विपक्षीय व्यापार को तीन गुना बढ़ाकर 30 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। फिलहाल भारत और यूरेशिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार 10 अरब डॉलर मूल्य का होता है। उल्लेखनीय है कि यूरेशियाई देशों के साथ भारत का व्यापाार घाटा काफी ज्यादा है। एक अनुमान के अनुसार यह 2.5 अरब डॉलर मूल्य निर्यात के मुकाबले 7.5 अरब डॉलर मूल्य का आयात करता है। इस तरह यूरेशियाई देशो से आयात निर्यात की तुलना में तीन गुना ज्यादा है। भारत यूरेशियाई देशों से उर्वरक, पोटाश, रसायन और अभियांत्रिक सामान का आयात करता है और चावल, कॉफी, चाय, तंबाकू तथा कुछेक रक्षा उपकरणों जैसे परंपरागत उत्पादों का निर्यात करता है। 
 
कुमार ने कहा कि भारत यूरेशियाई देशों से शुल्क के साथ उत्पादों का आयात करता है। इस कारण उनके साथ इस एफटीए से भारत के आयात पर असर नहीं पड़ेगा। इसके बदले एफटीए से आयात शुल्क हट जाएगा जिसका मतलब यह है कि आयातित जिंस सस्ती हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि कृषि जिंसों और रक्षा उपकरणों के भारतीय निर्यात पर भी प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि भारत से उनके निर्यात में कोई प्रतिस्पर्धा ही नहीं है। भारत यूरेशियाई देशों के साथ व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) का सहयोग करेगा।
 
इस बीच भारत ने यूरोपीय संघ के साथ एफटीए के संबंध में बातचीत शुरू कर दी है जिस पर एक दशक के बाद भी अनिश्चितता बनी हुई है। ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से बाहर होने के जनमतसंग्रह में सहमति बनने की वजह से यूरोपीय संघ के साथ कोई अंतिम निर्णय नहीं हो पाया था। साफ तौर पर यूरोपीय संघ के साथ व्यापारिक वार्ता की रफ्तार काफी धीमी रही है। इस दौरान वैश्विक रूप से प्रतिकूल आर्थिक हालात की वजह से सरकार अपने निर्यात लक्ष्य की समीक्षा की प्रक्रिया में है। पूर्व में सरकार ने 2020 तक 900 अरब डॉलर का अपना महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया था। 2015-16 के दौरान भारत से कुल निर्यात 261 अरब डॉलर दर्ज किया गया जिसमें पिछले वित्त वर्ष के 310 अरब डॉलर के निर्यात की तुलना में 16 प्रतिशत की गिरावट आई है।
Keyword: यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए),
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