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तीन साल में विदेशी खरीदारी पर देसी फंड पड़ेंगे भारी
बीएस संवाददाता / मुंबई February 24, 2017

देश में आम लोगों की वित्तीय बचत में सुधार और वित्तीय बचत में इक्विटी की हिस्सेदारी में इजाफे की पृष्ठभूमि में म्युचुअल फंड देसी बाजार में सबसे ज्यादा दबदबे वाले निवेशक के तौर पर उभर सकता है। डॉयचे बैंक के मुताबिक, इक्विटी में देसी निवेशकों का निवेश (ज्यादातर म्युचुअल फंडों के जरिए) 2018 से 2020 तक औसतन 1.40 लाख करोड़ रुपये सालाना पर पहुंच सकता है। 2012 से 2014 के बीच अपने उफान के समय में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने देसी इक्विटी में औसतन 20 अरब डॉलर सालाना का निवेश किया था। विश्लेषकों ने कहा, अगर वित्तीय बचत में सुधार हुआ और इक्विटी के प्रति रुझान जारी रहा तो इक्विटी में म्युचुअल फंडों का निवेश अगले कुछ कैलेंडर वर्षों में एफआईआई के निवेश के उच्चस्तर के मुकाबले ज्यादा रह सकता है। अभी घरेलू बचत की करीब 40 फीसदी वित्तीय संपत्तियां हैं, वहीं वित्तीय संपत्तियों में इक्विटी की हिस्सेदारी आठ फीसदी से कम है। इसमें खासा सुधार हुआ है क्योंकि साल 2012 में वित्तीय संपत्तियां घरेलू बचत का महज 32 फीसदी थीं, वहीं वित्तीय बचत का करीब एक फीसदी इक्विटी में गया था।
 
अगर घरेलू बचत की हिस्सेदारी वित्तीय बचत में मौजूदा 40 फीसदी के मुकाबले 46 फीसदी होती है और इक्विटी में वित्तीय बचत मौजूदा 8.5 फीसदी से बढ़कर 10.5 फीसदी पहुंचती है तो इसका मतलब इक्विटी बाजार के लिए बड़ा बोनान्जा हो सकता है। डॉयचे बैंक के विश्लेषकों अभय लैजावाला और अभिषेक सराफ ने कहा, भारत में आम लोगों की वित्तीय बचत में ढांचागत बदलाव आ रहा है। हमारा मानना है कि यह प्रवृत्ति आगे और तेज होगी और एक आशावादी वाले परिदृश्य में इक्विटी में आम लोगों का औसत सालाना निवेश वित्त वर्ष 2018-20 में पिछले तीन साल में इक्विटी म्युचुअल फंडों में हुए औसत निवेश के मुकाबले दोगुनी हो सकती है।
 
पिछले तीन सालों में इक्विटी एमएफ में औसत सालाना निवेश करीब 60,000 करोड़ रुपये रहा है। एफआईआई की तरफ से निवेश निकासी के दौरान इक्विटी म्युचुअल फंडों में मजबूत निवेश ने देसी बाजार की मदद की है। विश्लेषकों ने कहा, इसने इक्विटी बाजार को और स्थिर होने में मदद की है। अगर डॉयचे बैंक का अनुमान सही होता है तो म्युचुअल फंड देसी बाजार में सबसे ज्यादा दबदबे वाला संस्थागत निवेशक बन सकता है। साल 2015 और 2016 में एफआईआई का निवेश इससे पहले के तीन सालों के मुकाबले खासा घटा है। महंगाई और अमेरिका में उच्च बढ़त के अनुमान से विदेशी निवेश में और कमी का अनुमान है।
 
अभी एफआईआई भारतीय बाजार में अपने उच्च मालिकाना हक के जरिए सबसे ज्यादा दबदबे वाली और सबसे बड़ी संस्थागत निवेशक है। बीएसई 200 की कंपनियों में एफआईआई की हिस्सेदारी करीब 25 फीसदी है। इसकी तुलना में 200 अग्रणी सूचीबद्ध कंपनियों में एमएफ की हिस्सेदारी पांच फीसदी से कम है। पिछले तीन सालों में इक्विटी एमएफ में रिकॉर्ड निवेश हुआ है और डॉयचे बैंक का मानना है कि यह प्रवृत्ति कुछ वजहोंं से जारी रह सकती है, मसलन जनसंख्या वितरण में बदलाव, इक्विटी बाजार में युवाओं की बढ़ती भागीदारी, छोटे व मझोले शहरों में म्युचुअल फंडों का विस्तार और घरेलू बचत का काफी हिस्सा इक्विटी बाजार से बाहर रहना भी शामिल है।
Keyword: share, market, sensex, बीएसई, कंपनी, शेयर, पुनर्खरीद,
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