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जली बिजली तो उद्योग की गाड़ी चली
श्रेया जय /  February 24, 2017

विद्युतीकरण की दो अहम योजनाओं- दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (डीडीयूजीजेवाई) और समन्वित विद्युत विकास योजना (आईपीडीएस) के लिए नए वित्त वर्ष में बजट आवंटन क्रमश: 43 फीसदी और 30 फीसदी बढ़ाया गया है। इन दो योजनाओं के कारण परंपरागत बिजली उत्पादन से ध्यान हटाया गया है और वितरण पर ज्यादा जोर दिया गया है। इसके साथ ही विद्युत उपकरण क्षेत्र में भी हलचल बढ़ी है। 

 
उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि इन दो योजनाओं से ईपीसी (इंजीनियरिंग, खरीद, निर्माण) ठेकेदारों के पास भारी मांग आ रही है, जिससे 33 किलोवोल्ट से कम या वितरण क्षेत्र के उपकरणों के भारी ऑर्डर आ रहे हैं। डीडीयूजीजेवाई और आईडीपीएस ग्रामीण और शहरी विद्युतीकरण की योजनाएं हैं। दोनों की घोषणा 2015 में वर्तमान सरकार के पहले पूर्ण केंद्रीय बजट में की गई थी। 
 
पूववर्ती सरकारों की सभी विद्युती योजनाओं को इन दो योजनाओं में समाहित कर दिया गया था। इन दोनों योजनाओं के तहत पिछले तीन सालों में राज्यों को धन मुहैया कराने की रफ्तार सुस्त रही है। सरकारी अधिकारियों का दावा है कि आईपीडीएस या इसकी पूववर्ती आर-एपीडीआरपी (पुनर्गठित त्वरित विद्युत विकास एवं सुधार कार्यक्रम) की प्रगति 2014 से पहले सुस्त थी। वर्ष 2005 में जब हाल का ग्रामीण विद्युतीकरण कार्यक्रम शुरू हुुआ था, उस समय करीब 6 लाख गांवों को चिह्नित किया गया था। अब जिन गांवों का विद्युतीकरण बाकी है, उनकी संख्या घटकर 5,634 रह गई है। उस समय इस योजना को राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना नाम दिया गया था। बाद में 2014 में नई सरकार ने इसका नाम बदलकर दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना कर दिया और इसमें कुछ अन्य परियोजनाओंं को शामिल कर दिया। 
 
सरकार ने 14 अक्टूबर, 2015 को शुरू किए गए ग्रामीण विद्युतीकरण के पहले चरण (गर्व-1) में करीब 18,000 फील्ड इंजीनियर नियुक्त किए थे ताकि यह पता लगाया जा सके कि राज्य केंद्र सरकार द्वारा आवंटित धनराशि का इस्तेमाल कर रहे हैं या नहीं। विद्युतीकरण का केवल यही मतलब नहीं है कि गांव के प्रत्येक घर में बिजली का कनेक्शन हो। इसके लिए बिजली की निरंतर आपूर्ति भी जरूरी है। इसे मद्देनजर रखते हुए सरकार ने गर्व का दूसरा चरण नवंबर 2016 में शुरू किया। गर्व-2 का निगरानी तंत्र 6 लााख गांवों के सभी घरों में मीटर लगने, विद्युत आपूर्ति और बिजली कटौती की जानकारी मुहैया कराएगा। 
 
अब तक इन दो योजनाओं के लिए 1.08 लाख करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया जा चुका है, जिसमें से करीब 44,000 करोड़ रुपये राज्यों को मंजूर कर दिए गए हैं। राजनीतिक कारणों से ही सही गांवों में बिजली पहुंचने की रफ्तार शहरी विद्युतीकरण के मुकाबले तेज रही है। शहरी विद्युतीकरण में बिजली तंत्र को मजबूत करना, वर्तमान तंत्र को सूचना तकनीक से चाक-चौबंद करना और सभी घरों में मीटर लगाना शामिल है। इसकी रफ्तार सुस्त है, मगर सरकार के नजरिये से यह 'शानदार' है। विद्युत मंत्रालय में सचिव पी के पुजारी ने कहा, 'आईपीडीएस के तहत एक से अधिक कार्यक्रम चल रहे हैं, इसलिए शहरों में बिजली की गुणवत्ता सुधर रही है। लगभग सभी राज्य हमारी इस योजना से सहमत हैं कि शहरी क्षेत्र को मजबूत बिजली वितरण ढांचे के लिए और निवेश की जरूरत है।'आईपीडीएस ही एकमात्र ऐसी योजना है, जिसमें केंद्र सरकार 60 फीसदी से अधिक अनुदान देती है। देश के 1,228 कस्बों को अपना बिजली तंत्र मजबूत करने की दरकार थी, जिसमें से 738 ने पिछले तीन साल में यह काम कर दिखाया है। वहीं 2019 तक 4,041 कस्बों में बिजली तंत्र को आईटी से लैस करने की जरूरत है। करीब 1,405 कस्बों को 'गो लाइव' या 100 फीसदी आईटी से सुसज्जित विद्युत आपूर्ति बुनियादी ढांचे वाले कस्बे घोषित कर दिया गया है। आईपीडीएस या पूर्ववर्ती आर-एपीडीआरपी के लिए 25,848 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं, जिसमें से 2,113 करोड़ रुपये वितरित कर दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि पिछले साल आईपीडीएस के तहत विद्युत उपकरणों की खरीद प्रक्रिया में काफी समय बरबाद हो गया। बोली के बाद भी इसमें सफलता नहीं मिली। 
 
बिजली की दरें कम करने और राज्यों द्वारा उपकरणों की स्वैच्छिक खरीद पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने वितरण खंड में उपकरणों के लिए मानक कीमत और विनिर्देश तय करने का फैसला किया था। हालांकि एकसमान नियमों के खिलाफ राज्यों के विरोध के कारण केंद्रीय मंत्रालय को अपने कदम वापस खींचने पड़े। अप्रैल से दिसंबर 2016 के दौरान ट्रांसफॉर्मरों की बिक्री इससे पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 16 फीसदी बढ़ी, जबकि सर्किट ब्रेकर्स की बिक्री में 49 फीसदी और पारेषण लाइन टावर की बिक्री में 9 फीसदी इजाफा हुआ। सरकार ने 24,000 फीडरों की निगरानी के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करने की योजना बनाई है, ताकि शहरों में बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता और मात्रा सुधारी जा सके। सरकार आगामी वर्ष में धनराशि के वितरण में भी तेजी आने की उम्मीद कर रही है।
 
Keyword: power, solar,,
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