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नोटबंदी से बदलने लगी प्रीपेड कार्ड की तस्वीर
प्रिया नायर /  February 26, 2017

जब कार्ड से भुगतान की बात आती है तो आम तौर पर आप डेबिट और क्रेडिट कार्ड के बारे में ही सोचते होंगे। लोगों को प्रीपेड कार्ड के बारे में या तो पता ही नहीं होता या उनका खयाल नहीं आता। कुछ अरसा पहले इनका इस्तेमाल करने वाले लोगों की तादाद वाकई बहुत कम थी। लेकिन आज प्रीपेड कार्ड का इस्तेमाल भी शबाब पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी का जो ऐलान किया था, उसके बाद नकदी के बगैर काम चलाने वालों को प्रीपेड कार्ड भी बहुत भा रहा है।

 
बढ़ती जरूरत के कारण प्रीपेड कार्डों में खासी तब्दीली आ रही हैं और इनके इस्तेमाल का दायरा भी बढ़ रहा है। अब कई प्रकार की सेवाओं में इनका इस्तेमाल किया जा सकता है। मिसाल के तौर पर आप रेस्टोरेंट में भोजन कर प्रीपेड कार्ड से भुगतान कर सकते हैं, टोल टैक्स दे सकते हैं, अपनी कार में पेट्रोल भरवा सकते हैं, दवा की दुकान से दवाएं खरीद सकते हैं, हवाई जहाज का टिकट बुक कर सकते है, महीने भर का राशन का सामान खरीद सकते हैं और ई-कॉमर्स वेबसाइट पर खरीदारी भी कर सकते हैं। अगर आपको नकदी की सख्त जरूरत है तो आप इनकी मदद से एटीएम से नकदी भी निकाल सकते हैं।
 
इस्तेमाल के नए क्षेत्र
 
नोटबंदी के बाद प्री-पेड कार्ड जारी करने वाली कंपनियों ने अपने कारोबार में भारी बढ़ोतरी दर्ज की है। प्री-पेड कार्ड आदि जारी करने वाली इट्जकैश के प्रबंध निदेशक (एमडी) नवीन सूर्या का कहना है कि कंपनी ने पिछली तिमाही के दौरान पेरोल और रीइंबर्समेंट कार्ड की श्रेणी में इतनी वृद्धि दर्ज की है, जितनी पिछले दो साल के दौरान दर्ज की गई है। आंकड़ों में बात करें तो यह वृद्धि करीब 300 फीसदी थी। 
 
सूर्या कहते हैं, 'बहुत सी सूक्ष्म, लघु एवं मझोली कंपनियां ये कार्ड मुहैया करा रही है। विशेष रूप से अस्थायी कामगारों को ये कार्ड मुहैया कराए जा रहे हैं क्योंकि ऐसे सभी कर्मचारियों के बैंक खाते खुलवाना हमेशा व्यावहारिक नहीं होता है। इसलिए नियोक्ता प्री-पेड कार्डों के रूप में भुगतान करने को तरजीह देते हैं।' कर्मचारियों के वेतन भुगतान के लिए ओपन लूप प्रीपेड कार्ड को तरजीह दी जाती है क्योंकि इनकी मदद से कर्मचारी अपनी मर्जी के हिसाब से कहीं भी खर्च कर सकते हैं। इन कार्ड के लिए थोड़े-बहुत केवाईसी (नो योर कस्टमर) यानी पहचान दस्तावेज की जरूरत पड़ती है और इन्हें बैंक के साथ मिलकर संयुक्त रूप से जारी किया जाता है। ओपन लूप कार्ड का इस्तेमाल किसी पॉइंट ऑफ सेल, एटीएम और ऑनलाइन भुगतान में किया जा सकता है। 
 
क्विकसिल्वर के अध्यक्ष (मुख्य कारोबार) शंकर बालन कहते हैं कि होटल और रेस्टोरेंट क्षेत्र से जुड़ी कुछ शीर्ष कंपनियों और शृंखलाओं के कारोबार में गिफ्ट कार्ड का इस्तेमाल बहुत ज्यादा बढ़ गया है। उन्होंने बताया कि क्विकसिल्वर ने अपने कारोबार में 200 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की है। हमने होटल और रेस्टोरेंट से जुड़े कार्डों में भारी बढ़ोतरी दर्ज की है। उत्तर और पश्चिम भारत में बढ़ोतरी की रफ्तार बहुत ज्यादा रही है।
 
नियामक से बढ़ावा
 
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के कुछ फैसले भी प्रीपेड कार्ड कंपनियों का कारोबार बढ़ाने में खासे सहायक साबित हुए हैं। मिसाल के तौर पर पिछले दिसंबर में आरबीआई ने बैंकों को उन संस्थानों के लिए प्रीपेड साधन जारी करने की मंजूरी दे दी, जो अपने कर्मचारियों को प्रीपेड कार्ड देना चाहते हैं। पहले यह सुविधा केवल सूचीबद्ध कंपनियों के लिए उपलब्ध थी। लेकिन अब आरबीआई ने गैर-सूचीबद्ध कंपनियों, साझेदार कंपनियों, एकल स्वामित्व उद्यमों, नगर निगम जैसे सरकारी संगठनों को भी इसी जमात में खड़ा कर दिया है। ये सब भी अपने कर्मचारियों के लिए अब प्रीपेड कार्ड ले सकते हैं। ये कार्ड किसी भी बैंक द्वारा संयुक्त रूप से जारी किए जाएंगे।
 
