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निजी निवेश के मेल से रफ्तार भरेगी रेल
शाइन जैकब /  February 24, 2017

पिछले तीन साल में भारतीय रेलवे का व्यय तीन गुना हो गया है और सरकार 2017-18 में 1.31 लाख करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बना रही है। रेलवे का पूंजीगत खर्च 2014-15 में 58,718 करोड़ रुपये और 2015-16 में 93,520 करोड़ रुपये था। यह चालू वित्त वर्ष में 1.21 लाख करोड़ रुपये अनुमानित है, जिसे रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने 'रेलवे के इतिहास में अभूतपूर्व' बताया था।

 
चालू वित्त वर्ष में रेलवे ने करीब 40,000 करोड़ रुपये की कीमत के डीजल और इलेक्ट्रिक इंजनों के ऑर्डर दिए हैं। हालांकि इनमें से ज्यादातर का विनिर्माण रेलवे के ही कारखानों में होगा। इसके अलावा पिछले दो वित्त वर्षों में औसतन 1.1 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं, जबकि पिछले चार वर्षों का इसका औसत 25,000 करोड़ रुपये है। एक आधिकारिक सूत्र ने बताया, 'वित्त वर्ष 2016-17 में कुल पूंजीगत खर्च का केवल 17.4 फीसदी यानी 21,000 करोड़ रुपये निजी क्षेत्र से आया। इसी तरह 2017-18 के बजट अनुमान में निजी क्षेत्र का योगदान पूंजीगत खर्च का महज 16.7 फीसदी या 22,000 करोड़ रुपये है। इससे यह पता चलता है कि मोदी सरकार ने रेल क्षेत्र में कितना अधिक निवेश कर रही है।' 
 
प्रभु सरकारी स्वामित्व वाली भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) से 1.5 लाख करोड़ रुपये का ऋण हासिल करने में सफल रहे। मंत्रालय ने विश्व बैंक से पूर्वी समर्पित मालढुलाई गलियारे के लिए तीन चरणों में 2.7 अरब डॉलर का भी कर्ज लिया है। हालांकि रेलवे ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी देरी से शुरू की, मगर नवंबर 2015 में बिहार के मढ़ौरा और मधेपुरा जिलों में रेल इंजन कारखाना लगाने के लिए जीई और अल्सटॉम को 7 अरब डॉलर के ठेके दिए गए। हालांकि इन कारखानों में निर्माण शुरू नहीं हुआ है, लेकिन ये रेलवे में बड़े निजी निवेश का संकेत हैं। इसके अलावा जिस क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, वह 400 स्टेेशनों का पुनर्विकास है। इनमें 1 लाख करोड़ रुपये के निवेश के आसार हैं।  प्रभु ने हाल में कहा था कि उनके मंत्रालय ने रेल बुनियादी ढांचे के ज्यादातर क्षेत्र में निजी निवेश को मंजूरी दी है। इनमें इंजन एवं रोलिंग स्टॉक, विनिर्माण एवं मरम्मत, सिग्नलिंग एवं बिजली कार्य और समर्पित मालढुलाई लाइनें शामिल हैं।
 
रेलवे के पूर्व वित्त आयुक्त आर शिवदासन ने कहा, 'यह देखना होगा कि इस निवेश में से कितना निवेश रेलवे को खुद को पटरी पर लाने और यात्री एवं मालभाड़े में सुधार लाने में मदद करता है।' हाल के वर्षों में रेल से यात्रा करने वालों की तादाद में कमी आ रही है। इसमें 2015-16 में करीब 3 फीसदी, 2014-15 में 2.5 फीसदी और 2013-14 में 3 फीसदी गिरावट आई। चालू वर्ष में इसमें 1 फीसदी की मामूली बढ़ोतरी हुई है। आलोचकों का कहना है कि नई लाइनें शुरू करने से भी यात्रियों की संख्या में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई है। वर्ष 2017-18 में 3,500 किलोमीटर रेल लाइनों की शुरुआत होगी, जबकि 2016-17 में 2,800 किलोमीटर रेल लाइनों पर परिचालन शुरू हुआ था। विशेषज्ञों का कहना है कि 2012-13 में पूंजीगत खर्च 50,383 करोड़ रुपये था। उस साल रेलवे ने 2,000 किलोमीटर से अधिक की रेल लाइनें शुरू की थीं।
Keyword: infra, बुनियादी ढांचा विकास,
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