Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Wednesday, August 23, 2017 10:57 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|
 
होम अर्थव्यवस्था खबर

सड़कों को देनी होगी टॉप गियर की रफ्तार
मेघा मनचंदा /  February 24, 2017

केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने पिछले दिनों कहा था कि केंद्र सरकार ने मई 2014 से 4.5 लाख करोड़ रुपये की राजमार्ग परियोजनाएं क्रियान्वित की हैं, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण और पर्यावरण संबंधी मंजूरी जैसी बाधाएं दूर होने के बावजूद आगे चलकर राजमार्ग परियोजनाओं के ठेकों की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। इसकी वजह भी दिलचस्प है। एक विश्लेषक के अनुसार ठेकेदार काफी व्यस्त हैं और नए ठेके उठाने के लिए बाजार में परामर्शदाताओं की कमी हो गई है। 

 
जब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ((राजग) सरकार ने सत्ता की बागडोर जिम्मेदारी थी, तब निजी निवेश के अभाव की वजह से इस उद्योग में सुस्ती बनी हुई थी। एक अधिकारी के अनुसार सरकार द्वारा इंजीनियरिंग, खरीद एवं निर्माण (ईपीसी) आधार पर अधिक ठेके देने का निर्णय लिए जाने के बाद से बुनियादी ढांचा गतिविधि में तेजी आई है। ईपीसी परियोजनाएं पूरी तरह से सरकार द्वारा वित्त पोषित हैं और इसलिए कर्ज से परहेज करने वाली कंपनियों को इनके क्रियान्वयन में आसानी हो सकती है। इसके अलावा सरकार राजमार्ग क्षेत्र में निजी निवेश का प्रवाह बढ़ाने की भी कोशिश कर रही है। इस तरह का एक प्रयास हाइब्रिड-एन्युटी मॉडल्स (एचएएम) की पेशकश है जिसके तहत दिसंबर 2016 तक 18 परियोजनाएं आवंटित की गईं। इन ठेकों में कुछ राशि (40 फीसदी तक) केंद्र सरकार से मिलती है। 
 
सड़क निर्माण के लिए सरकारी मदद अगले साल लगभग 60 प्रतिशत बढ़कर 23,891.59 करोड़ रुपये हो जाने का अनुमान है, क्योंकि उसने सड़क निर्माण के लिए कई बड़ी परियोजनाओं की रूपरेखा तैयार की गई है। एक अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि इस समय सरकार के लिए रकम की व्यवस्था को लेकर कोई समस्या नहीं है। वित्तीय स्थिति अधिक सहज है क्योंकि आप सड़क परियोजनाओं से रकम कमा सकते हैं। डेलॉयट टोचे तोमात्सु इंडिया में पार्टनर विश्वास उदगिरकर ने कहा कि इस सरकार और उसकी पूर्ववर्ती संप्रग ने इस क्षेत्र ने निवेश किया है, लेकिन उसका असर उम्मीद के अनुरूप नहीं दिखा है। नीतिगत फैसलों में समय लग रहा है। हालांकि एक अन्य विश्लेषक ने कहा कि फिलहाल किसी तरह की समस्या नहीं है, इसलिए यह समय सरकार के लिए परियोजनाओं के आवंटन के लिहाज से अनुकूल है। उन्होंने कहा, 'सरकार को अधिक परियोजनाएं आवंटित करने से परहेज नहीं करना चाहिए।' हालांकि सरकार और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) आने वाले महीनों में अधिक राजमार्ग परियोजनाओं के आवंटन के लिए तैयार हैं, लेकिन अटकी हुई परियोजनाओं की दिक्कत अभी तक बरकरार है। केंद्र सरकार को कम से कम 10 'फंसे हुए' राजमार्ग ठेकों के लिए कर्ज की व्यवस्था करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 
 
लगभग 8,600 करोड़ रुपये से अधिक की राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं मुख्य तौर पर भूमि अधिग्रहण से संबंधित समस्या की वजह से 'फंसे हुए' की श्रेणी में तब्दील हो चुकी हैं जिससे निर्माण प्रभावित हुआ है। ये परियोजनाएं काफी हद तक पर्यावरण और वन मंजूरियों, स्थानीय समस्याओं और कुछ कंपनियों द्वारा अधिक आक्रामक बोली प्रक्रिया आदि की वजह से प्रभावित हुई हैं। ये 10 परियोजनाएं एलऐंडटी, गैमन और इरा इन्फ्रा जैसी प्रमुख निर्माण कंपनियों से जुड़ी हुई हैं। ये तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, राजस्थान और उत्तराखंड में हैं। बैंकों ने भी इन परियोजनाओं पर रोक लगा दी है क्योंकि इनके फंसने यानी एनपीए में तब्दील होने की आशंका है। 31 दिसंबर 2016 तक आवंटित 46 राजमार्ग ठेकों में से 24 को ईपीसी, 18 को हाइब्रिड-एन्युटी और 4 को बीओटी (बनाओ, चलाओ और सौंपो) के आधार पर आवंटित किया गया है। वर्ष 2017-18 में सरकार ने परिवहन क्षेत्र के लिए 2,41,381 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा है। इसमें रेल, सड़क और नौवहन शामिल हैं। राजमार्गों के लिए बजट आवंटन 2017-18 में बढ़ाकर 64,900 करोड़ रुपये किया गया है। तटीय कनेक्टिविटी से संबंधित लगभग 2,000 किलोमीटर की सड़कें बनाए जाने की योजना है। 
 
इसके अलावा भूतल परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और एनएचएआई ने 2017-18 में 15,000 किलोमीटर के निर्माण का लक्ष्य रखा है। यह लक्ष्य आसान नहीं है क्योंकि मंत्री स्वयं स्वीकार कर चुके हैं कि सरकार चालू वित्त वर्ष के 10,000 किलोमीटर के लक्ष्य को हासिल करने में सफल नहीं रहेगी। अप्रैल-दिसंबर 2016 के दौरान लगभग 5,000 किलोमीटर की सड़कें बनाई गई थीं, लेकिन सड़क निर्माण की धीमी गति की वजह से सरकार अपने लक्ष्य में 2,000 किलोमीटर तक की कमी दर्ज कर सकती है। 
Keyword: road, transport,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
Advertisements 
Cover from Natural Calamities. Buy Home Insurance
Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
  आपका मत
 क्या नीलेकणी की वापसी से इन्फोसिस में बढ़ेगा भरोसा?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.