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जीएसटी के लिए अच्छी जमीन तैयार
सुदीप्त दे /  February 26, 2017

मुनाफाखोरी पर रोक लगाने संबंधी प्रावधान का उद्देश्य जीएसटी लागू होने का लाभ अंतिम उपभोक्ता तक पहुंचाना है। हालांकि इसके कुछ मुद्दों पर उद्योग और कर विशेषज्ञों में मतभेद हैं। संशोधित जीएसटी कानून की धारा 163 के तहत केंद्र सरकार को शक्ति दी गई है कि वह इसकी निगरानी के लिए कए प्राधिकरण का गठन कर सकती है। प्राधिकरण यह देखेगा कि जीएसटी प्रणाली लागू होने पर कारोबारियों को होने वाले फायदे- अतिरिक्त इनपुट कर उधारी और आउटपुट संबंधी प्रभावी दरों में कमी आदि- का लाभ अंतिम उपभोक्ताओं तक पहुंच रहा है अथवा नहीं। यदि उपभोक्ताओं को इस प्रकार के लाभ नहीं दिए जा हों तो प्राधिकरण उन मामलों में जुर्माना लगा सकता है।
 
विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें कई ऐसे मानदंड हैं जो वस्तुओं अथवा सेवाओं के मूल्य निर्धारण को प्रभावित कर सकते हैं। बीडीओ इंडिया के पार्टनर (अप्रत्यक्ष कर) कहते हैं, 'यदि कोई कंपनी अपनी परिचालन कुशलता के कारण मुनाफे में आती है तो क्या इस प्रकार के लाभ को भी अंतिम उपभोक्ताओं तक पहुंचाना होगा जो एक बहस का मुद्दा है।' अद्वैत लीगल के पार्टनर एवं राष्ट्रीय प्रमुख सुजीत घोष पूछते हैं कि क्या कर नीति के स्तर पर भी मुनाफाखोरी पर रोक लगाने संबंधी प्रावधान जरूरी होगा। विशेषज्ञों की शिकायत है कि 'मूल्य में अनुरूप कमी' के मुद्दे को स्पष्टï नहीं किया गया है। इसके अलावा यह भी साफ नहीं है कि प्रभावित पक्षों से शिकायत मिलने पर ये प्रावधान लागू होंगे अथवा संबंधित अधिकारी स्वत: संज्ञान के आधार पर इसकी जांच करेंगे।
 
ईवाई इंडिया के कर पार्टनर बिपिन सपरा कहते हैं, 'जीएसटी का लाभ अंतिम ग्राहकों तक पहुंच रहा है अथवा नहीं, इसकी निगरानी के लिए कायदे-कानून तैयार करते समय सरकार को काफी गंभीरतापूर्वक वस्तुनिष्ठïता पर गौर करने की जरूरत है।' अद्वैत के घोष का मानना है कि संवैधानिक चुनौती के लिहाज से मुनाफाखोरी पर रोक लगाने संबंधी प्रावधान काफी संवेदनशील हैं। वह कहते हैं, 'तकनीकी-कानूनी संदर्भ में अत्यधिक प्रतिनिधिमंडल की आवाज से इस प्रावधान को दबाया जा सकता है।'
 
एक ही कंपनी की विभिन्न शाखाओं के बीच साझा सेवाओं/सेवा लागत को अलग करना
 
साझा सेवाओं के इस मामले में एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) दरें लागू होंगी। हालांकि कर विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी सेवाओं की पहचान और मूल्यांकन करना एक बड़ी चुनौती होगी। लक्ष्मीकुमारन ऐंड श्रीधरन के पार्टनर एल बदरी नारायणन कहते हैं, 'वस्तुओं के स्टॉक के हस्तांतरण पर कर लगाना उचित है। हालांकि सेवाओं के मामले में भी समान प्रावधान लागू करना अनावश्यक होगा।' उन्होंने कहा कि इस प्रावधान से अनावश्यक जटिलताएं पैदा होंगी और वेतन लागत की भरपाई पिछले दरवाजे से की जा सकती है जो जीएसटी के दायरे से बाहर होगा। घोष ऐसे मामलों में आपूर्ति की जगह निर्धारित करने के लिए विशेष दिशानिर्देश जारी करने के पक्ष हैं। वह कहते हैं कि आपूर्ति की जगह निर्धारित करने के लिए जीएसटी प्रणाली के तहत कुछ सेवाएं अलग होंगी। उन सेवाओं के लिए कराधान भी वर्तमान सेवा कर के मुकाबले विपरीत होगा जिससे जीएसटी लागू होने के बाद कुछ क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं।
 
दोहरे नियंत्रण से उत्पन्न अनिश्चितता
 
कर विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान कानून के तहत कर निर्धारणकर्ता संस्थागत तौर पर समान कर प्रशासन के साथ काम करते हैं। ऐसे में काफी हद तक परिणाम के बारे में अंदाजा लगाया जा सकता है। लेकिन दोहरे नियंत्रण मॉडल के तहत समान कर निर्धारणकर्ता एक साल केंद्र सरकार के लिए काम करेगा और दूसरे साल राज्य सरकार के लिए। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को यह स्पष्टï करना चाहिए कि कर निर्धारणकर्ता को केंद्र सरकार अथवा राज्य सरकार के प्राधिकरण के लिए आवंटित किए जाने के बाद उसका उसका आकलन भी समान प्राधिकरण द्वारा किया जाए। केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड के पूर्व चेयरमैन एवं जीएसटी विशेष सुमित दत्त मजूमदार कहते हैं, 'यह हरेक व्यक्ति का मामला है कि दोहरे-नियंत्रण के तहत करदाता को केवल एक ही कर अधिकारी का सामना करना चाहिए चाहे वह केंद्र का हो अथवा राज्य का। इसलिए एक-दूसरे को सशक्त करने की अवधारणा लाई गई लेकिन उसे संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप होना चाहिए।'
 
राज्य पंजीकरण से उठने वाले अनुपालन संबंधी मुद्दे
 
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि आपूर्ति की जगह निर्धारित करने के दौरान काफी विवाद पैदा हो सकते हैं। बदरी नारायणन कहते हैं, 'निर्धारित जगह, स्थायी जगह और कारोबार की जगह संबंधी अवधारणाओं का परीक्षण यह निर्धारित करने में होगा कि क्या कारोबार को किसी राज्य में पंजीकृत करना जरूरी होगा।' ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए यह मॉडल कानून फिलहाल स्पष्टï नहीं है कि क्या उन्हें उन सभी राज्यों में पंजीकरण कराने की जरूरत होगी जहां वे कारोबार करते हैं अथवा उन्हें केवल उसी राज्य में पंजीकरण कराना होगा जहां उनका मुख्यालय स्थित है ताकि वे अपना टीडीएस दायित्व को पूरा कर सकें।
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
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