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आशावादी आंकड़े!
संपादकीय /  February 28, 2017

केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) ने राष्ट्रीय आय का जो दूसरा अग्रिम अनुमान पेश किया, उतना इंतजार हाल में शायद ही किसी आंकड़े का किया गया हो। इसलिए कि इनसे न केवल पूरे वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्घि के अनुमान मिलते हैं बल्कि तीसरी तिमाही के जीडीपी अनुमान भी ये आंकड़े बताते हैं।  इन आंकड़ों में अहम बात यह है कि वृद्घि पर नोटबंदी के प्रभाव से काफी हद तक निपटा जा चुका है। विभिन्न क्षेत्रों पर इसका बेहद कम असर हुआ है। इस प्रक्रिया में सीएसओ ने सरकार से बाहर के हर व्यक्ति को चकित कर दिया है। उसका कहना है कि उसे चालू वित्त वर्ष में 7.1 फीसदी की वृद्घि दर की उम्मीद है। जनवरी में जारी अपने पहले अग्रिम अनुमान में भी उसने यही आंकड़ा प्रस्तुत किया था। परंतु उस अनुमान में नोटबंदी पर विचार नहीं किया गया था। यानी कुलमिलाकर सीएसओ यह कह रहा है कि उच्च मूल्य वर्ग के नोटों, जो कि देश की कुल प्रचलित मुद्रा के 86 फीसदी थे, के बंद होने का देश की अर्थव्यवस्था की वृद्घि संभावनाओं पर कोई असर नहीं हुआ है। तीसरी तिमाही में 7 फीसदी की वृद्घि दर का अनुमान जताया गया है। 
 
बहरहाल अगर यथास्थिति बरकरार रही तो भी तिमाही आंकड़े में बदलाव की उम्मीद रहती है। पहली और दूसरी तिमाही के आंकड़े क्रमश: 7.1 फीसदी और 7.3 फीसदी अनुमान से सुधारकर 7.2 फीसदी और 7.4 फीसदी कर दिए गए। आंकड़ों के मुताबिक कृषि क्षेत्र तीसरी तिमाही में 6 फीसदी की दर से बढ़ा। दो वर्ष के सूखे के बाद इस क्षेत्र के अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीद की जा रही थी। बेहतर मॉनसून की बदौलत खाद्यान्न का रिकॉर्ड उत्पादन होने से अर्थव्यवस्था के इस अहम क्षेत्र की दिक्कतें काफी हद तक दूर हुई हैं। हालांकि इसके एक हिस्से को व्यापक आधार प्रभाव की मदद से भी समझा जा सकता है। गत वर्ष समान तिमाही में कृषि क्षेत्र 2.2 फीसदी सिकुड़ा था। अन्य क्षेत्र जिनमें उल्लेखनीय वृद्घि हुई, वे थे खनन और उत्खनन (7.5 फीसदी), विनिर्माण (8.3 फीसदी), व्यापार, होटल परिवहन आदि (7.2 फीसदी) और सार्वजनिक प्रशासन, रक्षा एवं अन्य सेवाएं (11.9 फीसदी)। 
 
हालांकि सबसे अधिक चौंकाया निजी खपत व्यय में हुई 10 फीसदी की वृद्घि ने। यह वृद्घि ऐसे समय हुई है जब देश की सबसे बड़ी उपभोक्ता केंद्रित कंपनियों में से कुछ की बिक्री में भारी गिरावट आई है। यहां तक कि जिन क्षेत्रों ने उम्मीद से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है उनमें भी आंकड़े बता रहे हैं कि बहुत बड़ी इन्वेंटरी तैयार हो गई है। इसलिए पेंट से लेकर दोपहिया वाहन तक नकारात्मक प्रभाव का उदाहरण हर जगह देखने को मिल सकता है। लेकिन सीएसओ का निजी खपत संबंधी आंकड़ा इसके एकदम उलट असर जाहिर कर रहा है। सकल स्थायी पूंजी निर्माण (यानी निजी निवेश) में अचानक आया बदलाव भी उम्मीद से एकदम परे रहा। लगातार तीन तिमाहियों में आई तेज गिरावट के बाद आखिरकार तीसरी तिमाही में यह 3.5 फीसदी की दर से बढ़ा। 
 
जीडीपी के आंकड़ों को दो तरीके से समझा जा सकता है। पहली बात, सरकार ने पुनर्मुद्रीकरण की प्रक्रिया को इतने बेहतर ढंग से अंजाम दिया कि बाजार में अचानक 86 फीसदी नकदी कम होने के बावजूद अर्थव्यवस्था उसके असर से बची रह सकी। दूसरा तरीका यह है कि अभी इन आंकड़ों के बल पर किसी निर्णय पर पहुंचने के बजाय चौथी तिमाही के आंकड़ों का इंतजार किया जाए। जिन अर्थशास्त्रियों ने तीसरी तिमाही में 6 फीसदी से कम विकास दर की भविष्यवाणी की थी, वे यही कर रहे हैं। मुमकिन है कि तीसरी तिमाही के संशोधित आंकड़े और चौथी तिमाही के नतीजे इस रहस्य को हल करने में मदद करें।
Keyword: GDP, सकल घरेलू उत्पाद, केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ),
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