नए उद्योग
 
सूर्या कहते हैं कि प्री-पेड कार्ड और दूसरे साधनों को अपनाने वालों में केवल ऐसी कंपनियां या होटल-रेस्टोरेंट ही नहीं हैं बल्कि परिवहन और मुद्रा विनिमय यानी मनी चेंजिंग के कारोबार में शामिल कंपनियां भी ऐसा कर रही हैं। परिवहन कंपनियां अपने ड्राइवरों को ईंधन, खाने, टोल टैक्स के भुगतान, मरम्मत आदि के लिए नकदी में भुगतान करती हैं। लेकिन नोटबंदी के बाद उन्होंने प्री-पेड कार्ड का इस्तेमाल शुरू कर दिया है क्योंकि इनका इस्तेमाल पेट्रोल पंपों, टॉल बूथों और एटीएम से पैसे निकालने में भी किया जा सकता है। इसी तरह मुद्रा बदलने वालों ने उन विदेशी पर्यटकों को रुपये से भरे हुए प्री-पेड कार्ड मुहैया कराना शुरू कर दिया है, जो अपने विदेशी मुद्रा बदलवाना चाहते हैं। उन्होंने कहा, 'इस श्रेणी में औसतन 500 से 700 डॉलर का रीलोड होता है। हम यह सेवा अपने बैंक साझेदारों और मुद्रा विनिमय साझेदारों के साथ मिलकर मुहैया कराते हैं और यह सेवा देश के 28 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर देते हैं।'
 
सुधरा रिकॉर्ड का रखरखाव 
 
आने वाले समय में स्थायी कर्मचारियों को ईंधन इत्यादि के लिए बिल जमा करने पर खाते में रकम आने अथवा नकदी दिए जाने की व्यवस्था बंद हो सकती है और उसके बजाय रीइंबर्समेंट प्रीपेड कार्ड मिल सकता है। प्रीपेड साधन जारी करने वाली वित्तीय प्रौद्योगिकी कंपनी जीटा के सह-संस्थापक और मुख्य तकनीकी अधिकारी रामकी गड्डïीपति कहते हैं, 'इससे संगठनों को खर्च का रिकॉर्ड रखने में मदद मिलेगी। इसे संगठन के सिस्टम से जोड़ा जा सकता है, जबकि बैंक ऐसा नहीं कर पाएगा।' बालन का कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक खुदरा स्टोर और उपभोक्ता उपकरण बनाने वाली कंपनियां भी प्रीपेड साधनों का ज्यादा इस्तेमाल करने लगे हैं। इन दिनों कंपनियां न केवल अपने कर्मचाारियों को इनाम देने में प्री-पेड कार्ड का इस्तेमाल करती हैं बल्कि त्योहारी सीजन और कारोबार प्रचार कार्यक्रमों के दौरान भी ग्राहकों को प्रोत्साहन राशि देने में इनका इस्तेमाल करती हैं।
 
सुरक्षा के इंतजाम
 
ओपन लूप प्रीपेड कार्ड दो स्तरीय सत्यापन के साथ आते हैं। एक एटीएम एवं पीओएस लेनदेन और दूसरा ऑनलाइन लेनदेन के लिए है। इसमें सुरक्षा डेबिट और क्रेडिट कार्ड के समान है। लेकिन प्री-पेड कार्ड में पैसा आपके बैंक खाते या क्रेडिट सीमा की तुलना में कम होता है, इसलिए जोखिम भी कम होता है। लेकिन गड्डïीपति का कहना है कि वर्तमान स्वरूप में दो स्तरीय सत्यापन भी पर्याप्त नहीं है। वह कहते हैं, 'ज्यादातर कार्डों में अभी मैग्नेटिक स्ट्रिप है और दूसरा कारक निर्धारित चार अंकों का पिन है। इस सूचना को आसानी से टर्मिनल पर पढ़ा जा सकता है। हम इसमें भारी बढ़ोतरी देख रहे हैं। इसमें कमी लाने के लिए हमने वन टाइम पासवर्ड के रूप में ऑफलाइन पिन बनाया है, इसलिए पिन याद रखने की कोई जरूरत नहीं है।' 
 
बालन कहते हैं कि इसी तरह क्विकसिल्वर खर्च के समय ग्राहकों के मोबाइल पर ओटीपी भेजने का विकल्प भी मुहैया कराती है। जेटा में भी ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों के लिए पिन के अलावा स्वाइप की सुविधा भी है, भले ही आप लेनदेन मोबाइल ऐप के जरिये कर रहे हों या लैपटॉप इस्तेमाल कर रहे हों। जब आप अपने कार्ड की जानकारी डालते हैं तो आपको जेटा के पेज पर ले जाया जाता है और आपको अपना मोबाइल ऐप इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। वेबपेज इसे समझता है और आप इसे उस पेज पर लेकर आता है, जहां आप अपना लेनदेन कर रहे थे। यह नोटिफिकेशन आपके मोबाइल पर मिलता है। 
Keyword: digital, डिजिटल भुगतान,
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